गंदगी से भर गया तालाब, शहर की प्रमुख सड़कों पर कचरे का अंबार

गंदगी से भर गया तालाब, शहर की प्रमुख सड़कों पर कचरे का अंबार
प्रभात पड़ताल: कटिहार दीपावली व लोक आस्था का महापर्व छठ को स्वच्छता के नजरिये से भी देखा जाता है. दोनों पर्व में साफ-सफाई व स्वच्छता के लिए लोग क्या क्या नहीं करते है. लेकिन त्योहार समाप्त होते ही हर तरफ गंदगी व कचड़ा पसरा रहता है. मंगलवार को छठ महापर्व सम्पन्न हुआ है. यानी छठ सम्पन्न होने के करीब 48 घंटे बीत चुके है. लेकिन शहर के न्यू मार्केट रोड पर फैले गंदगी व कचरा की सफाई अबतक नहीं हुई. इस रोड पर कचरा व गंदगी की स्थिति ऐसी है कि आमलोगों के आना जाना मुश्किल है. अत्यधिक जरूरी पड़ने पर लोग नाक ढककर ही इस रोड से गुजरते है. कमोवेश यही स्थिति बड़ा बाजार व अन्य बाजार-प्रमुख पथों की है. दूसरी तरफ छठ के बाद नदीं, तालाब व पोखर की स्थिति में देखने लायक है. दरअसल छठ पर्व संपन्न होने के बाद सभी प्रमुख छठ घाटों की स्थिति देखते ही बनता है. छोटे बड़े सभी छठ घाट गंदगी से भरा पड़ा हुआ है. जिस तरह छठ पर्व को लेकर एक पखवारे से लोग छठ घाट व नदी, तालाब की साफ-सफाई करने में जुटे थे. छठ पर्व समाप्त होते ही उसकी विपरीत स्थिति देखने को मिल रहा है. केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चलाये जा रहे स्वच्छता अभियान के बावजूद छठ घाट नदी, तालाब एवं पोखर को साफ-सुथरा नहीं रखा गया. यह अच्छा मौका था कि छठ पर्व के बहाने जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के नदी, तालाब, पोखर आदि की साफ सफाई हो गयी. लेकिन इसे बरकरार नहीं रखा जा सका. इसके लिए जितना दोषी प्रशासन है. उतना दोषी समाज के लोग भी है. छठ पर्व सम्पन्न होने के बाद शहर के कई घाटों का जायजा लेने पर यही पाया कि अधिकांश घाट व पोखर, नदी, तालाब की स्थिति खराब थी. छठ पर्व में घाट में लगाये गये केला के थम्ब को उसी नदी, तालाब में बहा दिया गया. साथ ही घाट पर पड़े हुए अन्य अपशिष्ट पदार्थों को भी नदी, तालाब, पोखर के हवाले कर दिया गया. इससे गंदगी चारों ओर फैल गयी. जल पूरा प्रदूषित की तरह दिखने लगा है. कमोवेश ऐसी स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के घाटों की भी है. समाज में इस बात की भी बहस होनी चाहिए कि जलस्रोतों वाले जगह यानी नदी, तालाब, पोखर आदि को स्वच्छ क्यों नहीं रखा जा सकता है. शासन प्रशासन के साथ साथ समाज को भी इस बारे में सोचना सोचना चाहिए. लेकिन छठ पर्व के बाद जो स्थिति बनी है. वह निश्चित रुप से जागरुक समाज के लिए कई सवाल पैदा करती है. स्वच्छता की खुली पोल स्वच्छ भारत मिशन को लेकर बड़े-बड़े दावे किये जाते है. भारत को स्वच्छ बनाने को लेकर कई तरह की मुहिम चल रही है. राजनीतिक दल से जुड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं के साथ साथ शासन-प्रशासन से जुड़े अधिकारी कर्मचारी ने भी साफ सफाई अभियान को अमलीजामा पहनाने में जुटे दिखते है. जबकि ग्राउंड रियलिटी इसके विपरीत है. छठ पर्व के मौके पर लोक आस्था के महापर्व छठ को स्वच्छता के नजरिये से भी देखा जाता है. हालांकि छठ पर्व कई तरह का संदेश भी देती है. उसी में स्वच्छता का संदेश भी छुपा हुआ है. पर छठ पर समाप्त होते ही स्वच्छता अभियान की भी हवा निकल जाती है. इस बार भी ऐसा ही हुआ है. छठ पर्व समाप्त होते ही घाट पर मौजूद सभी तरह के अपशिष्ट पदार्थ एवं केला के थम्ब आदि को नदी, तालाब, पोखर में फेंक दिया गया. जिससे पानी दूषित होने लगी है. सड़कों पर पसरा है गंदगी छठ महापर्व के बीतने के 48 घंटे हो चुके है. लेकिन अभी भी शहर के प्रमुख सड़कों पर गंदगी पसरा हुआ है. आने जाने वाले लोगों को इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. न तो सड़क पर दुकान लगाने वाले को इसकी चिंता है और न ही नगर निगम प्रशासन को इस मामले में किसी तरह की दिलचस्पी दिख रही है. छठ पर्व पर न्यू मार्केट रोड में बाजार लगता है. छठ पूजन सामग्री को लेकर बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते है. इसकी वजह से कई तरह के गंदगी फैल जाती है. छठ पर के तुरंत बाद इसे साफ किया जाना चाहिए. पर अब तक उसे साफ नहीं किया गया है. न्यू मार्केट रोड के अलावा बड़ा बाजार, फल पट्टी, मंगल बाजार, शिव मंदिर चौक, मिरचाईबाड़ी आदि प्रमुख बाजार व सड़कों पर अभी भी गंदगी पसरा हुआ है.
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