जिले के दोनों जूट मिल बंद

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जिले के पुराना व नया दोनों जूट मिल के बंद हो जाने से कामगारों के समक्ष भुखमरी की नौबत आ गयी है.कुछ मजदूर तो मिल खुलने की राह देख रहे हैं, वहीं कुछ मजदूर नेपाल के सोनापुर जूट मिल में काम के लिए पलायन कर रहे हैं. सोनापुर जूट मिल में भी काम मिलने में […]

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जिले के पुराना व नया दोनों जूट मिल के बंद हो जाने से कामगारों के समक्ष भुखमरी की नौबत आ गयी है.कुछ मजदूर तो मिल खुलने की राह देख रहे हैं, वहीं कुछ मजदूर नेपाल के सोनापुर जूट मिल में काम के लिए पलायन कर रहे हैं. सोनापुर जूट मिल में भी काम मिलने में इनको परेशानी हो रही है. वहीं इस मसले पर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं.
कटिहार : नगर निगम क्षेत्र में स्थित सनबायो जूट मेन्यूफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (पुराना जूट मिल) एवं एनजेएमसी की इकाई आरबीएचएम जूट मिल (नया जूट मिल) के बंद हो जाने से मजदूरों के समक्ष भुखमरी की नौबत आ गयी है. दोनों मिल एक के बाद एक बंद होने से मजदूर पलायन को भी मजबूर हो गये हैं. यही कारण है कि कुछ मजदूर तो मिल खुलने की राह देख रहे हैं, वहीं कुछ मजदूर नेपाल के सोनापुर जूट मिल में काम के लिए पलायन कर रहे हैं.
13 जून को जूट नहीं मिलने का हवाला देकर मिल प्रबंधन ने पुराना जूट मिल को बंद कर दिया था. वर्तमान में इस मिल में करीब 250 मजदूर काम कर रहे थे, जबकि मजदूरों के पदों की संख्या 650 है. मिल प्रबंधन ने ट्रेड यूनियन व श्रम पदाधिकारियों के साथ हुई वार्ता को ताक पर रखकर मिल को बंद कर दिया. वहीं नया जूट मिल पिछले छह माह से बंद है.
इस मामले को लेकर ट्रेड यूनियन के नेताओं द्वारा काफी हो हल्ला किया गया, लेकिन मिल नहीं खुला. इस मिल को आठ जनवरी, 2015 को राहुल इंटरप्राइजेज के ठेकेदार द्वारा मजदूरों के बकाया पीएफ, इएसआइ मांगने पर बंद कर दिया गया था. इन दोनों मिल के बंद होने से कटिहार जिला उद्योग विहीन हो गया है.
भुखमरी के कगार पर पहुंचे मिल मजदूर
एक के बाद एक दोनों मिल के बंद होने से इस मिल में कार्यरत हजारों कामगार रोजी रोटी की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. मजदूर नेपाल के सोनापुर जूट मिल में काम करने के लिए पहुंच रहे हैं. सोनापुर जूट मिल में भी काम मिलने में इनको परेशानी हो रही है. बाकी के बचे मजदूर रिक्शा, ठेला व दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार के पेट की आग बुझा रहे हैं. अगर जल्द ही इस मामले में संज्ञान नहीं लिया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब जिले को उद्योग विहीन जिला कहा जायेगा.
बंद व खुलने का चलता रहा है सिलसिला
दोनों जूट मिल कब बंद हो जायेगा या फिर कब खुल जायेगा यह एक रहस्य बना हुआ है.बंद व खुलने के इस पेच में हमेशा से मजदूर ही फंसते हैं. वर्ष 2014 से वर्ष 2016 तक पुराना जुट मिल करीब चार बार बंद हो चुका है. वहीं नया जूट मिल में ठेकेदारों के द्वारा मनमानी की वजह से यह मिल बंद कर दिया जाता है. दोनों ही हालात में मजदूर ही भुगतते हैं. दोनों जूट मिल को लेकर ट्रेन यूनियन के नेता हो हल्ला करते हैं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मसले पर चुप्पी साधे रहते हैं.
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