आजादी के 78 साल बाद भी नदी पार कर आवागमन की बनी है मजबूरी

आजादी के 78 साल बाद भी नदी पार कर आवागमन की बनी है मजबूरी
– सिमरिया धार बना ग्रामीणों की सबसे बड़ी चुनौती कोढ़ा प्रखंड के उत्तरी सिमरिया पंचायत के वार्ड संख्या चार स्थित सिमरिया धार पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हो पाने के कारण उस पार बसे करीब 25 से 30 परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आज भी नदी का पानी पार कर पैदल आना-जाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि बाजार जाना हो, दूर दराज जाना हो या फिर खेतों तक पहुंचना. हर काम के लिए या तो कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है या फिर जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. मवेशियों के लिए चारा लाना हो या खेतीबाड़ी का काम, हर स्थिति में नदी ही सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है. लोगों ने कहा, फिलहाल नदी में पानी कम है. किसी तरह आवाजाही हो रही है. बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. इस पार-उस पार आने-जाने का एकमात्र साधन भी पूरी तरह समाप्त हो जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को कई किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है. समय, मेहनत और पैसे तीनों की बर्बादी होती है. ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि देश आजाद हुए दशकों बीत चुके हैं. लेकिन आज भी बुनियादी सुविधा जैसे पुल से वे वंचित हैं. उनका कहना है कि न तो कोई जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने आता है और न ही प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल की गई है. ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सिमरिया धार पर अविलंब पुल निर्माण की मांग की है. ताकि वर्षों से झेल रहे इस संकट से उन्हें निजात मिल सके.
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