पहले भी दो एजेंटों ने की है आत्महत्या

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नॉनबैंकिंग कंपनी. लाखों का लगा चुकी है चूना उदयचंद के फांसी लगाने के बाद एक बार फिर नॉनबैंकिंग कंपनी के द्वारा पैसे लेकर फरार होने का मामला ताजा हो गया है. नन बैकिंग कंपनी में पैसा जमा करनेवाले जहां आज भी भटक रहे हैं. पूर्व में भी स्थानीय लोगों के तगादे से परेशान हो दो […]

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नॉनबैंकिंग कंपनी. लाखों का लगा चुकी है चूना

उदयचंद के फांसी लगाने के बाद एक बार फिर नॉनबैंकिंग कंपनी के द्वारा पैसे लेकर फरार होने का मामला ताजा हो गया है. नन बैकिंग कंपनी में पैसा जमा करनेवाले जहां आज भी भटक रहे हैं. पूर्व में भी स्थानीय लोगों के तगादे से परेशान हो दो एजेंटों ने अपनी जान गंवा दी है. कम समय में अधिक लाभ का झांसा देकर पहले तो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है, फिर करोड़ों लेकर भाग जाती है. फंसते हैं बेचारे स्थानीय एजेंट.
कटिहार : नॉन बैकिंग कंपनी के झांसे में आकर वर्ष 2007 में ननबैकिंग कंपनी के एजेंट मोहन सिन्हा ने खगड़िया-पसराहा ट्रैक लाइन पर कट कर आत्महत्या कर ली थी. वहीं अन्य एक एजेंट विनोद सिन्हा ने भी बरौनी पुल से कूद कर जान दे दी थी. वहीं एक नाॅन बैकिंग कंपनी का ऋण वापस नहीं करने को लेकर हफलागंज में एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने अपनी जान दे दी थी. इसके अलावा भी कई ऐसी घटनाएं जिले में हो चुकी हैं.
नन बैकिंग कंपनी द्वारा बैंक में जमा राशि वापस नहीं करने की स्थिति में इन नन बैकिंग कंपनियों के विरुद्ध स्थानीय थाना में कई मामले दर्ज कराये गये हैं लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने से लोग निराश हैं.
शारदा मामले के बाद हुई कार्रवाई के बाद गायब हो गयी नॉनबैंकिंग कंपनियां : बीते दो वर्ष पूर्व तक नन बैकिंग कंपनियां जिले में धड़ल्ले से अपना कारोबार चलाती रहीं और भोली भाली जनता को लूटती रहीं. गत वर्ष शारदा ग्रुप द्वारा बिहारवासियों के करोड़ों हजार रुपये ठगे जाने के बाद हरकत में आयी बिहार सरकार तल्ख हुई और नन बैकिंग कंपनियों पर शिकंजा कसने को लेकर सूबे के सभी जिलाधिकारी व एसपी को आदेश जारी किये गये. इसके बाद सूबे के अमूमन सभी जिलों में नन बैंकिंग कंपनियां गायब सी हो गयीं.
अब भी लोग नहीं भूले हैं जेवीजी को : आज भी लोग जेवीजी का नाम नहीं भूल पाये हैं. उदय के आत्महत्या की खबर सुनने के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गयी थी. जब घटना के कारण का पता चला तो लोग नन बैंकिंग कंपनी को लेकर चर्चा करने लगे. इस दौरान जेवीजी की भी चर्चा होती रही.
. जिले में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसने इस नन बैंकिंग कंपनी में अपनी गाढ़ी कमायी जमा नहीं की होगी. जिले की स्थिति ऐसी थी कि जेवीजी में हर पांच घर से एक व्यक्ति इस नन बैंकिंग का एजेंट बना था और सभी घरों से खाते इसी नन बैंकिंग में खुलने लगे. 90 के दशक में कटिहार जिले से जेवीजी कंपनी ने तकरीबन पांच हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय किया. इसके बाद लोगों का विश्वास और भी बढ़ने लगा.
फिर एक दिन यह नन बैंकिंग का असली चेहरा लोगों के सामने आया और अचानक यह कंपनी जिलेवासियों का पांच हजार करोड़ रुपये लेकर फरार हो गयी. इसके बाद तो मानो लोगों के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. लोग नन बैंकिंग कंपनी का कार्यालय दौरा करने लगे और अंतत: थक हार कर लोगों ने संतोष कर लिया. बाद में आयी सहारा, सन प्लांट, प्रयाग, एक्टिव, विश्वामित्र, एग्रो फाइनेंस लिमिटेड, मां काली समिति सहित दर्जनों नन बैकिंग कंपनियां जिले व शहरी क्षेत्रों में लोगों में अत्यधिक ब्याज दर, कम समय में दोगुना राशि सहित अन्य भ्रामक बातें फैला कर एजेंटों के माध्यम से लोगों को दोबारा जाल में फंसाना शुरू किया.
अच्छे कार्यक्रम व बड़े-बड़े झांसों को देख स्थानीय लोग फंसते चले गये और ननबैंकिंग कंपनियां फिर पैसे लेकर फरार हो गयी. चूंकि पैसे जमा कराने में स्थानीय लोग ही एजेंट की भूमिका में थे, इस कारण उनके घर तगादा करनेवालों की भीड़ लगती है.
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