लोकसभा चुनाव में तीन वर्षों से बंद रामगढ़ रेलवे आरक्षण काउंटर का छाया रहेगा मुद्दा

बक्सर लोकसभा चुनाव के इस महासमर में मैदान में कूदने वाले प्रत्याशियों से लेकर मतदाताओं के बीच पिछले तीन वर्षों से रामगढ़ में बंद पड़े रेलवे आरक्षण काउंटर का मुद्दा सबसे प्रमुखता से छाया रहेगा.
रामगढ़. बक्सर लोकसभा चुनाव के इस महासमर में मैदान में कूदने वाले प्रत्याशियों से लेकर मतदाताओं के बीच पिछले तीन वर्षों से रामगढ़ में बंद पड़े रेलवे आरक्षण काउंटर का मुद्दा सबसे प्रमुखता से छाया रहेगा. जनसंपर्क के दौरान क्षेत्र के लोगों को सभी समस्याओं से निजात दिलाने का दम भरकर लोकसभा के मंदिर पहुंचे वाले सांसद को जनता को जवाब देने होंगे कि आखिर किन कारणों से तीन वर्षों से रेलवे आरक्षण काउंटर बंद पड़ा है. आरक्षित टिकट के लिए आज भी रामगढ़ व नुआंव प्रखंड की 23 पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण प्रतिदिन आरक्षित टिकट के लिए 30 से 35 किलोमीटर दूरी तय कर मोहनिया व बक्सर के टिकट काउंटर पर जाकर टिकट ले रहे हैं. केंद्रों पर देर से पहुंचने पर यात्रियों को तत्काल टिकट मिलने से वंचित होना पड़ रहा है. ऐसे में यात्री साइबर कैफे व टिकट केंद्र के दलालों से एक हजार से 15 सौ रुपये अधिक दे टिकट लेकर यात्रा करने को मजबूर है. उक्त ज्वलंत समस्या को लेकर ना तो रेलवे विभाग के पदाधिकारी संवेदनशील हैं, ना ही जनप्रतिनिधि द्वारा विभाग से कभी सवाल किया गया. ऐसे में तीन वर्षो से आरक्षित टिकट मिलने से वंचित ग्रामीणों के तीखे सवालों का भी प्रत्याशियों को सामना करना पड़ेगा. दरअसल, कांग्रेस की सरकार में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद के कार्यकाल में रामगढ़ रेफरल अस्पताल से सटे रेलवे आरक्षण काउंटर का उद्घाटन पूर्व बक्सर सांसद जगदानंद सिंह व लालू प्रसाद द्वारा किया गया था. रेलवे का टिकट काउंटर खुल जाने से ग्रामीणों के बीच हर्ष की लहर थी, जहां तीन वर्ष पहले तक ग्रामीणों को टिकट काउंटर से आसानी से टिकट मिल जाते थे, किंतु कर्मियों द्वारा जर्जर भवन में काम करने के दौरान हादसे का हवाला देने के आवेदन पर पहले विभाग द्वारा काउंटर को बंद कर दिया गया, जो अभी तक बंद पड़ा है. हालांकि, दो वर्ष पूर्व डीएम के आदेश पर काउंटर के सभी सामान को करोड़ों रुपये की लागत से बने औद्योगिक भवन के एक कमरे में शिफ्ट कराते हुए सारी सुविधाएं दुरुस्त करा दी गयी थी, जिससे एक बार फिर लोगों में आस जागी की काउंटर जल्द ही खुल जायेगा, किंतु तीन वर्ष बीतने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी है. जबकि, जिले में खोले गये भभुआ रेलवे आरक्षण केंद्र पर आज भी टिकट मिल रहे हैं. बहरहाल लोकसभा के इस महासमर में जनसंपर्क के दौरान नेताओं के बीच तीन वर्षों से बंद पड़े रेलवे आरक्षण काउंटर बंद का मुद्दा छाया रहेगा.
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