प्रसूता की चली गयी जान दुखद . रेफरल अस्पताल से नहीं मिला एंबुलेंस

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बीपीएल परिवार की एक प्रसूता ने गुरुवार को रेफरल अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया. इसके दो घंटे बाद उसकी तबीयत बिगड़ गयी. पर, अस्पताल की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो पायी, जिससे अंतत: उसने दम तोड़ दिया. बरारी : प्रखंड क्षेत्र के सिक्कट गांव के बीपीएल परिवार की प्रसूता अंजलि देवी […]

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बीपीएल परिवार की एक प्रसूता ने गुरुवार को रेफरल अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया. इसके दो घंटे बाद उसकी तबीयत बिगड़ गयी. पर, अस्पताल की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो पायी, जिससे अंतत: उसने दम तोड़ दिया.

बरारी : प्रखंड क्षेत्र के सिक्कट गांव के बीपीएल परिवार की प्रसूता अंजलि देवी (35) ने गुरुवार को रेफरल अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन इसके दो घंटे बाद ही प्रसूता की मौत हो गयी. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर समय पर एंबुलेंस मुहैया नहीं कराये जाने का अरोप लगाया है. परिजनों ने कहा कि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो प्रसूता मासूम की मौत नहीं होती. घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रखंड के सिक्कट पंचायत के सिक्कट गांव निवासी सुधीर परिहार की पतोहू अंजलि देवी पति बबलू परिहार प्रसव कराने गुरुवार को रेफरल अस्पताल बरारी पहुंची थी.
प्रसव पीड़ा होने पर उसे प्रसव गृह में भरती कराया गया. पूर्वाह्न करीब 11.30 बजे अंजलि देवी ने एक बच्ची को सामान्य अवस्था में जन्म दिया. पर, दो घंटे बाद प्रसूता की स्थिति बिगड़ने लगी. अस्पताल के चिकित्सक ने प्रसूता को कटिहार ले जाने की सलाह दी. इसके बाद परिजन प्रसूता को कटिहार ले जाने के लिए एंबुलेंस का जुगाड़ करने लगे. इस दौरान काफी मेहनत करने के बाद भी एंबुलेंस अस्पताल प्रबंधन की ओर से उपलब्ध नहीं कराया जा सका. दो घंटे तक प्रसूता तड़पती रही और उसकी मौत हो गयी. परिजनों ने बताया कि मरीज को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने व प्राइवेट गाड़ी नहीं मिलने से उसकी मौत हो गयी.
समय पर यदि कटिहार अस्पताल या निजी क्लिनिक तक प्रसूता को इलाज के लिए लाया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी. अंजलि देवी की मौत से परिजनों के बीच कोहराम मच गया. ससुर सुधीर परिहार, बूआ उमा देवी, नन्द नीतू देवी नेहा अस्पताल प्रशासन पर एंबुलेंस नहीं देने से मरीज की मौत का आरोप लगाया.
पांच बच्चियों का कौन देखेगा
मृत अंजलि देवी को चार बच्चियां हैं. उसकी मौत के बाद इनका लालन-पालन कौन करेगा, लोगों को इसकी चिंता लगी हुई है. चारों बच्ची की उम्र काफी कम है. सबसे बड़ी बच्ची आठ वर्ष की कल्पना है. इसके बाद आशा, ममता, भारती कुमारी के बाद एक नवजात बच्ची को जन्म देकर वह चल बसी. परिजनों को चिंता खाये जा रही है कि अब छोटी-छोटी बच्चियों का लालन-पालन कौन करेगा. घटना के बाद से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. गांव में मातमी छाया हुआ है.
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