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दिन चढ़ने के साथ लुढ़कते पारा से बढ़ी ठंड, आमजन परेशान

दिन चढ़ने के साथ लुढ़कते पारा से बढ़ी ठंड, आमजन परेशान

– सुबह कुहासा व शीतलहरी से घराें में दुबके रहे लोग, दो से तीन घंटे के लिए खिली धूप से राहत – दरोगा लिखित परीक्षा के लिए बाहर सेंटर देने से अभ्यर्थी परेशान – 18 व 21 जनवरी को दो पाली में होनी है परीक्षा कटिहार दिन चढ़ने के साथ लुढकते पारा से ठंड में हुई इजाफा से आमजन परेशान रहे. अहले सुबह कुहासा व शीतलहरी के प्रकोप से लोग घरों में दुबके रहे. हालांकि दो दिनों से दोपहर में घंटे दो घंटे के लिए निकली धूप से लोगों को राहत जरूर मिली. पुन: शाम होते ही बढ़ती ठंड से लोग परेशान नजर आये. शनिवार की अहले सुबह ही घने कोहरे व शीतलहरी से सड़कों पर चालकों ने वाहन के हेडलाइड जलाकर परिचालन को मजबूर रहे. जिसके कारण सड़कों पर वाहनें रेंगती नजर आयी. बहरहाल कृषि विज्ञान केन्द्र के पंकज कुमार का कहना है कि अगले चौबीस घंटे में न्यूनतम व अधिकतम में दो डिग्री तापमान की वृद्धि से ठंडी में कमी आयेगी. इससे आमजनों को राहत मिलेगी. जब तक पछुआ हवा बहते रहेगा तब तक ठंड और कुहासे और शीतलहरी में इजाफा ही होगा. जिले में पड़ रही अधिक ठंडी से आमजन जहां परेशान हैं. दूसरी ओर कड़ाके की ठंड में दरोगा लिखित परीक्षा के लिए तिथि जारी कर दिये जाने से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच बेचैनी बढ़ गयी है. कई अभ्यर्थियों का परीक्षा सेंटर किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और अन्य जगहों पर दिये जाने के बाद वे लोग पेशोपेश में हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि उनलोगों की परीक्षा 18 और 21 जनवरी को दोनो पालियों में होनी है. ठंड का रफ्तार इसी तरह कायम रहा तो परीक्षा को लेकर उनलोगों के बीच परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इधर नेट की परीक्षा के लिए पूर्णिया में सेंटर दिये जाने से नेट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के बीच भी बढ़ती ठंड परेशानी का सबब बना हुआ है. ठंड व शीतलहर व पाला पड़ने की स्थिति में फसलों को बचाना अत्यावश्यक जिले में अत्यधिक ठंड व शीतलहर व पाला पड़ने की स्थिति में फसलों को नुकसान से बचाना किसान के लिए आवश्यक है. नहीं तो उत्पादन में कमी आती है. सुझाए गये उपायों को अपनाकर किसान फसलों पर ठंड के विपरीत प्रभावों को कम कर सकते हैं. कृषि विज्ञान केन्द्र के पंकज कुमार ने सिंचाई सम्बंधित उपायों को लेकर बताया कि पाला पड़ने की संभावना हो तो हल्की सिंचाई करें. इससे खेत का तापमान बढ़ता है. सब्जी व बागवानी फसलों में शाम के समय सिंचाई अधिक लाभकारी होती है. पाले के बाद सुबह हल्की सिंचाई करने से नुकसान कम होता है. धुंआ खेत में फैलने से तापमान गिरने से होता है बचाव धुंआ प्रबंधन को लेकर बताया कि रात में खेत की मेड़ पर कचरा, भूसा या पुआल जलाकर धुआं करें, धुआं खेत में फैलने से तापमान गिरने से बचाव होता है. ध्यान रखना चाहिए कि आग खुली न रखें, केवल धुआं करें. सब्जियों की नर्सरी व छोटी फसलों को पॉलिथीन शीट, टाट, भूसा या पुआल से ढकें, सुबह धूप निकलने पर ढकाव हटा दें. पोटाश का छिड़काव प्रयोग पौधों की ठंड सहन क्षमता बढ़ाता है. जिंक व सल्फर की संतुलित आपूर्ति रखे. ठंड में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा न दें. गेहूं हल्की सिंचाई व संतुलित उर्वरक दें. सरसों फूल अवस्था में पाले से बचाव के लिए सिंचाई व धुंआ जरूरी है. पाला पड़ने पर सुबह पानी का छिड़काव जरूरी आलू में पाला पड़ने पर सुबह पानी का छिड़काव जरूरी है. खेत को खरपतवार मुक्त रखें. इससे मिट्टी का तापमान बना रहता है. मौसम पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखें. जैविक व घरेलू उपाय गंधक (सल्फर) 0.1 प्रतिशत का छिड़काव पाले के प्रभाव को कम करता है. गोबर की खाद का प्रयोग मिट्टी को गरम बनाए रखता है. इन उपायों को अपनाकर अत्यधिक ठंड व पाले से फसलों में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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