चौथी मंजिल पर तड़पती रही मरीज, देखने नहीं गये डॉक्टर

kaimur news. सदर अस्पताल में चौथी मंजिल पर भर्ती मरीज को देखने के लिए डॉक्टर के नहीं जाने के कारण मौत का मामला सामने आया है. जिस महिला की मौत हुई है.
भभुआ कार्यालय. एक बार फिर भभुआ के सदर अस्पताल में चौथी मंजिल पर भर्ती मरीज को देखने के लिए डॉक्टर के नहीं जाने के कारण मौत का मामला सामने आया है. जिस महिला की मौत हुई है, वह चैनपुर थाना क्षेत्र के ब्यूर गांव की रहने वाली नुरैन खान की पत्नी नसरीन खातून थी. नसरीन खातून (30) को शुक्रवार की शाम लगभग 6:30 बजे भभुआ सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया. ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक विनय तिवारी द्वारा शुरुआती उपचार कर मरीज की हालत सामान्य बताते हुए चौथी मंजिल पर स्थित वार्ड में भेज दिया गया. वहां मरीज की हालत और बिगड़ती चली गयी. मरीज के परिजन वार्ड की नर्स से लेकर इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक तक से मरीज को देख लेने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ. इससे मरीज बेड पर तड़पती रही और आखिर रात लगभग 9:00 बजे मरीज की मौत हो गयी. इसके बाद आक्रोशित परिजनों द्वारा सदर अस्पताल में मरीज की मौत के लिए इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ विनय तिवारी पर लापरवाही और इलाज नहीं करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया गया.
परिजनों ने डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग को लेकर किया जमकर हंगामा
महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने सदर अस्पताल में जमकर हंगामा किया. स्थिति इतनी बिगड़ गयी कि मौके पर स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को बुलानी पड़ गयी. यहां तक कि सदर अस्पताल में हंगामा को बढ़ता देख डीएम के द्वारा तत्काल मौके पर एसडीएम विजय कुमार को भेजा गया. परिजन लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि अगर चिकित्सक के द्वारा मरीज का गंभीरता से इलाज किया जाता और चौथी मंजिल पर वार्ड में जाकर मरीज को देख लिया जाता, तो शायद वह मरी नहीं होती. अगर उसकी स्थिति गंभीर हो रही थी और जब उसे डॉक्टर देख लेते और रेफर कर देते, तो वह जिंदा होती. लेकिन, नर्स से लेकर चिकित्सक तक कोई भी उसे देखने के लिए नहीं गया. इसके कारण उसकी मौत हो गयी. इसके लिए पूर्णरूप से इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक दोषी हैं.परिजनों का कहना था कि मरीज की लगातार स्थिति बिगड़ रही थी. वह बेड पर चिल्ला रही थी, लेकिन नर्स ने नीचे आकर डॉक्टर को बताने की जरूरत नहीं समझी. वहीं, कहने के बाद भी चिकित्सक कुछ सुनने को तैयार नहीं थे. जब मरीज की मौत हो गयी, तब यह बता रहे हैं कि मरीज की स्थिति गंभीर थी. अगर मरीज की स्थिति गंभीर थी, तो उसे इमरजेंसी से वार्ड में चौथी मंजिल पर क्यों भेजा गया. जब हम लोग चिकित्सक को बार-बार यह बता रहे थे कि मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ रही है, तो चिकित्सक ने चौथी मंजिल पर जाकर वार्ड में मरीज को क्यों नहीं देखा. मरीज के परिजन इमरजेंसी में डॉक्टर के चैंबर में लगातार एसडीएम भभुआ थाने की पुलिस अस्पताल के उपाधीक्षक के सामने चिकित्सक पर लापरवाही और जानबूझकर इलाज नहीं करने के कारण मौत का आरोप लगा रहे थे. हंगामे के दौरान कई बार ऐसी भी स्थिति उत्पन्न हुई कि आक्रोशित परिजन चिकित्सक के साथ मारपीट के लिए उतारू हो जा रहे थे.
