गेहूं मक्का के बाद आलू किसानों पर आंधी बारिश का कहर

गेहूं मक्का के बाद आलू किसानों पर आंधी बारिश का कहर
-एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार आंधी बारिश ने किसानों की तोड़ी कमर -मुआवजे को लेकर फाइनल सूची तैयारी करने में लगा विभाग, दूसरी बार आंधी तूफान से किसानों के सपने धूमिल -खेतों में तैयार आलू की फसल को देख किसान हुए परेशान कटिहार एक सप्ताह पूर्व जिले भर में आयी आंधी तूफान से फसलों की हुई नुकसान को लेकर विभाग की ओर से अभी फसल क्षति को लेकर अंतिम सूची तैयार करने का दावा किया जा रहा था कि शुक्रवार की देर रात आयी एक बार फिर आंधी तूफान और बारिश ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी. गेहूं मक्का के बाद इस बार आलू किसानों पर बारिश व आंधी कहर बनकर आई आंधी तूफान व बारिश से सबसे अधिक आलू किसानों को नुकसान पहुंचा है. खेतों में तैयार आलू की फसल को देखकर किसान माथा पीट रहे हैं. खासकर दिसम्बर में खेतों में लगाये आलू की फसल को काफी क्षति पहुंचाया है. खेतों में तैयार फसल में पानी लगने के कारण सड़ जाने से अब किसानों को इसका लेवाल तक नहीं मिल रहे हैं. जिसका नतीजा है कि किसान औने पौने दामों में खेतों से किसी तरह खिसकाने के जुगाड़ में लगे हुए हैं. हालांकि इसका लाभ खुदरा विक्रेता को खूब मिल रहा है. खेतों में जहां चार रूपये किलो तक के लेवाल नहीं मिल रहे हैं, वहीं दुकानों में इसे दस रूपये प्रति किलो बेचे जा रहे हैं. दलन के किसान कृष्णा चौहान, डब्ल्यू चौहान, दलन पूरब पंचायत के किसान रविशंकर चौधरी, हरिशंकर चौधरी, संजय चौधरी समेत अन्य किसानों का कहना है कि शुक्रवार की देर रात व शनिवार की अहले सुबह हुई आंधी बारिश ने बची खुची फसलों को बबाद कर दिया, पिछली बार आयी बारिश व आंधी तूफान से जहां मकई व गेहूं की फसलों का नुकसान अधिक हुआ था, इस बार जो खेतों में फसल खड़े थे उन्हें भी बर्बाद कर दिया. कदेपुरा के किसान छोटेलाल शर्मा ने बताया कि रात हुई आंधी बारिश में सवा बीघा मकई खेतों में गिर गये, मक्का की फसल दाना पर आया था, गिर जाने के बाद काफी क्षति पहुंची हैं. भविष्य का प्लान धरा का धरा रह गया. इधर दलन के किसान कृष्णा चौहान, डब्ल्यू चौहान का कहना है कि विभाग द्वारा भेजे गये फसल निरीक्षी टीम द्वारा कागजातों की मांग की जाती है, साथ ही वैसे किसान जिनके घर में कोई नौकरी वाला है, उन्हें मुआवजा नहीं दिये जाने को लेकर प्रावधान बताया गया. पोखराज का नहीं मिल रहा लेवाल किसान कृष्णा कुमार चौहान, रविशंकर चौधरी समेत अन्य की माने तो बारिश के बाद से खेतों में थोक के हिसाब से रखे पोखराज आलू का लेवाल नहीं मिल रहा है. मूल्यों में काफी गिरावट होने की वजह से उनलोगों को लागत मूल्य निकालना मुश्किल साबित हो रहा है. चार से पांच रूपये तक लेवाल नहीं मिल रहे हैं, जबकि दिसम्बर में लगाये गये आलू अब उखाड़ने की तैयारी की जा रही थी. लेकिन इन दिनों आंधी और बारिश से फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच गये. फसल क्षति आकलन का किया जा रहा अंतिम टच 21 मार्च को ही सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को फसल क्षति आकलन को लेकर पत्र जारी किया गया था. 21 मार्च तक क्षति प्रतिवेदन दिये जाने का निदेश दिया गया था. अब तक फसल क्षति का आकलन लिया जा रहा है, मुआवजे को लेकर क्षति प्रतिवेदन अंतिम रूप से टच किया जा रहा है. मिथिलेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी
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