रुक-रुक कर हो रही बारिश ने बिगाड़ी शहर की सूरत, रोड पर जलजमाव से त्रस्त हैं लोग

Updated at : 07 Aug 2018 6:17 AM (IST)
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रुक-रुक कर हो रही बारिश ने बिगाड़ी शहर की सूरत, रोड पर जलजमाव से त्रस्त हैं लोग

कटिहार : रुक रुक कर हो रही बारिश में शहर में नारकीय स्थिति पैदा कर दी है. शहर के कई प्रमुख पथों व मोहल्ला में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी गया. सोमवार को बारिश ने शहर की सूरत और बिगाड़ दी है. साथ ही नगर निगम प्रशासन की पोल खोल दी है. ऐसा नहीं […]

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कटिहार : रुक रुक कर हो रही बारिश में शहर में नारकीय स्थिति पैदा कर दी है. शहर के कई प्रमुख पथों व मोहल्ला में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी गया. सोमवार को बारिश ने शहर की सूरत और बिगाड़ दी है. साथ ही नगर निगम प्रशासन की पोल खोल दी है. ऐसा नहीं है कि रहनुमाओं को यह पता नहीं है. केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक सहित राज्य के वरीय अधिकारी व जिला स्तर के अधिकारी शहर में समय समय पर आते-जाते रहे हो तथा विभिन्न गतिविधियों में शामिल भी होते रहे हो. पर शहर के सड़कों पर कोई सुधार नहीं हो रहा है. एक दो सड़क को छोड़ दें तो ज्यादातर शहर के सड़क की गिट्टी उखड़ने लगी है.

कई सड़क तो हमेशा जलजमाव से जूझता है. दूसरी तरफ शहर से सटे मोहल्लों के सड़कों की स्थिति और भी बदतर है. जबकि नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार शहर को चमकाने के बाद समय-समय पर करते रहे है. उसके बावजूद कटिहार शहर की स्थिति सड़कों के मामले में खुद सब कुछ बंया कर रही है. अभी हाल ही में केंद्र सरकार के एक सर्वेक्षण के आधार पर स्वच्छता के मामले में कटिहार शहर को बिहार का नंबर वन माना है. हालांकि यह बात शहरवासियों के गले नहीं उतर रही है.

दूसरी तरफ शहर में कई ऐसे सड़क है जो जल जमाव के साथ साथ जर्जरता का दंश झेल रहा है. ऐसा नहीं है कि नगर निगम प्रशासन के पास बजट नहीं है. हर साल नगर निगम बजट तैयार करती है. यह बजट करोड़ों का होता है. जिसमें सड़कों के जीर्णोद्धार और उसे चमकाने की योजना भी रहती है. केंद्र व राज्य सरकार भी शहर को साफ सुथरा और चमकाने के उद्देश्य अच्छी खासी राशि नगर निगम को मुहैया कराती है. उसके बावजूद इस स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रही है. फलस्वरुप शहरवासी के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रों से शहर आने वाले लोगों को भी जर्जर व जल जमाव वाले सड़कों से गुजरना पड़ता है.

न्यू मार्केट रोड व अनाथालय रोड की स्थिति भी नारकीय
बारिश से कई सड़क तो नरक में तब्दील हो गयी है. शहर के बाटा चौक से दुर्गास्थान चौक तक जाने वाली सड़क को डॉ राजेंद्र प्रसाद पथ कहा जाता है. आमतौर पर इसे न्यू मार्केट रोड व हरदयाल रोड भी कहते है. इस रोड की स्थिति काफी बदतर है. खासकर न्यू मार्केट मंडी से लेकर पुराना बाटा चौक तक सड़क पर जलजमाव हमेशा रहता है. बारिश में यहां की स्थिति पूरी तरह नारकीय हो चुकी है. यहां की सड़क करीब-करीब गड्ढे में तब्दील हो चुका है. हालांकि इस रोड पर ही सब्जी की दुकान सजी रहती है.
वाहनों की आवाजाही में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बीच सड़क पर वाहनों को भी खड़ी कर दिया जाता है. साफ-सफाई की तो बात ही अलग है. कचरा का अंबार लगा रहता है. दूसरी तरफ इसी सड़क से एक सड़क दुर्गा स्थान चौक से पहले अनाथालय रोड की ओर चले जाती है. अनाथालय रोड की स्थिति भी काफी दयनीय है. जर्जर अवस्था में होने की वजह से इस रोड तक दम निकल जाता है.
नगर निगम के आसपास के रोड की स्थिति भी बदतर
नगर निगम कार्यालय के कुछ दूरी पर अमला टोला की एक सड़क है. न्यू मार्केट रोड से इस सड़क का लिंक है. जबकि दूसरी तरफ यह रोड में एमजी रोड जाकर मिलती है. न्यू मार्केट से सटे इस सड़क की स्थिति काफी दयनीय है. यहां हमेशा ही जल जमाव से नारकीय स्थिति रहती है. इसी तरह पुराना बाटा चौक के पास की सड़क की स्थिति भी काफी जर्जर है. यहां के बारे में बताया जाता है कि रेलवे ने अपने क्षेत्र अंतर्गत सड़क को चकाचक कर दिया है और नगर निगम के दायरे में आने वाले सड़क की स्थिति बदतर है. इसी तरह शहर के कई अन्य सड़कों की स्थिति भी काफी देनी है. बाटा चौक से रेलवे स्टेशन तक जाने वाली सड़क जर्जर स्थिति में है. बारिश से सड़क कीचड़ में तब्दील हो गयी है. पैदल चलने वालों काफी परेशानी उठानी पड़ती है. जबकि कटिहार जंक्शन जाने के लिए यह मुख्य पथ माना जाता है.
बेगना व रामपाड़ा जाने वाली सड़क पर हैं दर्जनों गड्ढे
बानगी के तौर पर देखे तो शहर के राम रहीम चौक से गांधीनगर सट हुए बेगना नहर तक सड़क जाती है. यह सड़क पूरी तरह जर्जर है. खासकर गांधीनगर के पास से बेगना तक तो सड़क गड्ढे में तब्दील हो चुकी है. छठ पूजा के पहले ईंट बड़े बड़े के टुकड़ों को बिछा दिया था. वाहनों के अलावा आमलोग भी उस समय दुर्गा स्थान होकर आने जाने लगे थे. छठ पूजा के समय बिछाये गये ईट के टुकड़ों पर मिट्टी डाल दिया गया. पर आज तक उस पर रोलर नहीं चलाया गया.
लोग हिचकोले खाते हुए यहां से गुजरते है. साल में करीब छह महीने से अधिक समय यहां जलजमाव रहता है. फलस्वरुप लोग दूसरा रोड पकड़ कर लंबी दूरी तय कर शहर में प्रवेश करते है स्थानीय शहरवासियों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है. उल्लेखनीय है कि उक्त दोनों सड़क में से पहली सड़क बारसोई, कदवा, डंडखोरा प्रखंड के लोगों के लिए आने जाने का एक सड़क है. जबकि दूसरा सड़क से कटिहार ग्रामीण इलाके के लोग शहर आते जाते है.
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