पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद अधूरा पड़ा है भरसिया हाई स्कूल का भवन
Updated at : 02 May 2019 8:31 AM (IST)
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फलका : जिले के फलका प्रखंड के भरसिया गांव में कोढ़ा फलका सड़क मार्ग के समीप बना उत्क्रमित माध्यमिक उच्च विद्यालय निर्माण के पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद अर्ध निर्माण हो कर उधर में लटका है. जिससे बच्चों को पठन-पाठन में काफी कठनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसको लेकर विभाग और ठेकेदार […]
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फलका : जिले के फलका प्रखंड के भरसिया गांव में कोढ़ा फलका सड़क मार्ग के समीप बना उत्क्रमित माध्यमिक उच्च विद्यालय निर्माण के पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद अर्ध निर्माण हो कर उधर में लटका है. जिससे बच्चों को पठन-पाठन में काफी कठनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
इसको लेकर विभाग और ठेकेदार के खिलाफ ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. उच्च विद्यालय भरसिया का निर्माण 2015 को शुरू किया गया था, जो बीते पांच वर्षों में भी पूरा नहीं हो सका है. पूरे प्रखंड क्षेत्र के अन्य हाई स्कूलों का भवन जहां निर्मित भी है और पढ़ाई भी शुरू है. भरसिया में भवन का निर्माण नहीं होना समझ से परे है. जबकि नियमतः इस भवन को सरकारी निर्देशानुसार छह माह में हो जाना था.
परंतु आज वर्षों बीतने के बाद भी स्कूल भवन अधूरा है. ग्रामीण मतीन आलम, तफसील अहमद, अक़ीम आलम, अशिकुल आलम, मो आसिफ, विदुर ठाकुर, वीरन ठाकुर, जियाउल हक बताते हैं कि ठेकेदार के द्वारा समय पर मेटेरियल उपलब्ध नहीं कर रहे है न ही मजदूरों को समय पर मजदूरी मिल रही है. यही वजह है कि विद्यालय अर्ध निर्मित पड़ा है.
हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं को मध्य विद्यालय में पढ़ना पर रहा है. जहां भवन के अभाव में एक ही वर्ग में सभी वर्गों का पठन पाठन हो रहा है. इस स्कूल भवन के निर्माण को लेकर क्षेत्रीय विधायक सहित जिला पदाधिकारी को विद्यालय के प्रधानाध्यापक सोहेल अहमद के द्वारा कई बार लिखित आवेदन भी दिया गया है.
स्थानीय विधायक पूनम पासवान ने इस मामले को लेकर विधानसभा में भी आवाज उठाई है. इसके बावजूद भी कार्य प्रगति पर नहीं है. ग्रामीणों का आरोप है कि एक माह कार्य चलता है तो तीन माह बंद रहता है. मालूम हो कि हाई स्कूल की स्वीकृति वर्ष 2013 में ही भरसिया को मिल गयी थी.
तब से ही बच्चे यहां मैट्रिक का परीक्षा दे रहे हैं और अच्छे डिवीजन से पास भी कर रहे हैं. परंतु हाई स्कूल भवन नहीं रहने के कारण छात्र-छात्राएं माध्य विद्यालय के शिक्षकों से पढ़ने को मजबूर हैं. ग्रामीण बताते हैं कि एक मंजिल इमारत का काम पूरा हुआ है. वह भी इतना घटिया है कि भवन कभी भी धरासायी हो सकता है.
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