कपड़ा, बर्तन व घर बनाने के लिए मिलेगी राशि

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Aug 2017 3:25 AM

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जायजा. जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक राहत शिविर का होता रहेगा संचालन : मुख्यमंत्री राहत कैंप के िनरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को धैर्य रखने की बात कही, साथ ही कहा कि बाढ़ पीड़ितों को सरकार हरसंभव सहायता करेगी इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है. कटिहार : बाढ़ से कटिहार […]

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जायजा. जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक राहत शिविर का होता रहेगा संचालन : मुख्यमंत्री

राहत कैंप के िनरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को धैर्य रखने की बात कही, साथ ही कहा कि बाढ़ पीड़ितों को सरकार हरसंभव सहायता करेगी इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है.
कटिहार : बाढ़ से कटिहार सहित कोसी के इलाके में काफी क्षति हुई है. भयावह बाढ़ से बड़े पैमाने पर घर बह गये, सड़क, पुल-पुलिया, फसल का काफी नुकसान हुआ है. इसका आकलन सरकार करा रही है. सभी बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा दिया जायेगा. किसी को घबराने की जरूरत नहीं है. जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है तब तक राहत शिविर का संचालन होता रहेगा. उक्त बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को जिले के कदवा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय चांदपुर में बाढ़ पीड़ितों को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि महानंदा नदी ने कटिहार सहित अररिया, किशनगंज में भारी तबाही मचायी है.
इससे निबटने में सरकार को काफी परिश्रम करना होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 अगस्त को ही मुझे पता चला कि नेपाल में भारी बारिश हुई है. बिहार में भी पूरे मानसून की आधी बारिश हुई थी. ऐसे में मुझे अंदाजा लग गया कि पानी का सैलाब राज्य के कई जिलों में आयेगी. इसकी भनक लगते ही हमने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह के साथ 14 अगस्त को अरिरया,
किशनगंज का क्षेत्र सहित कटिहार के इलाके का गहन हवाई सर्वेक्षण किया. लौटने के क्रम में कोसी इलाके के सुपौल, सहरसा का भी हवाई सर्वेक्षण किया. इस दौरान हमने देखा कि पानी का सैलाब चारों ओर फैल गया है. एक भी सड़क ऐसी नहीं थी जहां पानी का बहाव नहीं हो रहा था. फसलें डूब गयी थी. पानी का तेज बहाव नये इलाकों में प्रवेश कर रहा था.
यहां से हवाई सर्वेक्षण से लौटने के बाद तुरंत पटना में आपदा विभाग सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की ओर तुरंत राहत व्यवस्था बाढ़ पीड़ितों को पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही एनडीआरएफ, सेना के जवानों सहित अन्य को इन इलाकों में भेजा और युद्ध स्तर पर बाढ़ में फंसे पीड़ितों को पानी से बाहर निकालने व मदद तेजी से प्रारंभ हुआ. मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि बाढ़ के इस आपदा में सभी राजनीतिक दलों भरपूर सहयोग आमलोगों को मिला है.
बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है. ऐसा लगता है अचानक बाढ़ आयी और चारों ओर तबाही मचाकर चली गयी. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में कृषि मंत्री थे. बाढ़ की विभिषिका का अनुभव है मुझे. हम उस वक्त क्षेत्र में बाढ़ का जायजा लेने जाते थे. बाढ़ से हुई तबाही व बरबादी का सरकार आकलन कर रही है. बड़े पैमाने पर घर बह गये हैं. सड़क, पुल-पुलिया बह गये हैं. इससे कई स्थानों में आवागमन बाधित है. उसे दुरूस्त करने की दिशा में तेजी से काम होगा.
एक मुट्ठी चावल भी नैय मिलल छै
सीएम अपना भाषण समाप्त करने के बाद जब सुरक्षा घेरा को तोड़कर सामने लोगों से बातचीत करने पहुंचे तो लोग राहत नहीं मिलने की शिकायत करने लगे. बाढ़ से पीड़ित एक वृद्ध महिला पोलो देवी गुस्सा होकर सीएम से कहने लगी कि अबतक उन्हें एक मुट्ठी चावल भी नैय मिलल छै. राहत सामग्री नहीं मिलने को लेकर लोगों का बढ़ता गुस्सा देख नीतीश अन्य लोगों से बात किये बगैर वापस लौट गये.
