एक साल में बदली KB झा कॉलेज की तस्वीर, प्राचार्य डॉ. संजय कुमार सिंह के कठोर निर्णयों से हुआ कायाकल्प

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फोटो कैप्शन, कटिहार, केबी झा कॉलेज परिसर में छात्र छात्राएं व उनके अभिभावकों के बैठने के लिए बनाये जा रहे चबूतर | Prabhat Khabar Network

केबी झा कॉलेज परिसर में छात्र छात्राएं व उनके अभिभावकों के बैठने के लिए बनाये जा रहे चबूतर | Prabhat Khabar Network

कटिहार के KB झा कॉलेज ने महज एक साल में कायापलट देखा है. नए प्राचार्य डॉ. संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में जर्जर भवनों की मरम्मत, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और कर्मचारियों के लंबित भुगतानों का 99% समाधान किया गया है. यह परिवर्तन कॉलेज को जिले का मॉडल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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कटिहार जिले का प्रसिद्ध केबी झा कॉलेज कभी जर्जर भवनों, अव्यवस्थाओं और शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों के बकाए भुगतान की समस्याओं के लिए जाना जाता था. लेकिन 18 जुलाई 2025 को नए प्राचार्य डॉ. संजय कुमार सिंह के योगदान देने के बाद, उनकी दूरदर्शी सोच और कड़े फैसलों से महज एक वर्ष के भीतर कॉलेज की पूरी तस्वीर बदल गई है.

जर्जर भवनों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

प्राचार्य डॉ. संजय कुमार सिंह और कार्यरत शिक्षकों के अनुसार, बीते एक वर्ष में कॉलेज परिसर में 14 से अधिक प्रमुख विकास कार्य कराए गए हैं, जो छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं:

  • वर्गकक्षों व वाशरूम का जीर्णोद्धार: कॉलेज के पूर्वी हिस्से में लंबे समय से जर्जर पड़े क्लासरूम्स की मरम्मत कराकर पढ़ाई शुरू कराई गई. साथ ही अगले हिस्से के जर्जर यूरिनल व वाशरूम को रिपेयर कराया गया.
  • जनरेटर और पेयजल व्यवस्था: वर्षों से धूल फांक रहे दो बड़े जनरेटर सेट को चालू कराकर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई. छात्रों के लिए शुद्ध पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था की गई और डेस्क-बेंच की कमी को दूर किया गया.
  • मानस भवन का कायाकल्प: सालों से बंद पड़े मानस भवन की मरम्मत कराकर उसे दोबारा उपयोग में लाया गया.
  • 15 से अधिक चबूतरे बने: पहले विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने या बैठने के लिए बरामदों पर निर्भर रहना पड़ता था. अब परिसर में 15 से अधिक पक्के चबूतरे बनाए गए हैं, जहां छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक आराम से बैठ सकते हैं.

कर्मचारियों के सेवांत लाभ व पेंशन की 99% समस्याओं का समाधान

सेवानिवृत्त और कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों की सबसे बड़ी पीड़ा उनका बकाया एरियर, सेवांत लाभ और लंबित पेंशन भुगतान था. नए प्राचार्य की पहल पर इन प्रशासनिक फाइलों को निपटाकर 99 प्रतिशत समस्याओं का समाधान कर दिया गया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है.

भावी योजनाएं: खेल मैदान, ऑडिटोरियम और तालाब का सौंदर्यीकरण

कॉलेज के भावी विकास को लेकर भी खाका तैयार कर लिया गया है. जनप्रतिनिधियों से मिलकर कई प्रस्ताव भेजे गए हैं:

  1. मुख्य द्वार व ऑडिटोरियम: कॉलेज के मुख्य गेट और ऑडिटोरियम के जीर्णोद्धार के लिए जनप्रतिनिधियों से सहयोग मांगा गया है.
  2. पेवर ब्लॉक व खेल मैदान: परिसर के मध्य भाग में पेवर ब्लॉक लगाने और जलजमाव वाली 3 एकड़ जमीन में मिट्टी भरकर आधुनिक खेल मैदान बनाने का प्रस्ताव तैयार है.
  3. तालाब का सौंदर्यीकरण: प्राचार्य कक्ष के ठीक पीछे स्थित तालाब को सुंदर और आकर्षक बनाने की कार्ययोजना प्रस्तावित है.
"विगत एक वर्ष में कॉलेज को प्रशासनिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम किया गया है. आने वाले समय में केबी झा कॉलेज को जिले का मॉडल कॉलेज बनाना ही मुख्य लक्ष्य है." — डॉ. संजय कुमार सिंह, प्राचार्य, केबी झा कॉलेज, कटिहार


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