शहरवासियों को नल जल योजना का नहीं मिल रहा समुचित लाभ

Published by : RAJKISHOR K Updated At : 23 Feb 2026 7:48 PM

विज्ञापन

शहरवासियों को नल जल योजना का नहीं मिल रहा समुचित लाभ

विज्ञापन

– करोड़ों खर्च के बावजूद डब्बा बंद पानी पीने को लोग विवश – शुद्ध पानी के अभाव में विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग कटिहार विभागीय पदाधिकारियों का दावा है कि कटिहार शहर में नल जल योजना का कार्य करीब पूरा कर लिया गया है. बावजूद करोड़ों रूपये की राशि इस योजना में खर्च के बाद भी शहरवासियों को इस योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. जिस वजह से शहरवासी आज भी डब्बाबंद पानी पीने को विवश हो रहे हैं. नल जल योजना का कार्य भले ही पूरा कर लेने का विभागीय पदाधिकारियों द्वारा दावा किया जा रहा है. लेकिन धरातल पर लोग आज भी आयरणयुक्त पानी के रूप में मीठा जहर पीने को विवश हैं. शुद्ध पानी के अभाव में शहरवासी विभिन्न बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं. कटिहार मेडिकल कॉलेज रोड निवासी उत्पल आया, राम सिंहासन चौहान, रमेश कुमार सिंह, शांतनु सिंह समेत अन्य का कहना है कि शहर के पानी में काफी आयरन है. इससे कई तरह के जानलेवा बीमारियां होने की प्रबल संभावना बनी रहती है. 2018-19 की नल जल योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार की ओर से करोड़ों रूपये राशि की खर्च की गयी. लेकिन इस योजना स्थिति इस कदर है कि जहां नल है. वहां जल नहीं जहां जल है वहां से नल गायब है. यही वजह है कि कहीं सड़कों पर जल के रूप में सरकारी योजनाओं के तहत राशि पानी के रूप में बहाया गया. ऐसा कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी. वे खुद से शुद्ध जल पीने के लिए कई तरह के जतन करते हैं. आरओ, सेडिमेंट फिल्टर, कैंट, कार्बन फिल्टर का उपयोग करते हैं. जिसमें अत्यधिक अतिरिक्त खर्च हो जाता है. साल भर में आठ से दस हजार रूपये खर्च करना पड़ता है. तब जागर शुद्ध पेयजल नसीब हो पाता है. नल जल योजना के तहत उपलब्ध पानी काफी गंदा व बिना समय का ही उपलब्ध हो पाता है. जिससे उनलोगों को इसका कोई विशेष लाभ नहीं मिल पा रहा है. बुडको के पदाधिकारियों का दावा है कि करीब करीब घराें को शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है. 35333 करीब घरों को नल जल योजना के तहत पानी पहुंचाने का कार्य पिछले पांच वर्ष पूर्व शुरू किया गया था. प्रथम फेज के तहत 150 करोड़ की राशि से विभिन्न वार्ड के घरों में नल जल योजना के तहत पानी पहुंचाना था. इसके लिए कई पानी टंकी का निर्माण किया गया. सड़क खोदकर पाइप लाइन बिछायी गयी पर सब कुछ व्यर्थ साबित हो रहा है. शहर के प्रबुद्धजनों की माने तो दूसरे फेज के तहत 45 करोड़ की राशि से पानी पहुंचाने का कार्य किया जाना था. अब विभाग की ओर से शेष रह गये घरों में पहुंचाने के लिए राशि वृद्धि कर विभाग को तीसरे फेज के लिए भेजी गयी. प्रथम फेज के तहत नल जल योजना के तहत घरों तक पहुंचायी गयी पाइप लाइन की हालत भी धीरे धीरे खराब हो रही है. डब्बाबंद पानी का प्रमाणिक है या नहीं देखने वाला कोई नहीं शहर में इन दिनों कुकुरमुत्ते की तरह डब्बाबंद पानी बेचने का कार्य किया जा रहा है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. पीएचडी से कितने डब्बाबंद पानी सप्लाई कर रहे हैं. इसकी प्रमाणिक जांचने वाला नहीं है. जबकि शुद्धता जांच करा कर ही बेचने का प्रावधान है. हर मोहल्ले व गली गली में इन दिनों डब्बा बंद पानी प्लांट स्थापित कर बेचने का कार्य किया जा रहा है. लोगों की माने तो आवश्यकता है इसकी प्रमाणिकता जांच के बाद ही पानी उपयोग में लाया जाये.

विज्ञापन
RAJKISHOR K

लेखक के बारे में

By RAJKISHOR K

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन