कटिहार में महानंदा तटबंध की 400 मीटर सड़क बनी ‘आफत’: मुआवजे के पेंच में अटका निर्माण, बंगाल को जोड़ने वाली लाइफलाइन जर्जर

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कटिहार में महानंदा तटबंध की 400 मीटर सड़क बनी ‘आफत’: मुआवजे के पेंच में अटका निर्माण, बंगाल को जोड़ने वाली लाइफलाइन जर्जर

जर्जर महानंदा तटबंध

कटिहार जिले के अमदाबाद प्रखंड अंतर्गत दुर्गापुर पंचायत के भोलामारी गांव के समीप महानंदा तटबंध (बांध) पर करीब 400 मीटर सड़क पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में है. बिहार और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ने वाली इस बेहद महत्वपूर्ण सड़क की बदहाली के कारण आए दिन यहाँ सड़क हादसे हो रहे हैं, जिससे एक बड़ी आबादी का आवागमन प्रभावित हो रहा है.

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वर्ष 2008 की बाढ़ के बाद से अधर में है विकास, मुआवजे के पेंच में अटका काम

इस सड़क की बदहाली का इतिहास करीब दो दशक पुराना है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2008 में महानंदा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ और भीषण कटाव के कारण भोलामारी के पास तटबंध पूरी तरह टूट गया था. इसके बाद वर्ष 2010 में जल संसाधन विभाग द्वारा कटे हुए तटबंध को दोनों छोरों से जोड़कर दोबारा तैयार किया गया. इसके बाद वर्ष 2018 में इस महानंदा तटबंध पर सिंघेश्वर चौक से लेकर कमरुद्दीन टोला गांव के बीच तक पूरी सड़क का कालीकरण (पिचिंग) कर इसे पक्का बना दिया गया. लेकिन, भोलामारी गांव के पास करीब 400 मीटर का एक ऐसा हिस्सा है जहाँ रैयतों (जमीन मालिकों) को विभाग की ओर से अब तक जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल सका है. मुआवजे के इसी पेंच और विवाद के कारण ग्रामीणों ने इस 400 मीटर के टुकड़े पर सड़क निर्माण कार्य को रोक दिया था, जो आज तक अधूरा है.

पश्चिम बंगाल के मालदा को जोड़ती है सड़क, बरसात में बनती है ‘लाइफलाइन’

जर्जर होने के बावजूद यह मार्ग सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद उपयोगी है:

  • अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी: यह सड़क अमदाबाद प्रखंड मुख्यालय से निकलकर सीधे पश्चिम बंगाल के नकट्टी ब्रिज तक जाती है. इस ब्रिज को पार कर प्रतिदिन हजारों लोग पश्चिम बंगाल के मालदा जिला सहित अन्य प्रमुख शहरों तक व्यापार और रोजगार के लिए आना-जाना करते हैं.
  • बाढ़ के दिनों में सहारा: स्थानीय राहगीरों अनिल, बिजेंद्र और खेसारी मंडल ने बताया कि बाढ़ और बरसात के वीभत्स दिनों में जब निचले इलाके डूब जाते हैं, तब यही ऊंचा तटबंध पूरे क्षेत्र के लिए ‘लाइफलाइन’ (जीवन रेखा) साबित होता है.

वर्तमान में इस 400 मीटर के दायरे में कंक्रीट उखड़ चुके हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं. इस रास्ते से गुजरने वाले दोपहिया और चार पहिया वाहन अक्सर असंतुलित होकर पलट जाते हैं, जिससे राहगीर चोटिल हो रहे हैं.

महानंदा विभाग ने शुरू की जमीन की पैमाइश, 6 सदस्यीय कमेटी करेगी समाधान: मुखिया

लगातार हो रही दुर्घटनाओं और जन आक्रोश को देखते हुए हाल के दिनों में महानंदा विभाग के तकनीकी अधिकारियों द्वारा उक्त विवादित सड़क की जमीन की प्रशासनिक पैमाइश (नापी) कराई गई है, जिससे ग्रामीणों में सड़क बनने की उम्मीद जगी है. इस संदर्भ में सकारात्मक जानकारी देते हुए दुर्गापुर पंचायत के मुखिया गोपाल प्रसाद सिंह ने बताया कि महानंदा तटबंध के इस ‘कट एंड पॉइंट’ में पक्कीकरण सड़क के निर्माण और रैयतों के फंसे हुए मुआवजे के भुगतान को लेकर प्रशासन द्वारा छह सदस्यीय उच्चाधिकारियों की एक विशेष कमेटी गठित की गई है. यह कमेटी जमीन मालिकों से वार्ता कर मुआवजे की विसंगतियों को दूर करेगी, जिसके बाद जल्द ही इस जर्जर पैच पर निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू करा दिया जाएगा.

अमदाबाद (कटिहार) से मनोज कुमार की रिपोर्ट:

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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