सुबह मीडिया की पहल पर किया एडमिट

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प्रसूता को नहीं किया एडमिट, रात भर ठंड में बाहर प्रसव पीड़ा से कराहती रही निजी नर्सिंग होम का नाम बताते हुए स्वास्थ्यर्मी भेज िदये नर्सिंग होम 25 हजार रुपये नहीं होने पर फिर लौट आये सदर अस्पताल सुबह मीडिया की पहल पर किया गया भरती, छोटे से ऑपरेशन के बाद बच्चे को दिया जन्म […]

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प्रसूता को नहीं किया एडमिट, रात भर ठंड में बाहर प्रसव पीड़ा से कराहती रही

निजी नर्सिंग होम का नाम बताते हुए स्वास्थ्यर्मी भेज िदये नर्सिंग होम
25 हजार रुपये नहीं होने पर फिर लौट आये सदर अस्पताल
सुबह मीडिया की पहल पर किया गया भरती, छोटे से ऑपरेशन के बाद बच्चे को दिया जन्म
कटिहार : लाख कोशिशों के बाद भी सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है. यहां बिचौलियों का ही राज चलता है. इसका जीता जागता उदाहरण मंगलवार की रात देखने को मिला, जब एक प्रसूता को उसके परिजन एडमिट कराने पहुंचे. पर, स्वास्थ्यकर्मियों ने निजी नर्सिंग होम का नाम बताते हुए उन्हें वहां ले जाने की सलाह दी. परिजनों ने जब कहा कि तब मेडिकल कॉलेज ही रेफर कर दें, तो उन्होंने इससे भी इनकार कर दिया. फिर परिजन उसे लेकर बताये गये निजी नर्सिंग होम में ले गये,
लेकिन वहां तत्काल 25 हजार रुपये जमा करने को कहा गया. इतने रुपये नहीं होने पर परिजन वहां से फिर सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें प्रसव वार्ड से बाहर कर दिया. ऐसे में परिजन प्रसूता महिला को रुपये के अभाव में अस्पताल के बाहर इस भरी ठंड में पड़े रहे. सुबह जब मीडिया तक बात पहुंची, तब उनकी पहल पर प्रसूता को एडमिट कराया गया और छोटे से आॅपरेशन के बाद उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया.
गाड़ी का ब्रेक है फेल, प्रसूता को लाया ट्रेन से : सालमारी में घर पर जब दीपा को प्रसव पीड़ा होने लगी तो पति सुनील सिंह व देवर चंद्रशेखर सिंह ने 102 नंबर पर एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया. इस पर चालक ने गाड़ी में ब्रेक फेल होने की बात कही. तब परिजन दीपा को किसी प्रकार ट्रेन से कटिहार लेकर आये. रेलवे स्टेशन से ऑटो में दीपा को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. रात दस बजे चंद्रशेखर अपनी भाभी को लेकर सदर अस्पताल पहुंचे थे. प्रसूता प्रसव पीड़ा से कराह रही थी. इस पर स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि इसका इलाज यहां संभव नही है. नर्सिग होम का नाम बताते हुए वहां ले जाने की सलाह दी. कहा यहां स्थिति बिगड़ सकती है. परिजननों ने कहा कि कटिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दें. डयूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी सहित सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में मौजूद अन्य बिचौलियों ने कहा कि उसका इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी संभव नहीं है. इस बात पर परिजन दीपा को देर रात बताये गये नर्सिंग होम लेकर गये. परिजनों ने बताया कि जब वहां पेसेंट को भरती करने लगे, तो नर्सिग होम में तैनात स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि 25 हजार रुपये जमा करें, तो ही इलाज शुरू होगा. थक -हार कर परिजन दीपा को फिर से सदर अस्पताल लेकर आ गये.
स्वास्थ्य कर्मियों ने निकाला बाहर: जब दीपा को उसके परिजन पुन: सदर अस्पताल लेकर आये, तो स्वास्थ्य कर्मियों सहित बिचौलिये ने उसे एडमिट नहीं किया और उसे प्रसव वार्ड से बाहर कर दिया. प्रसूता प्रसव पीड़ा से छटपटा रही थी. फिर भी उन पर इसका असर नहीं पड़ा. परिजनों के पास उतनी राशि भी नहीं थी कि वह दीपा को अन्यत्र एडमिट कर देते. अंतत: परिजनों ने सदर अस्पताल में ही रात गुजारने की ठानी. रात भर वे प्रसूता दीपा को लेकर अस्पताल के बाहर पड़े रहे. अहले सुबह इसकी सूचना जब मिडियाकर्मियों को लगी, तो वे सदर अस्पताल पहुंचे. फिर उनकी पहल पर प्रसूता को सदर अस्पताल में एडमिड किया गया. इसके बाद मामूली से ऑपरेशन के बाद पश्चात उसने एक पुत्र को जन्म दिया.
कहते हैं डीएस
डीएस ने सभी आरोपों का ठिकरा सुरक्षाकर्मी पर मढ़ते हुए कहा कि सदर अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मी मानक के अनुरूप नहीं हैं. इस कारण बिचौलिया सदर अस्पताल में हावी हैं. आशा, ममता, एएनएम व स्वास्थ्य कर्मी के संदर्भ में भी कहा कि मरीज द्वारा लगाये गये आरोपों में संभवत: इन लोगों का भी हाथ हो. जानकारी मिलने पर प्रसूता का एडमिट कर उसका प्रसव कराया गया है. मामले को लेकर जांच की जायेगी, जो भी आरोपित होंगे उनपर कार्रवाई की जायेगी.
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