- महिला दिवस पर विशेष, टोटो चला कर मिशाल पेशकर रहीं प्रीतम

- महिला दिवस पर विशेष, टोटो चला कर मिशाल पेशकर रहीं प्रीतम
– विपरीत परिस्थितियों में प्रीतम की संघर्ष महिलाओं के लिए बनी प्रेरणाश्रोत कटिहार आठ मार्च महिला दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है. इस दिन महिला सशक्तिकरण को लेकर शहर में प्रशासन व निजी स्तर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. महिला दिवस पर सेमापुर दुर्गापुर कुशवाहा टोला किसान की पुत्री प्रीतम कुमारी के साहस जुनून व मजबूत इरादों की चर्चा नहीं करना उनके साहस के साथ बेमानी साबित होगी. ऐसा इसलिए कि इन्होंने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर एक ओर जहां अपने परिवार का पोषण कर रही, पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों के कंधे के साथ कंधा मिला टोटो चला रही है. ये टोटो शहर में तब से चला रही. जब टोटो की संख्या शहर में मात्र 1300 हुआ करता था. इनके मजबूत इरादों से प्रेरणा लेकर आजकल शहर में कई इलाकों से करीब पांच सात की संख्या महिलाएं टोटो चला परिवार पालन कर रही है. सेमापुर दुर्गापुर कुशवाहा टोला की प्रीतम कुमारी अपने संघषों को लेकर बताती है कि इन्होंने मैट्रिक 2002 में की थी. वे बताती हैं उनके घर की हालात शुरू से ही खराब थी. 2005 में पिता रामचन्द्र सिंह की मौत हो गयी. भाईयों ने इनकी शादी 2013 अप्रैल माह में न्यू मार्केट के एक बीज विक्रेता के साथ करायी. इनकी एक पुत्री भी है. माता रामजनी देवी की मौत 2014 में हो गयी. माता-पिता के सिर से साय उठ जाने के बाद उनके पति के साथ अनबन होने के कारण ये सड़क पर आ गयीं. हिम्मत नहीं हारी और अपने पुत्री काजल को कुछ बनाने के लिए सड़क पर टोटो दौड़ाने का निर्णय लिया. करीब ढाई साल पूर्व टोटो चलाना सीखी. तब से अब तक ये टोटो चलाकर पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं के लिए प्रेरणाश्रोत बनी हुई है. कहा, उन्हें देखकर शहर में करीब पांच से सात महिलाएं टोटो चलाकर अपना जीवन यापन कर रही हैं. फिलवक्त ये ड्राइवर टोला में एक किराये के मकान में रहकर अपनी पुत्री को पढ़ा रही है. सुबह आठ बजते ही स्टेशन ब्लिडिंग के सामने टोटो लगाकर राहगीरों का इंतजार अन्य टोटो चालको की तरह करने लगती है. इनका कहना है कि प्रतिदिन छह से सात सौ रूपये टोटो से अजित कर लेती हैं. शहर के इन मोहल्लों की और महिलाएं चला रही टोटो ड्राइवर टोला निवासी प्रीतम कुमारी की माने तो उनको देखादेखी शहर की कई मोहल्लाें की महिलाएं टोटो चला रही है. जिसमें ड्राइवर टोला की नयना देवी, हवाईअड्डा, अनाथालय रोड, दुर्गास्थान समेत कई अन्य महिलाएं टोटो चला रही हैं. इनका कहना है कि सुबह आठ से शाम छह बजे तक ये टोटो चलाती हैं. उसके बाद स्टेशन ब्लिडिंग के सामने ही छोटा मोटा दुकान चला कर गुजर बसर करती है. पुरूष प्रधान समाज के बीच महिला होकर टोटो चलाने पर बताया कि इन्हें शुरू शुरू झिझक होती थी. समाज के लोग देखकर कुछ दिनों तक खिल्ली तक उड़ाये. लेकिन अब इन सबके आदि हो गये हैं. —————————————————————————— मजबूत इच्छा शक्ति व कार्य कुशलता से समाज के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गयी, रानी साह – पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही कटिहार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर ऐसी महिलाओं को याद किया जाता है. जिन्होंने अपने निश्चय और मजबूत इच्छा शक्ति से समाज में अपना नाम कमाया और अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बन गयी. कटिहार जिला के आजमनगर प्रखंड के सालमारी बाजार स्थित किराना दुकानदार रानी साह की. जिन्होंने अपने पति के मृत्यु पश्चात पारिवारिक समस्याओं से निपटते हुए अपने पांच बच्चों की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी. जिसका नतीजा है कि आज सभी अपने पैरों पर खड़े हैं. बताते चलें की मूलतः सूढ़ी समाज से ताल्लुक रखने वाली रानी साह का जन्म डंडखोरा प्रखंड स्थित मोहिनी डुमरिया गांव में पीडीएस दुकानदार सहदेव साह के घर हुआ था. वर्ष 2009 में अपने पति पुरुषोत्तम साह उर्फ डोमा की मृत्यु पश्चात अपने बच्चों प्रीतम कुमार साह, पूजा कुमारी साह, सुमन कुमारी, आकांक्षा कुमारी व वंश कुमार साह की शिक्षा-दीक्षा और बेहतर भविष्य के लिए घर की दहलीज लांघकर इन्होंने अपना होटल संभाला. चाय बेची और विभिन्न अवसर पर सड़क किनारे कपड़े भी बेचे. ताकि बच्चों को पिता की कमी महसूस ना हो. बाद में स्थानीय बाजार के अनुरूप इन्होंने किराना बिजनेस शुरू किया और कर दिखाया. आज ये बिजनेस वूमन ना सही पर एक सुपर वुमन या यूं कहें कि सुपर मम्मी जरूर हैं. इनकी कार्य कुशलता, लोक-व्यवहार समाज के लिए एक प्रेरणा है. कहती हैं रानी साह कहा कि एक परिवार चलाना अत्यंत कठिन कार्य है और अकेली महिला के लिए तो दुष्कर. अल्प आयु में पति के निधन ने मुझे भीतर तक तोड़ कर रख दिया. पर बच्चों का मुंह देखकर मैंने मन बनाया कि मेरे बच्चे भी बेहतर भविष्य के हकदार हैं. इन्हें वो सब जरूर मिलना चाहिए जो इनके पिता इन्हें देना चाहते थे. समाज के अन्य लोगों के साथ-साथ मेरे सभी बच्चों ने भी भरपूर साथ दिया. वक्त के साथ चलकर आज बड़ा पुत्र प्रीतम कुमार साह अपना व्यवसाय कर रहा है. जिसकी शादी हो गई है और दो बच्चे भी हैं. तीनों बेटियां भी ब्यूटीशियन का कोर्स करके स्वावलंबी हो गई हैं. स्वयं का पार्लर चल रही है. बड़ी बेटी पूजा साह का कटिहार शहर में अपना लेडीज ब्यूटी पार्लर है. जबकि अन्य दो बेटी सुमन व आकांक्षा मुंबई जैसी महानगर में खुद का पार्लर चला रही है. फिल्मी सितारों को भी अपनी सेवाएं दे रही हैं. छोटा बेटा वंश कुमार साह मेरे साथ ही काम करता है. मेरा भरपूर ख्याल रखता है. बदलते परिवेश में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं. आधी आबादी अर्थात महिलाएं भी किसी से कम नहीं है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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