स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को नहीं मिल रही सुविधा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Dec 2019 9:22 AM (IST)
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कटिहार : गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सकें इसको लेकर सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. यहां तक की सालाना खर्च का आंकड़ा लिया जाय तो करोड़ों रुपये स्वास्थ्य मद में खर्च किये जा रहे हैं. इसके बावजूद भी मरीजों को अस्पताल में न ही सही उपचार मिल रहा है और न […]
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कटिहार : गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सकें इसको लेकर सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. यहां तक की सालाना खर्च का आंकड़ा लिया जाय तो करोड़ों रुपये स्वास्थ्य मद में खर्च किये जा रहे हैं.
इसके बावजूद भी मरीजों को अस्पताल में न ही सही उपचार मिल रहा है और न ही बीमारी में काम आने वाली पूरी पूरी दवाई मरीजों को मिल पा रही है. यह हाल जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक का है. जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भगवान भरोसे ही चल रहा है.
ऐसा इसलिए क्योंकि यहां चिकित्सकों की पूरी मनमानी चल रही है. सदर प्रखंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर समय से पहले ही अस्पताल बंद हो जाता है. स्वास्थ्य केंद्र का ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर के दो बजे तक चलने का है. लेकिन अस्पताल के बाबुओं की मनमानी कहें या कुछ और अस्पताल 12:00 बजे तक ही ओपीडी का संचालन होता है.
12:00 बजे के बाद यदि कोई मरीज पहुंचे तो उन्हें बैरंग घर वापस लौटना पड़ता है. क्योंकि यहां समय देखकर चिकित्सक निकल जाते हैं. ऐसे में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिलने की बात कहना मरीजों के लिए बेमानी होगी.
केंद्र पर चिकित्सकों का है घोर अभाव :
ऐसे तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर यहां सात चिकित्सकों की स्वीकृति पद है. लेकिन वर्तमान में दो चिकित्सक के भरोसे ही स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है. जिसमें की एक एमबीबीएस चिकित्सक डॉ एपी साह है, तो दूसरा आयुष चिकित्सक डॉ अनिल कुमार है. दोनों चिकित्सक पुरुष रहने से सबसे बड़ी परेशानी महिला मरीज को उठानी पड़ रही है. हालांकि महिला चिकित्सक में ममता कुमारी यहां पदस्थापित है.
लेकिन वह भी 14 नवंबर से छुट्टी पर है. ऐसे में महिला मरीज की परेशानी और बढ़ गई है और उनकी परेशानी पुरुष चिकित्सक ही सुन रहे है. उनका उपचार भी पुरूष चिकित्सक ही कर रहे है. ऐसे में कई महिला मरीजों को चिकित्सकों को अपनी अंदरूनी बीमारी बताने में संकोच महसूस होता है और वह बिना इलाज कराये ही घर को वापस लौट जाती हैं या सदर अस्पताल आने के लिए मजबूर होती हैं.
बाहर से भी दवाई खरीदने को मरीज मजबूर : जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भी दवाई के मामले में एक जैसा हाल है.
स्वास्थ्य केंद्र में 50 किस्म की दवाई में यहां 30 किस्म की दवाई ही मरीजों को मिल पा रही है. बड़ी संख्या में मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी अपना इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं. जहां चिकित्सक के लिखें दवाई में कुछ दवाई अस्पताल में मिलती है, तो कुछ बाहर खरीदारी करनी पड़ती है. ऐसे में गरीब मरीजों का अपने उपचार के लिए उनके पॉकेट पर भार पड़ता है.
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