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भीषण गर्मी से बीमार हो रहे लोग, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

Updated at : 03 Jun 2024 9:05 PM (IST)
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भीषण गर्मी से बीमार हो रहे लोग, अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

बीते कई दिनों से जिले में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है. अब गर्मी के चलते लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है और आमजन में गर्मी को लेकर अकुलाहट हैं

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भभुआ सदर. बीते कई दिनों से जिले में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है. अब गर्मी के चलते लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है और आमजन में गर्मी को लेकर अकुलाहट हैं. पशु-पक्षी बेहाल हैं. इधर, जिले में लगातार बढ़ते तापमान की वजह से सामान्य जनजीवन पर इसका व्यापक असर पड़ने लगा है. अस्पतालों में हीट स्ट्रोक व गर्मी जनित रोगियों की ओपीडी व इमरजेंसी में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है. पहले सामान्यत: पांच से सात मरीज आ रहे थे. लेकिन, अब प्रतिदिन गर्मी जनित मरीजों की संख्या 100 को पार कर रही है. सर्वाधिक मरीज अभी हीट स्ट्रोक व डायरिया के आ रहे हैं. अब इस समय फिजिशियन चिकित्सक के पास सर्वाधिक ओपीडी है, जो कि 200 के आसपास चल रही है. इसमें अधिक तेज धूप के शिकार होने अथवा लू लगने के आ रहे हैं. हालांकि, इनमें 5-10 मरीज सीवियर स्ट्रोक पीड़ित होते हैं, जिनको एडमिट करना पड़ता है. चिकित्सीय जानकारी के अनुसार, किसी भी स्थान का तापमान जब वहां के सामान्य तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस से 6.4 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो जाता है. इस दौरान चलने वाली गर्म हवाओं को हीट वेव की श्रेणी में रखा जाता है. जब तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो और उस दौरान हवा चलती है, तो उसको सीवियर हीट वेव की श्रेणी में रखा जाता है. इन दोनों ही परिस्थितियों का स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है. सदर अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार इस भीषण गर्मी व धूप में बाहर निकलने वाले लोग हीट स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं. बच्चों में डायरिया की शिकायत बढ़ गयी है. अस्पतालों में भर्ती ज्यादातर लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार से पीड़ित हैं. जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 70 से 75 मरीज बुखार, उल्टी-दस्त व डायरिया के आ रहे हैं, जिसमें से 50 से अधिक प्रतिशत को भर्ती करना पड़ता है. यही हाल शहर स्थित निजी क्लिनिकों का भी है और यहां भी मरीजों की संख्या बढ़ी है. डॉक्टर डॉ विनय तिवारी ने बताया कि ज्यादातर मरीजों को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत आ रही है. बुखार के मरीज भी बढ़ गये हैं. उल्टी-दस्त वाले मरीज भी आ रहे हैं. ग्लूकोज चढ़ाने और अन्य इलाज की जरूरत महसूस हो रही है. =तीखी धूप, गर्म हवा व उमस के लोग बन रहे शिकार डाॅ विनय तिवारी के अनुसार, तीखी धूप, गर्म हवा व उमस के चलते बीमारी बढ़ रही है. इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि तेज धूप में घर से न निकलें. यदि निकलना जरूरी ही है तो शरीर ढंक कर रखें. सिर को भी ढंकें. बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें, क्योंकि तीखी धूप बच्चों के सेहत पर प्रभाव डालती है. कहा कि लू व धूप से बीमार होने पर यदि बुखार आ जाये तो शरीर को ठंडे पानी से खूब पोंछे, ओआरएस घोल लें. यदि यह न हो तो चुटकी भर नमक व चीनी का घोल बनाकर पीएं. संभव हो तो पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद प्रयोग करें. क्योंकि, गर्मी में जब जल स्तर घटता है तो पानी में संक्रमण बढ़ जाती है. ऐसे में स्वच्छ पानी का प्रयोग पीने के लिए करें. =43 डिग्री पहुंचा तापमान, दोपहर में सूनी रह रहीं सड़कें कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार जिले का पारा पुनः 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है. उमस भरी गर्मी के चलते शहर सहित जिले में लोग बेहाल नजर आ रहे हैं. न्यूनतम तापमान के भी 31 डिग्री पर पहुंचने से लोग अपने घरों में भी पसीने से तर नजर आये. तेज धूप के चलते दोपहर में शहर की सड़कें सूनी पड़ी रहीं. सीजन में एक बार भी बारिश न होने से पिछले एक सप्ताह से गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. अधिकतम और न्यूनतम तापमान लगातार बढ़ रहा है. दोपहर में गर्मी इतनी अधिक हो जा रही है कि लोगों की घर से निकलने की हिम्मत नहीं हो रही. इसके कारण अधिकतम तापमान अभी कुछ दिन 40 से 42 डिग्री के बीच बने रहने की संभावना है और उमस भरी गर्मी से निजात मिलने की संभावना नहीं है. =नींद पूरी न होने पर व्यक्ति हो सकता है चिड़चिड़ा डॉक्टरों के अनुसार, मानसिक और शारीरिक बीमारियों का मौसम पर काफी अधिक असर पड़ता है. इस मौसम में डिप्रेशन के मरीज 20 से 30 बढ़ जाते हैं. इसके कारण में उमस भरी गर्मी होने से लोगों की नींद पूरी नहीं हो रही है. इसके कारण उनमें चिड़चिड़ापन और बेचैनी बढ़ रही है, जिससे डिप्रेशन के मरीज को पुन: बीमारी होने के साथ अन्य मानसिक बीमारियां होने की संभावना और अधिक बढ़ जाते हैं. सामान्य लोगों को नींद पूरी न होने से सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर हो जाते हैं. सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर होने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है और छोटी-छोटी बात पर गुस्सा होने लगता है. =हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए की गयी है व्यवस्था सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ विनोद कुमार ने बताया कि हीट स्ट्रोक मरीजों के इलाज के लिए 20 बेड का स्पेशल वार्ड बनाया गया है, जहां डॉक्टरों के साथ मेडिकल टीम व दवाओं की व्यवस्था उपलब्ध करायी गयी है.

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