100 साल पुराने पेड़ के गिरने से उजड़ गए कई आशियाने: बारसोई में आंधी-बारिश का कहर

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100 साल पुराना पीपल का पेड़

100 साल पुराना पीपल का पेड़

Hundred Year Old Tree Fall: कटिहार के बारसोई प्रखंड में प्रकृति का भीषण रूप देखने को मिला है. लहगरिया पंचायत में मंगलवार की रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के कारण एक सदी पुराना विशाल पीपल का पेड़ कई घरों पर आ गिरा, जिससे कई गरीब परिवार बेघर हो गए हैं.

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बारसोई (कटिहार) से अरविन्द गुप्ता की रिपोर्ट

Hundred Year Old Tree Fall: कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड अंतर्गत लहगरिया पंचायत में मंगलवार की रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है. पंचायत भवन के समीप स्थित एक सौ वर्ष से भी अधिक पुराना विशालकाय पीपल का वृक्ष अचानक जड़ से उखड़कर आस-पास के रिहायशी झोपड़ीनुमा और कच्चे मकानों पर जा गिरा. इस भीषण हादसे में कई घर पूरी तरह से जमींदोज हो गए हैं, जिससे लाखों रुपये की संपत्ति मलबे में तब्दील हो गई है. हादसे के वक्त घरों में सो रहे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

मलबे में दबा गृहस्थी का सामान; आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल

  • प्रभावित परिवार: स्थानीय पंचायत समिति सदस्य सुरेश रविदास ने बताया कि इस अप्रत्याशित हादसे में ग्रामीण मुस्ताक, मुजाहिद, जशिर आलम और बहारुद्दीन सहित कई अन्य परिवारों के आशियाने पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं. घरों के ध्वस्त होने से उनमें रखा अनाज, कपड़े, बर्तन और दैनिक उपयोग की सभी सामग्रियां मलबे में दबकर पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं.
  • घायलों की सूची: पेड़ गिरने से मलबे की चपेट में आने के कारण राशिद की पुत्री मुस्कान गंभीर रूप से जख्मी हो गई है, जिसके शरीर पर कई गहरे जख्म आए हैं. वहीं, रूबी खातून की कमर में गंभीर चोट लगी है. इनके अलावा नूर फातमा खातून, मुस्ताक आलम और मनतसर खातून भी इस हादसे में घायल हुए हैं.
  • राहत कार्य: घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे को हटाया और सभी घायलों को बाहर निकालकर इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार जारी है.

जनप्रतिनिधियों ने की मुआवजे की मांग; खुले आसमान के नीचे रहने की विवशता

पंचायत समिति सदस्य सुरेश रविदास सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अनुमंडल प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार अत्यंत गरीब हैं और इस मूसलाधार बारिश के बीच उनके पास सिर छुपाने की भी जगह नहीं बची है. प्रशासन को अविलंब मौके पर पहुंचकर तिरपाल, सूखा राशन और प्लास्टिक शीट उपलब्ध करानी चाहिए. साथ ही, आपदा राहत कोष से सभी प्रभावितों को गृह क्षति मुआवजा और घायलों को मुफ्त चिकित्सा सहायता राशि प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे अपने जीवन को दोबारा पटरी पर ला सकें.

Hundred Year Old Tree Fall: विशेष सतर्कता परामर्श: पुराने और विशाल वृक्षों के नीचे न बनाएं आवास

  • जोखिमभरा निवास: पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सौ वर्ष या उससे अधिक पुराने विशालकाय वृक्षों की जड़ें समय के साथ कमजोर हो जाती हैं. ऐसे में उनके ठीक नीचे झोपड़ीनुमा या कच्चे मकान बनाकर रहना हमेशा जानलेवा साबित हो सकता है.
  • नियमित सर्वेक्षण की मांग: ग्रामीणों ने स्थानीय निकायों (ग्राम पंचायतों) से मांग की है कि सार्वजनिक स्थानों और आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित बेहद जर्जर व सूखे पड़े पुराने पेड़ों का सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि मानसून और आंधी के इस दौर में किसी अन्य बड़ी जनहानि या हादसे को समय रहते रोका जा सके. नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे मौसम खराब होने पर सुरक्षित पक्के मकानों में शरण लें.

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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