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सदर अस्पताल में करोड़ों की लगात से बने भवन का नहीं हो रहा मेंटेनेंस

Updated at : 02 Jul 2024 12:20 AM (IST)
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Electoral Roll Revision

सदर अस्पताल का निर्माण करोड़ों की लागत से किया गया है. नये भवन की मजबूती पर सवाल खड़े तो हो ही रहे थे.

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कटिहार. सदर अस्पताल का निर्माण करोड़ों की लागत से किया गया है. नये भवन की मजबूती पर सवाल खड़े तो हो ही रहे थे. लेकिन अब जिस एजेंसी को तीन सालों तक के लिए इसकी देखरेख करनी थी. उनका कोई अता पता ही नहीं है. एग्रीमेंट के अनुसार भवन निर्माण और सभी सामान जो कार्य एजेंसी ने अस्पताल में लगाये गये हैं. उनकी पूरी देख देख मेंटेनेंस कार्य एजेंसी को तीन सालों तक करना है. इस बीच यदि कोई गड़बड़ी होती है तो उसे एजेंसी के द्वारा सही करना है. पर आलम यह है कि भवन निर्माण के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग को हैंडोवर करने के बात एजेंसी के कोई भी प्रतिनिधि अस्पताल में नहीं दिखते हैं. यहां तक की नये भवन के जो 100 बेड का नया भवन बनाया गया है. वहां पर दवाई काउंटर कक्ष का गेट महीनों से खराब पड़ हुआ है. गेट खराब रहने से कर्मचारियों के अलावा कोई भी अंदर प्रवेश कर जाता है. नल से पानी की जगह आयरन काई निकलता है. जिसे ठीक करने को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है. यहां तक की करोड़ों रुपए से बनने वाले दोनों भवन में दरारे भी पड़ गयी है. यहां तक की करोड़ों रुपए से बने 100 बेड का नया भवन अभी से भवन के छत और दीवार पर डेम मारना भी शुरू हो गया है. इससे भवन की मजबूती और गुणवत्ता को लेकर भवन निर्माण करने वाले कार्य एजेंसी के ऊपर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. बता दें कि पिछले दो अक्टूबर को सदर अस्पताल का दोनों नये भवन मरीज के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर शुरू कर दिया गया है. मरीज के लिए नये भवन में शिफ्ट होने के साथ ही नये भवन निर्माण के कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये है. दरअसल सदर अस्पताल में मरीजों की स्वास्थ्य सेवा को लेकर केंद्र सरकार योजना के तहत मदर चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण किया गया है. जबकि सदर अस्पताल के 100 बेड भवन का भी निर्माण किया गया है. दोनों ही भवन निर्माण के कार्य को लेकर सरकार ने इसके लिए बीएमएसआईसीएल को निर्माण का कार्य सौंपा था. पर बीएमएसआईसीएल ने दोनों भवन निर्माण का कार्य किसी दूसरे एजेंसी को सौंप दिया. केंद्र सरकार योजना के तहत बनने वाले मदर चाइल्ड हॉस्पिटल निर्माण का कार्य दरभंगा की एजेंसी कृष्णकांत ठाकुर को 16 करोड़ आठ लाख 70 हजार 295 रुपए में दिया. जबकि सदर अस्पताल के 100 बेड भवन निर्माण का कार्य दरभंगा की एजेंसी एमएस कुंवर कंस्ट्रक्शन को 19 करोड़ 06 लाख 16 हजार 465 रूपया में दिया गया. दोनों ही भवन करोड़ों रुपए में बने इसके बावजूद भी भवन के निर्माण में क्या कुछ कमी रही. जिस कारण से दोनों ही भवन में दरार पड़ गया. यहां तक की 100 बेड भवन की छत और दीवार में डेम मारना भी शुरू हो गया है. 100 बेड भवन के दवाई स्टोर कक्ष के गेट खराब हो गया है. नल से पानी की जगह सिर्फ काई निकल रहा है. इससे भवन निर्माण की कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. जबकि अभी तो एक वर्ष भी पूरे नहीं हुए है. नये भवन ने तो अभी जमकर बारिश भी नहीं झेली है. भवन निर्माण के बाद हैंडोवर के बाद तीन वर्षों तक कार्य एजेंसी को भवन में जो भी दिक्कतें आ रही है. उनके द्वारा लगाये गये सामानों में कोई गड़बड़ी हो रही है तो उन्हें दूर करना है. हालत ऐसी है की एजेंसी के द्वारा इसके लिए कोई व्यवस्था ही नहीं की गयी है.

कहते हैं अस्पताल मैनेजर

अस्पताल मैनेजर चंदन कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में लगाये गये सामानों में छोटी-मोटी दिक्कतें आयी है. जिसे दुरुस्त करने को लेकर कार्य एजेंसी को सूचना दी गयी है. यहां तक की लिखित तौर पर दो बार इससे अवगत भी कराया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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