डंडखोरा थाना की घटना से पहले भी पुलिस पर लगे हैं कई आरोप – पुलिस पदाधिकारी को जेल तक की खानी पड़ी है हवा, नौकरी से भी हुए थे बर्खास्त कटिहार डंडखोड़ा थाना में स्थानीय ग्रामीण के थाना में हमला कर पुलिस पदाधिकारी को पीट कर घायल करने के मामले में जिला पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है. पूर्णिया प्रक्षेत्र के डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल डंडखोरा थाना पहुंचे तथा मामले की जांच की. जाच में दोषी पाये जाने पर डंडखोरा थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया. घायल पुलिस पदाधिकारी से बात की. इस प्रकरण में स्थानीय लोगों का आरोप है शराब के मामले में पकड़ाये आरोपित को दो दिनों से पुलिस ने अपने कस्टडी में रखा था. इसी बात से आक्रोशित होकर लोगों ने थाने में हमला बोला. जिले में इस प्रकार का आरोप कई बार पुलिस पदाधिकारी पर लगा है. इसके पश्चात लोगों ने थाना में ही पुलिस पदाधिकारी के साथ मारपीट वह थाना को क्षतिग्रस्त किया है. कुछ एक पुलिस पदाधिकारी के कारण पूरा सिस्टम पर पर सवाल निशान खड़े हो जाता है. पुलिस के प्रति घट रहा सम्मान, पनप रहा रोष लॉ एंड आर्डर संघारण में भी पुलिस की भूमिका अहम रहती है. तो फिर लोगों में पुलिस के प्रति सम्मान क्यों घट रहा है. पुलिस महकमे की नाम सुनते ही आम लोगों की राय बदल सी जाती है. आम लोगों से पूछे तो उनके कथनानुसार पुलिस विभाग में वैसे कुछ पुलिस अधिकारी जिनके कारण यह स्थिति बन जाती है. लोगों की माने तो मोबाईल खोने से लेकर अन्य किसी मामले में अगर थाना में केश कराने की बात हो तो बिना सुविधा शुल्क का कार्य नहीं होता है. यहां तक कि कांड में दोषी आरोपित की गिरफ्तारी कराने के लिए भी पुलिस पदाधिकारी को सुविधा शुल्क देना पड़ता है.सबसे बड़ी बात है कि पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस कर्मी अपने वर्दी की आड़ में कुछ ऐसा अनुचित कार्य भी कर देते है जिस कारण पूरे महकमें की छवि धुमिल हो जाती है. वर्दी के रौब में सही को गलत एवं गलत को सही बनाकर लोगों को डरा धमकाकर अनुचित कार्य करवाने जैसे रवैये के कारण लोगों में पुलिस के प्रति सम्मान कम होता जा रहा है. लोगों की माने तो कुछ पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस बल खासकर मध्यमवर्गीय परिवार एवं गरीब लोगों पर अधिक अत्याचार करती है. लोग पुलिस की ओर से किये गये बेहतर कार्य को भूल जाते है. धीरे धीरे लोगों में इनकी निगेटिविटी बनती जाती है. ऐसे में सिस्टम से नाराज लोग सरकारी कार्य में बाधा डालने से परहेज नहीं करते. यहां तक कि पुलिस के साथ मारपीट पर भी उतारू हो जाते है. जिले में घटित कुछ ऐसी घटनाएं है. जिनमें पुलिस टीम पर कई प्रकार के आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने थाना व पुलिस पर हमला किया है. केस स्टडी-1 कचना ओपी में एक शराब तस्कर को गोली मारकर हत्या के मामले में स्थानीय ग्रामीणों व लोगों का आक्रोश फूट गया. जिसके बाद पुलिस व पब्लिक के बीच ठन सी गयी. लोगों ने थाना के पास घंटों आगजनी करते हुए पुलिस प्रशासन के विरूद्ध नारेबाजी की. इस क्रम में पुलिस की ओर से समझाने बुझाने के क्रम में लोगों की पुलिस पदाधिकारी से हाथापायी हो गयी. केस स्टडी -2 सुधानी ओपी में दिये गये आपसी विवाद के मामले में पुलिस की ओर से एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए मामले में एक पक्ष के आरोपित को गिरफ्तार कर थाना लेकर पहुंच गये थे. बस क्या था इस बात की सूचना पर सैकड़ों लोग थाना पहुंच गये. पुलिस पदाधिकारी पर रूपये लेकर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए थाना में जमकर तोड़फोड़ की. जिसकी सूचना पर पुलिस के वरीय पुलिस पदाधिकारी वहां पहुंचकर किसी प्रकार मामले को शांत कराया. हालांकि उसके बाद ओपित प्रभारी को संस्पेंड कर दिया गया. केस स्टडी- 3 आजमनगर थाना में पदस्थापित तत्कालीन थानाध्यक्ष टुनटून पासवान ने भारी मात्रा में शराब बरामदगी कर निर्दोष आरोपितों को गिरफ्तार कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया तथा आरोपित अपराधियों को रूपये लेकर छोड़ दिया. जिस कारण तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन के निर्देश पर तत्कालीन थानाध्यक्ष पर विभागीय कार्रवाई करते हुए जांच के भी निर्देश दिये थे. केस स्टडी- 4 फलका थाना क्षेत्र में प्राथमिकी आरोपित की गिरफ्तारी करने गये थानाध्यक्ष को सैकड़ों स्थानीय लोगों ने बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट किया. थानाध्यक्ष पर शराब के नशे में छेड़खानी का आरोप लगाते हुए उसे बंधक बना लिया. इस बात की जानकारी मिलते ही कटिहार के तत्कालीन एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन पुलिस दल बल के साथ घटना स्थल पर पहुंची तथा लोगों को समझा बुझाकर थानाध्यक्ष को ग्रामीणों के कैद से छुड़ाया. केस स्टडी- 5 मनिहारी थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ दुष्कर्म कर उसके हत्या के मामले में स्थानीय लोगों ने एक आरोपित को पकड़कर पुलिस के सुपूर्द किया. लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्कालीन मनिहारी थानाध्यक्ष पर आरोप लगाते हुए पुलिस टीम व थानाध्यक्ष पर सैकड़ों की संख्या में हमला बोल दिया था. जिसें थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गये थे. केस स्टडी- 6 मुफस्सिल थाना क्षेत्र में उत्पाद सिपाही ने शराब के नशे में झूठा केश बनाने के लिए अपने बाइक में ही शराब लेकर उसके घर पर चला गया. जिसके बाद उत्पाद पुलिस के विरूद्ध लोगों में गुस्सा उबल गया. उसकी पिटायी करते हुए उसे बंधक बना लिया. जिसके बाद मुफस्सिल पुलिस के सहयोग से उक्त सिपाही को छुड़ाकर मुफस्सिल पुलिस ने कस्टडी में लेते हुए उसे जेल भेज दिया था.
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