मार्वतपुर के कई गांव आज भी अंधेरे में

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इस पंचायत में बिजली, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा का घोर अभाव है, जिसके कारण हजारों की आबादी जिल्लत भरी जिंदगी जीने को विवश है आजमनगर : प्रखंड के मार्वतपुर पंचायत विकास की रोशनी से कोसों दूर है. यहां लोगों को चलने के लिए सड़क तक की बेहतर व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा बिजली, शुद्ध पेयजल, […]

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इस पंचायत में बिजली, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा का घोर अभाव है, जिसके कारण हजारों की आबादी जिल्लत भरी जिंदगी जीने को विवश है

आजमनगर : प्रखंड के मार्वतपुर पंचायत विकास की रोशनी से कोसों दूर है. यहां लोगों को चलने के लिए सड़क तक की बेहतर व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा बिजली, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा का घोर अभाव है. जिसके कारण हजारों की आबादी जिल्लत भरी जिंदगी जीने को विवश है. प्रभात खबर ने उक्त पंचायत विकास कार्यों का जायजा लिया और जानने का प्रयास किया कि लोगों को कितनी सुविधा मुहैया हो सकी है. पड़ताल में बात सामने आयी कि पंचायत में विकास का काम तो पंचायत स्तर पर हुआ है लेकिन कई समस्याएं अब भी मुंह बायें खड़ी है.
जिस ओर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है. प्रखंड के मार्वतपुर पंचायत की आबादी करीब दस हजार है. ये आंकड़े वर्ष 2011 में किये गये जनगणना का है. स्थानीय लोगों ने बताया इस पंचायत में आने के लिए एक भी मुख्यमंत्री सड़क नहीं है. जिसके कारण आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. एक उप स्वास्थ्य केंद्र है भी तो दशकों से यहां के लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है. राजीव गांधी विद्युतीकरण का कार्य भी अधूरा है. बगैर तार के खंभे लोगों को मुंह चिढ़ाता नजर आ रहा है. हालांकि गांवों में कई पीसीसी, ईंट सोलिंग तथा मिट्टी की सड़कें नजर आयी परंतु एक भी मुख्यमंत्री सड़क नहीं होने का दुख है. शुद्ध पेयजल की कोई मुकम्मल व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं करायी गयी है.
सिवाय दिलासा लोग आज भी अंधेरे में रह कर लौह एवं आर्सेनिक युक्त पानी का सेवन करते आ रहे हैं. लोगों ने कहा कि राज्य सरकार को पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य , बिजली, पानी, रोजगार की मुकम्मल व्यवस्था करनी चाहिए ताकि मजदूर वर्ग के लोगों का पलायन पर रोक लग सके.
कहते हैं लोग
पंचायत के वार्ड नंबर आठ के निवासी गणेश यादव ने बताया कि गांव में विद्युत खंभे तो गाड़े गये, परंतु उसमें अब-तक तार नहीं लगाये गया है. जिसके कारण बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. लोग अंधेेरे में रहने को विवश हो रहे हैं. विरेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार का सहयोग से मुखिया द्वारा कई सड़कों का निर्माण कराये जाने से आवागमन में कुछ हद तक सुविधाएं प्राप्त हुई है.फूल कुमार ऋषि ने कहा कि पांच वर्षों के अंतराल में पंचायत का विकास कार्य काफी हुआ है. बस एक दो मुख्यमंत्री सड़क मिल जाता तो आवागमन की समस्या दूर हो जाती. बालिस्टर ने कहा कि पंचायत में कुल 6 विद्यालय है. विद्यार्थियों की तादाद अच्छी है. बिजली के अभाव में ढिबरी के सहारे पठन-पाठन करते हैं. डिजेन शर्मा ने कहा कि मुखिया के द्वारा पंचायत के वार्डों में बेहतर विकास कार्य किया गया है.
कहते हैं मुखिया
मर्वतपुर पंचायत के मुखिया मो मुजम्मिल आलम ने बताया कि उनके कार्यकाल में 12 पीसीसी, 10-12 ईंट सोलिंग, दो दर्जन से भी ज्यादा मिट्टी की सड़कें, एक तालाब की खुदाई सहित घाट का निर्माण आदि विकास कार्य कराये गये हैं, परंतु कुछ लोगों ने बताया कि कुछ कार्य आज भी नहीं हुए हैं.
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