मौजूदा दौर में जीवंत व कालजयी है फणीश्वरनाथ रेणु की कृतियां

मौजूदा दौर में जीवंत व कालजयी है फणीश्वरनाथ रेणु की कृतियां
– जयंती पर याद किये गए अमर कथाशिल्पी कटिहार अखिल भारतीय कूर्मी क्षत्रिय महासभा बिहार राज्य जिला शाखा कटिहार की ओर से कार्यालय में बुधवार को कथाशिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की जयंती मनायी गयी. सर्व प्रथम रेणु के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी. संगठन के जिला शाखा अध्यक्ष अरबिंद पटेल की अध्यक्षता में आयोजित जयंती कार्यक्रम में वक्ताओं ने रेणु के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. अपर लोक अभियोजक विनोद कुमार ने कहा कि रेणु जीवन व कृति सामाजिक यर्थाथ का दर्पण है. रेणु के उपन्यास में लोक संस्कृति और आंचलिक संस्कार का समावेश है.आंचलिक संस्कार का शिल्पकार सभी कृति के पात्र व परिवेश आज भी जीवंत एवं कालजयी है. उन्होंने कहा कि रेणु ने आचलिक उपन्यासकार के रूप में पूर्णिया प्रमंडल का नाम विश्व भर में रौशन किया. हिन्दी साहित्य की किसी कृति को नोबेल पुरस्कार मिल सकता है तो उसमें रेणु का मैला आंचल है. वर्ष 1974 में संपूर्ण क्रांति के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ उनकी भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता है. वरीय अधिवका राजेन्द्र मिश्र, रामविलास पासवान, श्यामदेव राय, शिवनारायण सिंह तथा जदयू नेता रमाकान्त राय, दिलीप कुमार राय आदि ने भी रेणु व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला.
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