स्कूल जाने में लड़कियां अव्वल

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चिंताजनक. ड्रॉप आउट में लड़कों की संख्या बढ़ी, सर्वे रिपोर्ट में खुलासा कटिहार जिले में लड़कियों की तुलना में लड़के अधिक ड्राॅप आउट हो रहे हैं. करीब चार-पांच माह पूर्व शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में विद्यालय स्तर पर कराये गये सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ है कि लड़कों की तुलना में […]

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चिंताजनक. ड्रॉप आउट में लड़कों की संख्या बढ़ी, सर्वे रिपोर्ट में खुलासा
कटिहार जिले में लड़कियों की तुलना में लड़के अधिक ड्राॅप आउट हो रहे हैं. करीब चार-पांच माह पूर्व शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में विद्यालय स्तर पर कराये गये सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ है कि लड़कों की तुलना में लड़कियों का ड्राप आउट कम हुआ है.
सूरज गुप्ता
कटिहार : प्रारंभिक शिक्षा यानी पहली से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए सरकार ने कई तरह की व्यवस्था दी है. सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने के उद्देश्य से चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं का असर भी दिखने लगा है. स्थानीय शिक्षा विभाग की मानें, तो विभिन्न योजनाओं की वजह से ही समाज के शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन विद्यालय में हो चुका है. वहीं शिक्षा विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती नामांकित बच्चों के विद्यालय में ठहराव को लेकर है.
50 से 60 फीसदी ही आते हैं स्कूल
विभागीय सूत्रों की मानें, तो हर कार्य दिवस में औसतन 50 से 60 फीसदी ही बच्चे स्कूल आते हैं. दूसरी तरफ सरकारी आंकड़ों पर भरोसा करें, तो बच्चों के ड्राप आउट मामले में कमी आयी है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक तथ्य और भी चौंकाने वाला है. कटिहार जिले में लड़कियों की तुलना में लड़के अधिक ड्राप आउट हो रहे हैं. करीब चार-पांच माह पूर्व शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में विद्यालय स्तर पर कराये गये सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ है कि लड़कों की तुलना में लड़कियों का ड्राप आउट कम हुआ है. दरअसल, एक अप्रैल को बिहार सहित देश भर में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून 2009 के लागू होने के छह वर्ष पूरे हो रहे हैं.
6 से 14 आयु वर्ग यानी पहली से आठवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा अधिकार कानून की कटिहार जिले में क्या स्थिति है, इस पर प्रभात खबर ने विभिन्न स्तरों पर पड़ताल की है. आरटीइ छह वर्ष के सफर में कहां तक सफल हुई है, इस पर भी पड़ताल की गयी है. बुधवार से प्रारंभिक शिक्षा की स्थिति आरटीइ को लेकर प्रभात खबर पाठकों के बीच शृंखला शुरू कर रहा है. आज पहली किस्त में ड्राप आउट बच्चों की पड़ताल करती यह रिपोर्ट.
नामांकन व ठहराव बनी है पहेली
शिक्षा विभाग के अनुसार, जिले के शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन विद्यालय में करा दिया गया है. विभाग के इस दावे की पुष्टि हालिया अनामांकित व ड्राप आउट बच्चों के कराये गये सर्वे रिपोर्ट ने भी की है. पर, जमीनी स्तर पर नामांकित बच्चे व विद्यालय में उनके ठहराव को लेकर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
हालांकि शिक्षा विभाग एक महीने तक लगातार विद्यालय नहीं जाने वाले बच्चों को ड्राप आउट की श्रेणी में मानता है. दूसरी तरफ विभाग के मध्याह्न भोजन योजना की रिपोर्ट, पिछले शैक्षणिक सत्र में 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति के आधार पर वितरण किये गये पोशाक व छात्रवृत्ति की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की उपस्थिति को देखें, तो औसतन 50 से 60 फीसदी बच्चे स्कूल आते हैं. 40 से 50 फीसदी अनियमित विद्यालय आने वाले बच्चों का विद्यालय में नियमित ठहराव एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. अब बच्चों के स्कूल में ठहराव को लेकर ठोस रणनीित बनानी होगी.
यूं तो आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में पिछले कुछ वर्षों तक बीच में पढ़ाई छोड़ने का मामला अधिक होता रहा है. हाल के कुछ वर्षों में बीच में पढ़ाई छोड़ने के मामले में कमी आयी है.
शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में चार-पांच माह पूर्व जिले में विद्यालय स्तर पर कराये गये सर्वे के अनुसार कई तथ्य सामने आये हैं. इसमें से कई तथ्य तो चौंकाने वाले भी हैं. सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा करें, तो पहले की तुलना में लड़कियां अब बीच में पढ़ाई लड़कों की तुलना में कम छोड़ती हैं. वहीं रिपोर्ट के अनुसार अनामांकित बच्चों में लड़कियों की संख्या कम है.
रिपोर्ट पर यकीन करें, तो जिले में 6-14 आयु वर्ग के कुल 3794 बच्चे अनामांकित व ड्राप आउट हैं. इसमें से 2027 बालक हैं, जबकि बालिकाओं की संख्या 1767 है. इसी तरह 11-14 आयु वर्ग के कुल अनांमाकित व ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या 2069 है. इनमें क्रमश: 1107 व 962 बालक तथा बालिकाएं हैं.
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