गोगरी जमालपुर की पुरानी पहचान दिलाने की उठ रही मांग

Published by :RAJKISHORE SINGH
Published at :17 Apr 2026 9:07 PM (IST)
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गोगरी जमालपुर की पुरानी पहचान दिलाने की उठ रही मांग

प्रखंड मुख्यालय स्थित जमालपुर- गोगरी बाजार अपनी प्राचीन पहचान और पुराने व्यापारिक वैभव के लिए जाना जाता रहा है

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गोगरी-जमालपुर बाजार में हर दिन लग रहा जाम, छुटकारा दिलाने का नहीं हो रहा प्रयास गोगरी प्रखंड मुख्यालय स्थित जमालपुर- गोगरी बाजार अपनी प्राचीन पहचान और पुराने व्यापारिक वैभव के लिए जाना जाता रहा है. यह बाजार आसपास के गांवों के लिए जीवनरेखा है. सुबह दुकानें खुलती हैं और देर शाम तक हजारों लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं. करीब एक हजार से अधिक दुकानें और प्रतिदिन लाखों का कारोबार यह बाजार सिर्फ खरीद-विक्री का केंद्र नहीं, बल्कि गोगरी की सामाजिक और आर्थिक धड़कन है. लेकिन, विडंबना यह है कि जिस बाजार से इतने लोगों की रोजी-रोटी चलती है, वही बाजार आज अव्यवस्था, जाम, अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बोझ से कराह रहा है. दुकानदारों से लेकर ग्राहकों तक, हर कोई एक ही आवाज उठा रहा है कि गोगरी के जमालपुर बाजार को उसकी पुरानी पहचान वापस दिलाइये. नाला ढका, सड़क घिरी, अतिक्रमण ने बाजार को जाम में बदल दिया जमालपुर बाजार की सबसे बड़ी व्यथा यही है कि यहां हर कदम पर अतिक्रमण पसरा है. पहले जो नाला सफाई और जलनिकासी के लिए बना था, आज उसके ऊपर पक्का और अस्थायी कब्जा कर लिया गया है. दुकानों के सामने लोगों ने शेड बढ़ा लिया, कहीं पटरियां लगा लीं तो कहीं सड़क की आधी जगह पर सामान सज गया. सड़क का जो हिस्सा खुला बचता है, वह भी ठेला, आटो, टोटो और अवैध पार्किंग से घिर जाता है. लोग बताते हैं कि कई बार तो दो बाइक भी आमने-सामने निकल जाए, यह भी मुश्किल हो जाता है. जाम अब इतना आम हो चुका है कि जमालपुर बाजार आने वाला हर ग्राहक पहले जाम झेलने की मानसिक तैयारी कर आता है. अवैध पार्किंग से सड़क बन चुकी है स्टैंड गोगरी के जमालपुर बाजार में अगुवानी-महेशखूंट मुख्य सड़क पर स्थित यह बाजार अब हाईवे सड़क और बाजार, कम ””वाहन पड़ाव”” ज्यादा नजर आता है. टावर चौक बायपास मोड़, बायपास गांधी चौक, डोमासी चौक से अस्पताल चौक तक हर जगह बस, टेंपो, टोटो, ई-रिक्शा इस तरह खड़े कर दिए जाते हैं जैसे यही उनका स्थायी स्टैंड हो. सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहां नगर परिषद गोगरी ने बायपास में पहले से वाहन पड़ाव निर्धारित कर रखा है, वहां शायद ही कोई वाहन खड़ा मिले और सड़क पर जहां रोक है, वहीं वाहनों की लाइन सबसे लंबी मिलती है. नगर परिषद अभियान चलाती भी है, जुर्माना भी करती है पर असर कुछ दिन में खत्म. बताया जाता है कि जुर्माना के दो दिन बाद फिर वही कहानी शुरू हो जाती है. बाजार में जहां थोड़ी भी जगह खाली मिलती है, वहां ठेला, रिक्शा और छोटे वाहन खड़े कर दिए जाते हैं. इससे दुकानदारों की दुकानें ढक जाती हैं, ग्राहकों को रास्ता नहीं मिलता और आए दिन नोकझोंक होती रहती है. एक दुकानदार ने बताया कि कई बार तो ठेला हटाने को कहने पर बहस और हाथापाई तक की नौबत आ जाती है. सड़क किनारे ””पड़ाव वर्जित क्षेत्र”” चिह्नित है, नोटिस लगे हैं, अभियान चलने की खबरें भी आती हैं पर हालात नहीं बदलते. लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर नगर परिषद और गोगरी पुलिस गंभीर होती तो आज गोगरी-जमालपुर बाजार इस हालत में नहीं होता. कहते हैं थानाध्यक्ष गोगरी के जमालपुर बाजार में लोगों को जाम से राहत देने के लिए बाजार और स्टैंड को स्थायी जगह पर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है, क्योंकि स्थायी स्टैंड नहीं रहने से ई रिक्शा से अधिक जाम की समस्या आ रही थी. अतिक्रमण के खिलाफ भी विशेष अभियान समय-समय पर चलाया जाता है और आगे भी चलाया जायेगा. अरबिंद कुमार थानाध्यक्ष गोगरी.

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