जिला स्थापना के 52 वीं सालगिरह पर सुना-सुना रह गया कटिहार

जिला स्थापना के 52 वीं सालगिरह पर सुना-सुना रह गया कटिहार
कटिहार जिला स्थापना दिवस इस बार फीका फीका ही रह गया. हर साल जिला प्रशासन की ओर से जिला स्थापना दिवस के अवसर पर कई तरह की गतिविधियां आयोजित होती रही है. पर जिला स्थापना के 52 वीं सालगिरह पर जिला प्रशासन की ओर से कोई गतिविधि आयोजित किए जाने की सूचना प्राप्त नहीं हुई है. सोशल मीडिया के जरिये जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों ने कटिहार जिला स्थापना दिवस के मौके पर एक दूसरे को बधाई देते हुए दिखे हालांकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ प्रमुख चौक चौराहा पर महापुरुषों के प्रतिमा के समक्ष गुरुवार की शाम को अधिकारियों की ओर से दीप प्रज्वलित कर जिला स्थापना दिवस मनाया गया है. यद्यपि आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं किया गया है. उल्लेखनीय है कि गंगा, कोसी, महानंदा व कई सहायक नदियां के मुहाने पर बसा कटिहार जिला अब 52 वर्ष का हो गया है. वर्ष 1973 में दो अक्टूबर को पूर्णिया से अलग होकर कटिहार स्वतंत्र जिला के रूप में अस्तित्व में आया. यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. तब राज्य सरकार ने दिशा निर्देश जारी किया कि हर जिला अपना अपना स्थापना दिवस समारोह आयोजित करेगी इसी कड़ी में वर्ष 2007 से कटिहार जिला स्थापना दिवस समारोह मनाया जाने की प्रक्रिया शुरू हुई. जिला स्थापना दिवस मनाये जाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से राशि भी उपलब्ध करायी जाती है. दरअसल कटिहार जिला जंग-ए-आजादी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. आजादी के बाद से कटिहार स्वतंत्र जिला के रूप में आने के लिए बेताब थी. पूर्णिया के साथ रहने की वजह से इसका चतुर्दिक विकास नहीं हो पा रहा था. ऐसे में यहां के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं व विभिन्न संगठनों के लोगों ने मिलकर कटिहार जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन किया. विभिन्न तरह के आंदोलन व संघर्ष के बाद कटिहार जिला अस्तित्व में आया. इस बीच कटिहार जिला ने उत्तरोत्तर विकास किया है. सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक रूप से कटिहार जिला प्रगति की ओर अग्रसर है हालांकि इन 52 वर्षों में जितना विकास कटिहार जिला का होना चाहिए था. वैसा हुआ नहीं. बावजूद इसके अन्य जिलों की तुलना में कटिहार सांप्रदायिक सौहार्द एवं आपसी भाईचारे के मूल्यों को कायम रखते हुए विकास के पथ पर बढ़ने को आतुर है. विकास के पथ पर आगे बढ़ने के साथ-साथ कटिहार जिला को कई तरह की त्रासदी की झेलनी पड़ती है. हर वर्ष यह जिला बाढ़ एवं कटाव का दंश झेलता है. कमोवेश हर साल बाढ़ व कटाव से लाखों की आबादी प्रभावित होती रही है. इस साल औसत से कम बारिश होने की वजह किसानों को अत्यधिक परेशानी झेलनी पड़ी है. दूसरी तरफ बाढ़ व कटाव से लाखों से अधिक की आबादी प्रभावित हुई है.
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