कोसी-सीमांचल में बढ़ी भिक्षावृत्ति

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बच्चों से भी भीख मंगवाने का पूरा धंधा बहुत सुनियोजित है. सर्दियों और गर्मियों के दिनों में इनका धंधा अधिक फलता-फूलता है. कटिहार : कोसी व सीमांचल समेत सूबे के कई जिलों में भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर मासूम बच्चों से लेकर नाबलिग लड़के-लड़कियों के जरिये भीख मांगने और मंगवाने का धंधा एक व्यवसाय की […]

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बच्चों से भी भीख मंगवाने का पूरा धंधा बहुत सुनियोजित है. सर्दियों और गर्मियों के दिनों में इनका धंधा अधिक फलता-फूलता है.

कटिहार : कोसी व सीमांचल समेत सूबे के कई जिलों में भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर मासूम बच्चों से लेकर नाबलिग लड़के-लड़कियों के जरिये भीख मांगने और मंगवाने का धंधा एक व्यवसाय की तरह बनता जा रहा है. एक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि बाल भिक्षावृत्ति का यह पूरा धंधा सुनियोजित ढंग से चल रहा है. भीख मांगने के लिए बच्चों को इस तरह से प्रशिक्षित किया जाता है कि वे लोगों का भावनात्मक स्तर पर फायदा उठा सकें.
हालांकि भिक्षावृत्ति में लगे मासूम बच्चों को न ठीक से खाना मिल पाता है और न उनके उठने-बैठने और सोने का कोई ठौर होता है. ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा तो दूर की कौड़ी है. सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 14 साल तक से 3,72,217 बच्चे भिक्षावृत्ति में लगे हैं और खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं.
भिक्षावृत्ति की स्थिति यह है कि एक पूरा गिरोह इसमें संलग्न है, जो मौसम के हिसाब से लोगों की भावनाओं से खेलता है और भीषण गरमी और कंपकंपाती ठंड में छोटे-छोटे बच्चों का इस्तेमाल करता है. अनेक मामलों में बच्चों के अंगभंग करने के आरोप सामने आये हैं. काफी संख्या में बच्चों का अपहरण कर इस धंधे में ढकेलने की बात भी सामने आती रहती है. बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन ‘चेतना’ ने ऐसे ही बच्चों को लेकर एक अध्ययन किया और उसमें इस तरह के पहलू सामने आये.
दंड का है प्रावधान
बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ संशोधित किशोर न्याय कानून में कड़ा प्रावधान किया गया है. अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) बच्चों से भीख मंगवाने की इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर मुहिम शुरू करने जा रहा है और इसकी शुरुआत राजधानी दिल्ली से की जायेगी. ‘
किशोर न्याय (संशोधन) कानून-2015 में बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. ऐसे में बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए इस संशोधित कानून का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है. इस संशोधित कानून की धारा 76 के तहत बाल भिक्षावृत्ति के दोषी पाये गये व्यक्ति को पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपये के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. बच्चों का अंगभंग करके उनको भिक्षावृत्ति में धकेलने के दोषी पाये व्यक्ति को सात से 10 साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
सुनियोजित ढंग से होता है यह धंधा
ट्रेनों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही
‘चेतना’ के निदेशक संजय गुप्ता का कहना है कि बच्चों से भी भीख मंगवाने का पूरा धंधा बहुत सुनियोजित है. सर्दियों और गर्मियों के दिनों में इनका धंधा अधिक फलता-फूलता है. कंपकपाती ठंड और भीषण गरमी में अगर कोई महिला छोटे बच्चे को लेकर रेलवे और बस स्टैंड परिसर समेत धार्मिक स्थलों पर भीख मांगती है,
तो अधिकतर लोगों का दिल पसीज जाता है और वे पैसे दे देते हैं. यह भी बात सामने आयी है कि जो महिलाएं बच्चे लिए रहती हैं, उनमें से अधिकांश के अपने बच्चे भी नहीं होते. वैसे, इन बच्चों और महिलाओं से बात की गयी, तो वे इसी बात पर जोर देती नजर आयीं कि वे मजबूरी में भीख मांगते हैं. खासकर ट्रेनों में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है. हालांकि सूबे में रोजगार की कमी और सरकारी योजनाओं का इन तबकों के बीच नहीं पहुंच पाना भी भिक्षावृत्ति को बढ़ावा दे रहा है.
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