महानंदा कटाव के विस्थापितों को बसाने की नहीं हुई ठोस पहल

Published by :RAJKISHOR K
Published at :19 Apr 2025 7:08 PM (IST)
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महानंदा कटाव के विस्थापितों को बसाने की नहीं हुई ठोस पहल

महानंदा कटाव के विस्थापितों को बसाने की नहीं हुई ठोस पहल

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बलिया बेलौन प्रत्येक वर्ष महानंदा नदी इस क्षेत्र के लिए काल बन कर आता है. जुलाई, अगस्त में बाढ़ आने की संभावना को देखते हुए ग्रामीण अभी से सहमे हुए हैं. क्षेत्र में महानंदा का जल स्तर बढ़ने से क्षेत्र में भीषण नदी कटाव होता है. अधिक जल स्तर बढ़ने से बाढ़ आने पर सब कुछ बहाकर ले जाता है. महानंदा नदी कटाव से शिकारपुर पंचायत का माहीनगर, नाजीरपुर, तैयबपुर पंचायत का रैयांपुर, बेनीबाडी, खाडीटोला, रिजवानपुर पंचायत का रतनपुर, भौनगर पंचायत का मंझोक, धपरसीया पंचायत का मोहना, बलीहारपुर, मुकुरिया आदि गांव का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया है. उक्त गांव के अधिकांश परिवार तटबंध पर झोपड़ी बनाकर कर कई दशक से विस्थापित का जीवन जी रहे है. भूमिहीन परिवारों को नहीं बसाया गया महानंदा पूर्वी तटबंध में मीनापुर से शेखपुरा, तैयबपुर, कुरूम होते हुए कस्बा टोली तक हजारों विस्थापित परिवार रह रहे है. यह सभी भूमिहिन परिवार है. सरकार ऐसे परिवारों को तीन डिसमिल जमीन उपलब्ध कराकर बसाने का घोषणा छलावा साबित हो रहा है. उक्त गांव का आज नाम लेने वाला तक नहीं है. नदी कटाव से विस्थापित हुए सुखी सम्पन्न लोग दूसरे पंचायतों में जा बसे है. कई गावों का अस्तित्व हो गया समाप्त क्षेत्र संख्या 18 के जिला परिषद प्रतिनिधि मुनतसीर अहमद कहते हैं कि 80 के दशक में बेनीबाडी एक आदर्श गांव था. उस समय यहां साक्षरता दर ग्रामीण क्षेत्र में सब से अधिक था. प्राय सभी परिवार से कोई ना कोई सरकारी सेवा में कार्यरत था. लेकिन आज इस गांव का नाम लेने वाला तक नहीं है. स्थानीय मुखिया मारूफ अहसन ने बताया की यहां सभी जात धर्म के लोग आपसी भाईचारा के तहत रहते थे. लेकिन नदी कटाव के कारण सभी लोग बिखर गये है. यहां मध्य विद्यालय, उच्च विद्यालय, पंचायत भवन, स्वास्थ्य केंद्र एक ही जगह स्थित थी. यह सभी नदी के काल में जा मिला है. मुखिया संघ अध्यक्ष मेराज आलम ने कहा की सरकार के द्वारा कटाव रोधक कार्य में लापरवाही बरतने के कारण नदी कटाव से दर्जनों गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया है. यही हाल माहीनगर, मंझोक, जीतवारपुर, मुकुरिया, मोहना, बलीहारपुर आदि गांव की है. एकबाल हुसैन, इनायत राही, अफरोज आलम, हसनैन रेजा, रागिब शजर, असरार अहमद आदि ने बताया की विस्थापित सभी सुखी सम्पन्न गांव था. नदी कटाव के कारण गांव अस्तित्व समाप्त हो गया है.

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