संतान की लंबी आयु के लिए नहाय खाय के साथ जिउतिया पर्व का हुआ शुभारंभ

Updated at : 13 Sep 2025 7:35 PM (IST)
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संतान की लंबी आयु के लिए नहाय खाय के साथ जिउतिया पर्व का हुआ शुभारंभ

संतान की लंबी आयु के लिए नहाय खाय के साथ जिउतिया पर्व का हुआ शुभारंभ

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कटिहार संतान की लंबी आयु को लेकर शनिवार को नहाय खाय के साथ जीवित्पुत्रिका अर्थात जिउतिया पर्व की शुरुआत हुई. रविवार को सूर्योदय से पहले ओठगन तथा पूरे दिन निर्जल उपवास करेंगे, और सोमवार की सुबह 6:35 मिनट के बाद पारण करेंगे. इस वर्ष सभी पंचांग एकमत है जिस कारण से इस वर्ष पर्व को लेकर कोई भी संशय नहीं बना हुआ है. पर्व को लेकर शनिवार की देर शाम तक बाजार में पूजा सामग्रियों की खरीदारी करने के लिए परवर्ती की भारी भीड़ रही. हर पूजा दुकान, फल दुकान, एवं मिठाई दुकान पर पर्वतियो की भीड़ लगी रही. जिउतिया पर्व हिंदू धर्म में बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाए जाने वाला पर्व है. इस पर्व को लेकर हर मां उत्साहित रहती है. संतान की लंबी आयु को लेकर यह पर्व मनाया जाता है. इस पर्व का खास महत्व है, अपने संतान की लंबी आयु सुख समृद्धि के लिए हर मा यह पर्व करती है. हिंदू पंचांग के अनुसार जिउतिया व्रत आसींद माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तिथि तक मनाया जाता है. पुराणों के अनुसार आसींद माह की कृष्ण अष्टमी को प्रदोष काल में महिलाएं जीमूत वाहन की पूजा करती है. माना जाता है कि जो महिलाएं जीमूत वाहन की पूरी श्रद्धा विश्वास के साथ पूजा करती है उनके पुत्र की लंबी आयु और जीवन सुख समृद्धि से भरा रहता है. शनिवार को नहाए खाए के साथ तीन दिवस पर्व की शुरुआत हो गई, इस वर्ष परवर्ती 24 घंटे तक निर्जला उपवास रहेगी. निर्जला उपवास कर की जाती है पूजा अर्चना, हिंदू धर्म में कई ऐसे पर्व है जो कठिन है. जिउतिया पर्व सबसे कठिन पर्व में एक माना जाता है, क्योंकि इस पर्व को करने में निर्जला उपवास रहना पड़ता है. तीन दिवसीय इस पर्व में प्रथम दिन नहाए खाए से शुरू होती है, जिसमें महिला श्रद्धालु नहाने के बाद पूजा कर भोजन करती है. दूसरे दिन व्रत जितिया कहा जाता है, यह व्रत का विशेष व मुख्य दिन होता है , जो की अष्टमी को पड़ता है. इस दिन महिलाएं निर्जला रहती है, यहां तक की रात को भी एक बूंद का पानी नहीं पिया जाता है. तीसरा दिन पारणा किया जाता है, सभी पूजा करने वाली महिलायें पारणा करने के बाद ही जल व भोजन ग्रहण करती है, पर्व को लेकर बाजार में फलों एवं मिठाइयों की कीमतों में रही तेजी, जिउतिया पर्व को लेकर खाजा का एक अलग ही महत्व है. इस पर्व में डलिया सजाने का महत्व है. जिसमें फलों के साथ खाजा डलिया में भरे जाते हैं. ऐसे तो बाजार में अन्य मिठाइयां सब दिन आसानी से मिल जाते हैं. लेकिन खाजा ही है जो खास तौर पर जिउतिया पर्व के अवसर पर ही बाजार में दिखाई पड़ते हैं, और बिकते है. पूजा को लेकर बाजार में अन्य दिनों की भांति फलों के कीमतों में भी उछाल देखने मिला. डलिया 50 से 100 रु सेब 100 रुपए किलो, संतरा 120 रुपए किलो, अमरूद 100 रु किलो, नारियल 60 रु जोड़ा, ताभा नींबू 50 रू जोड़ा, नाशपाती 150 रु किलो, तथा रिफाइन में बने खाजा व बलशाही 200 रु से लेकर 220 रु किलो तक बाजार में बिके.

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