कार्यक्रम के दौरान महिला हो गयी बेहोश
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान एक महिला बेहोश हो गयी. प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो महिला को बिजली का करंट लग गया, जिसकी वजह से वह बेहोश हो गयी है. सीएम को जानकारी मिली तो वह महिला को देखने पहुंच गये. एंबुलेंस में महिला को देखने के बाद सीएम ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया. बेहोश महिला कमली देवी को स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है.
जल निकासी पर करना होगा काम, तब लगेगा तबाही पर लगाम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बरसात के मौसम में हर साल तबाही मचाने बाढ़ आती है. जल निकासी की वयवस्था नहीं होने के कारण बाढ़ से लाखों करोड़ का नुकसान प्रत्येक वर्ष होता है. यदि जल निकासी की बेहतर व्यवस्था हो तो बाढ़ से इतनी तबाही नहीं होगी. उन्होंने कहा कि नेपाल से हर वर्ष काफी जल का निस्तारण होता है. उसकी निकासी की व्यवस्था के लिए आपदा प्रबंधन व अभियंता की टीम से अध्ययन करने के लिए कहा गया है कि कैसे पानी की निकासी बेहतर ढंग से सूबे में हो.
जिससे बाढ़ से बचा जा सकें. उन्होंने कहा इस पर काम करने के लिए केंद्र सरकार से भी मदद ली जायेगी. तभी बाढ़ से मुक्ति मिल सकती है. राज्य में गंगा, महानंदा, कोसी सहित अन्य नदियों से तबाही इसलिए मचती है कि पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था नहीं है. नदियों में गाद पूरी तरह से भर गया है. महानंदा नदी के बाढ़ से सड़क, पुल-पुलिया को व्याप्क नुकसान पहुंचा है. जल्द से जल्द मुख्य सड़कों को चलने योग्य बनाया जाये. जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिलेगी.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाढ़ में बड़े पैमाने पर घर बह गये, गिर गये, क्षतिग्रस्त हो गये हैं. सभी को घर बनाने के लिए राशि दी जायेगी. उन्होंने कहा कि घर गिरने से कपड़ा, बर्तन, आनाज, राशन, घर का अन्य समान सब कुछ बाढ़ पीड़ितों का बरबाद हो गया है. इसके लिए भी सरकार सभी पीड़ितों को राशि मुहैया करायेगी. ताकि पे घर का सारा समान खरीदकर अपना जीवन बेहतर ढंग से जी सकें. इसकी घोषणा होते ही बाढ़ पीड़ितों ने जमकर ताली बजाकर स्वागत किया.
इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री कुमार ने कहा कि जितने भी किसानों का बाढ़ से एक तिहायी से ज्यादा फसल बरबाद हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जायेगा. इसके लिए स्थानीय स्तर पर जल्द ही सभी बाढ़ पीड़ितों ईमानदारी पूर्वक सर्वेक्षण कराया जायेगा. इसमें किसी तरह की गड़बड़ी अधिकारी व कर्मचारी के करने पर खैर नहीं होगी. यह काम जल्द ही शुरू कराया जायेगा.
सड़क व पुल-पुलिया का शीघ्र पूरा होगा निर्माण : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बाढ़ ने भीषण तबाही मचायी है. महानंदा नदी के बाढ़ से सड़क, पुल-पुलिया को व्याप्क नुकसान पहुंचा है. हमारी प्राथमिकता है कि जल्द से जल्द मुख्य सड़कों को चलने योग्य बनाया जाये. जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में राहत सामग्री पहुंचाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि जल्द ही टूटे सड़कों व पुल-पुलिया का निर्माण कार्य शुरू कराया जायेगा.
बांध पर बात नहीं करने पर लोगों में गुस्सा
महानंदा का बांध टूटने से जिले के कदवा, बारसोई, बलरामपुर, आजमनगर, डंडखोरा, हसनगंज सहित अन्य प्रखंडों में व्यापक क्षति हुई है. पांच स्थानों पर पानी के भारी दबाव के कारण बांध टूट गया था. लोग उम्मीद लगाये बैठे थे कि बांध पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुछ बोलेंगे, लेकिन उन्होंने इतने बड़े मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोला. जिससे लोगों में गुस्सा दिखा. लोगों का कहना है कि बांध होना ही नहीं चाहिए. टूटे बांध बनाने का इस बार स्थानीय लोग विरोध करने का मन बना चुके हैं.
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