साहब, बच्चे जब भूख से रोते हैं, तो हमारा कलेजा फट जाता है
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गरीबी से तंग आकर बच्चे को पहुंचे थे बेचने कटिहार : साहब, जब बच्चे भूख से रोते हैं, तो हमारा कलेजा फट जाता है. मां हूं और बच्चों को भूखा नहीं देख सकती. खुद भूखी रह सकती हूं, लेकिन उन्हें भूखे रोते हुए नहीं देख सकती. कब तक दूसरों की तरफ हाथ फैलाएं. सूप-टोकरी बनाना […]
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गरीबी से तंग आकर बच्चे को पहुंचे थे बेचने
कटिहार : साहब, जब बच्चे भूख से रोते हैं, तो हमारा कलेजा फट जाता है. मां हूं और बच्चों को भूखा नहीं देख सकती. खुद भूखी रह सकती हूं, लेकिन उन्हें भूखे रोते हुए नहीं देख सकती. कब तक दूसरों की तरफ हाथ फैलाएं. सूप-टोकरी बनाना ही पेशा है, लेकिन अब उससे घर नहीं चल पाता. ये कहना था गुंजा का, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने पति के साथ अपने जिगर के टुकड़े को बेचने डंडखोरा से कटिहार पहुंची थी. उसका कहना था कि कम से कम दूसरे के पास बच्चा भूखा तो नहीं रहेगा. हालांकि यह दंपती अपने नवजात को बेचता, उससे पहले ही लोगों की नजर पड़ गयी और पुलिस पहुंच गयी. नगर थाना पुलिस सभी को नगर थाना लेकर आयी, जिसके बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के सहयोग से सदर अस्पताल में भरती कराया गया.
डंडखोरा निवासी सुरेश मल्लिक व उसकी पत्नी गुंजा को तीन पुत्र व एक पुत्री है. इनमें संतोष (04), आरती (03) एवं राम व लक्ष्मण महज चार माह के जुड़वा हैं. आर्थिक तंगी के कारण दंपती बच्चों का भरण पोषण नहीं कर पा रहा था. इस कारण सुरेश के पुत्र व पुत्री कुपोषित तो दिखते ही हैं, रोगों से भी ग्रसित हैं. जिसे प्रशासन की पहल पर भरती कराया गया.
कई लोगों ने की मदद
पीड़ित दंपती जब अपने दो माह के कलेजे के टुकड़े को पांच से दस हजार में बेचने जा रहा था, तो कई लोगों ने उसे ऐसा करने से मना करते हुए उसकी आर्थिक मदद की. प्रत्युश चक्रवर्ती ने नवजात को गोद लेकर उसकी बेहतर परवरिश करने की बात भी कही. दंपती को भोजन कराया एवं उसके हाथ में कुछ रुपये भी दिया, ताकि वह तथा उसकी पत्नी भोजन कर सकें.
आ गयी थी भुखमरी की नौबत
सुरेश मल्लिक ने कहा कि पहले तो ठीक ठाक काम हो ही जाता था. अब सूप व डलिया छठ पर्व में ही बिकते हैं. इस कारण उसका गुजारा भी बमुश्किल हो पाता है. साथ ही चार-चार बच्चों का भरण पोषण की भी जिम्मेवारी उसके कंधे पर है. आखिर बेरोजगारी में किस प्रकार बच्चे तथा अपना भरण पोषण करे. सुरेश ने कहा कि अब लोगों के घरों में सूप व डलिया का काम किसी त्योहार या फिर शादी व्याह में ही पड़ता है. इस कारण सूप व डलिया की बिक्री नहीं के बराबर होती है. इस कारण आर्थिक तंगी व भुखमरी की स्थित उत्पन्न हो गयी है. सुरेश ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से चलाये जा रही किसी भी योजना का लाभ उसे नहीं मिला है. इसी कारण यह कदम उसने व उसकी पत्नी ने उठाया, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था.
कहते हैं जिले के प्रभारी मंत्री
सूबे के पशुपालन व मत्स्य संसाधन विकास मंत्री दो दिन के दौरे में कटिहार पहुंचे थे. जब उन्हें आर्थिक तंगी के कारण नवजात को बेचने की जानकारी मिली, तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की सूचना प्राप्त हुई है और इस पर संज्ञान लिया जा रहा है. अभी इसके बारे में कुछ कहना मुश्किल है. हो सकता है कि यह मामला राजनीति से भी प्रेरित हो.
मामले की जांच करायी जायेगी एवं सरकारी प्रावधान के अनुसार उक्त परिवार को योजना का लाभ दिलाया जायेगा. इस तरह की परिस्थिति उत्पन्न न हो, उसके लिए भी अधिकारियों को निर्देश देंगे.
मिथिलेश मिश्र, डीएम
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