काफी समझाने के बाद शव को परिजन ले गये अपने साथ
मरीज की मौत के बाद लगभग दो घंटे तक सदर अस्पताल में परिजनों द्वारा हंगामा किया गया. इस दौरान पुलिस से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर विनोद कुमार, डीपीएम ऋषिकेश जायसवाल, भभुआ थानेदार मुकेश कुमार सहित कई लोग वहां पहुंचे और परिजनों को आश्वस्त किया कि जो लोग भी दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई की जायेगी. इसके बाद आक्रोशित परिजन किसी तरह शांत हुए और शव को अपने साथ गांव ले गये
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन चंदेश्वरी रजक ने बताया कि मरीज की मौत के मामले में परिजनों द्वारा जिन चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है या फिर इलाज की समस्या को लेकर जो भी बातें सामने आयी हैं, उन सभी विषयों को मेरे द्वारा स्वयं देखा जा रहा है. अगर इस मामले में कोई दोषी पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई के साथ-साथ चिकित्सा व्यवस्था में जो भी सुधार की जरूरत होगी, उसे किया जायेगा.
पहले भी हो चुकी है मौत
सदर अस्पताल में चौथी मंजिल पर इलाज के लिए डॉक्टर के नहीं जाने के कारण यह कोई पहली घटना नहीं हुई है. इससे पहले भी मरीज के परिजनों द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि जब मरीज को चौथी मंजिल पर वार्ड में भेज दिया जाता है, तो वहां पर कोई भी चिकित्सक उन्हें देखने के लिए नहीं जाता. मरीज बेड पर तड़पता रहता है. वार्ड में तैनात नर्स ग्राउंड फ्लोर पर डॉक्टर के पास जाने को तैयार नहीं होती और डॉक्टर ग्राउंड फ्लोर से चौथी मंजिल पर मरीज को देखने के लिए तैयार नहीं होता. इस बीच मरीज तड़पता रहता है और कई बार उसकी जान चली जाती है. आलम यह है कि मरीज के परिजन चौथी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर पर दौड़ लगाते हैं और मरीज की स्थिति डॉक्टर को बताते हैं और परिजनों के बताये मुताबिक डॉक्टर दवा लिखते हैं. परिजन ही दौड़कर दवा पहुंचाते हैं, तब नर्स द्वारा दवा दी जाती है. इससे पहले भदरी गांव के उदित पांडेय के 27 वर्षीय पुत्र की इसी तरह से डॉक्टर के द्वारा इलाज के लिए चौथी मंजिल पर नहीं जाने के कारण बेड पर तड़पकर हो मौत हो गयी थी.
ग्राउंड फ्लोर पर बाबू और साहब, चौथे फ्लोर पर मरीज
सदर अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर जगह नहीं होने का हवाला देकर मरीज का वार्ड चौथा फ्लोर पर बनाया गया है, जबकि चौथे फ्लोर पर जाने के लिए कोई लिफ्ट की व्यवस्था नहीं है. मरीज को सीढ़ी से ही चौथी मंजिल पर जाना होगा, जबकि चौंकाने वाली बात यह है कि सदर अस्पताल के जितने भी बाबू एवं कमी हैं, वे सभी ग्राउंड फ्लोर पर ही रहते हैं. उनके लिए ग्राउंड फ्लोर पर जगह है, लेकिन मरीजों को ग्राउंड फ्लोर पर रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. सदर अस्पताल प्रशासन के अधिकारी या कर्मी ऊपर के फ्लोर पर जा सकते हैं, लेकिन मरीज की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बना सदर अस्पताल अधिकारी एवं कर्मी की सुविधा का ख्याल रख रहा है. मरीज को चौथी मंजिल पर वार्ड में भेज दिया जा रहा है, जहां पर कोई चिकित्सक देखने जाने के लिए तैयार नहीं है. मरीज के परिजन अपने मरीज की स्थिति को बताने के लिए या दवा चिकित्सक से लिखवाने के लिए बार-बार चौथी मंजिल से दौड़कर नीचे आते हैं और फिर चिकित्सक से दवा लिखवा कर उसे लेकर चौथी मंजिल पर जाते हैं. परिजनों का दौड़ते दौड़ते बुरा हाल हो जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह समस्या दिखाई नहीं दे रही है. सबसे बड़ी बात है कि चौथी मंजिल पर वार्ड होने के कारण मरीज को देखने के लिए चिकित्सक के नहीं जाने से बैक टू बैक मरीजों की जान जा रही है. लेकिन, इस पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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