उद्घाटन के बाद से है बंद हैचरी, नहीं मिल रहा किसानों को लाभ

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उद्घाटन के बाद से है बंद हैचरी, नहीं मिल रहा किसानों को लाभ

उद्घाटन के बाद से है बंद हैचरी, नहीं मिल रहा किसानों को लाभ

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कटिहार. मत्स्य पालन को लेकर जिले के मछली किसानों के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलायी जा रही है. विभाग द्वारा जिले के मत्स्य पालकों के लिए कई योजनाओं के तहत लाभ दिलाकर इस क्षेत्र में समृद्ध बनाया जा रहा है. प्रतिवर्ष करीब पांच करोड़ से अधिक योजना के तहत राशि मंगाकर मत्स्यपालन के क्षेत्र में भले ही किसानों को समृद्ध बनाने का दावा किया जा रहा है. लेकिन मछली का बीज तैयार करने वाला जिले के डंडखोरा प्रखंड के सौरिया में 42 लाख से बनाया गया 12 एकड़ में हैचरी विभागीय लापरवाही और देखरेख के अभाव में आज तक बंद पड़ा है. उद्घाटन के बाद से लेकर आज तक एक भी मछली का जीरे का उत्पादन उक्त हैचरी से नहीं किया गया. जिसका नतीजा है कि जिले के मत्स्य पालकों को दूसरे राज्यों से मछली के बीज महंगे दामों में लाकर मछली पालन करने की मजबूरी बनी हुई है. जबकि विभाग उक्त हैचरी के लिए निकलने वाले पानी में अधिक आयरन की बात कहकर पाला झाड़ रहा है. हैचरी की देखरेख करने वाले चंदन प्रसाद मंडल का कहना है कि जबसे हैचरी का उद्घाटन किया गया. तब से आज तक एक भी मछली का बीज तैयार नहीं हो पाया है. हालांकि इसके लिए विभाग की ओर से चार हैंचिंग टेंक व एक ब्रीडिंग टेंक का निमाण कराया गया. एक सौ फीट बोरिंग भी कराया गया. लेकिन यहां से एक भी किसानों को एक भी मछली का बीज उपलब्ध नहीं हो पाया. ऐसा इसलिए कि जब से उद्घाटन किया गया. तब से यह बंद ही है.

दूसरे राज्यों से किसान लाते हैं मछली का जीरा

आसपास के लोगों की मानें तो जिस उदेश्य से विभाग द्वारा सौरिया में हैचरी बनाया गया. उसका लाभ नहीं मिलने के कारण मछली पालकों को परेशान होना पड़ रहा है. विभाग द्वारा अनुदानित दर पर मछली का बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. दूसरे राज्यों में बंगाल, झारखंड समेत अन्य जगहों से किसान मछली के जीरा लाकर फसल करने को विवश हैं. दूसरी ओर विभाग को उक्त हैचरी से लाभ के बजाये हानि ही हो रहा है. विभाग द्वारा प्रत्यक्षण करने की नौबत पर दूसरे राज्यों से मछली के जीरा को मंगाये जाने की मजबूरी बन जाती है. बनाये गये हैचरी के आसपास रहने वालों लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा पीपीडी मोड में हैचरी का लीज किया गया. संसाधनों व देखरेख के अभाव में लीज का राशि तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. इससे विभाग को घाटा लग रहा होगा. इससे नकारा नहीं जा सकता है.

कहते हैं मत्स्य पदाधिकारी

पानी में अधिक आयरन होने के कारण उत्पाद किये गये मछली के बीज खराब हो जाते है. लीज पर दिये गये व्यक्ति द्वारा चलाया नहीं जा सका. योजना के तहत दस साल के लिए पीपीडी के तहत लीज दिया गया था. एक साल चलाया अंडा नहीं फूटने के कारण सरेंडर कर दिया गया. विभाग द्वारा इस पर केस कर दिया गया. दस साल का कार्यकाल खत्म हो गया. केस का फैसला अभी तक नहीं आया है. नये सिरे से इसके विकास के लिए इस वर्ष योजना में लिया जा रहा है. फिश फार्म के रूप में धीरे धीरे विकास किया जायेगा. इसको लेकर पूरा प्रोजेक्ट बनाकर पटना को भेजा गया है.

अनिल कुमार, मत्स्य पदाधिकारी, कटिहारB

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