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विद्यालयों में मध्याह्न भोजऩ बंद रहने से भूखे पेट ककहरा रट रहे छात्र- छात्राएं

Updated at : 17 May 2025 5:34 PM (IST)
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विद्यालयों में मध्याह्न भोजऩ बंद रहने से भूखे पेट ककहरा रट रहे छात्र- छात्राएं

सरकार की प्राइम प्रोजेक्ट बच्चों को दोपहर में मिलने वाला भोजन कमोबेश जिले के दर्जनों विद्यालय में आये दिन बंद रहता है, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे.

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भभुआ नगर…. सरकार की प्राइम प्रोजेक्ट बच्चों को दोपहर में मिलने वाला भोजन कमोबेश जिले के दर्जनों विद्यालय में आये दिन बंद रहता है, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे. जबकि, विभाग ने भी इसे लेकर सख्त आदेश दिया है कि किसी भी हाल में बच्चों को दोपहर का मिलने वाला मध्याह्न भोजन बंद नहीं होना चाहिए. इतना ही नहीं सरकार का यह प्राइम प्रोजेक्ट प्रभावित न हो इसके लिए जिला पदाधिकारी को भी मध्याह्न भोजन की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गयी है. इसके बावजूद जिले के कई विद्यालयों में विभिन्न समस्याओं के कारण मध्याह्न भोजन बंद रह रहा है. उदाहरण स्वरूप ताजा मामला यह है कि जलस्तर खिसकने के कारण जिले के तीन विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना बंद है. वहीं, आधा दर्जन से अधिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा किसी तरह मुश्किल से पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कर मध्याह्न भोजन संचालित किया जा रहा है. यानी जिले के तीन विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना बंद रहने के कारण छात्र-छात्राएं भूखे पेट ककहरा रट रहे हैं. हालांकि विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद ना हो व चापाकल की समय पर मरम्मत हो जाये इसके लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक सहित जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा भी कई बार पीएचइडी को पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है. साथ ही टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत की गयी, लेकिन अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मामले का निराकरण नहीं होने के कारण विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को मध्याह्न भोजन के साथ प्यास बुझाने के लिए भी भटकना पड़ रहा है. जिले के तीन विद्यालयों में विगत 15 दिन से अधिक दिनों से मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित है. मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित होने से लगातार प्रधानाध्यापक द्वारा पत्र के माध्यम से या दूरभाष के माध्यम से पीएचइडी के अधिकारियों को जानकारी भी दी गयी, इसके बावजूद अधिकारी इस गंभीर मुद्दे को लेकर संज्ञान नहीं ले रहे हैं. इसके साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी भी पीएचइडी के अधिकारियों को जलस्तर खिसकने व चापाकल की मरम्मत के लिए लगातार पत्र दे रहे हैं, इसके बावजूद समय से चापाकल की मरम्मत नहीं होने के कारण मध्याह्न भोजन तो दूर बच्चों को पीने के पानी के लिए भी इस भीषण गर्मी में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. इससे पानी पीने के लिए बच्चों को या तो घर जाना पड़ता है या घर से बच्चे पानी लेकर विद्यालय आते हैं. विभाग द्वारा प्रतिदिन विद्यालयों को फोन कर बच्चों की उपस्थिति व अन्य जानकारी ली जाती है, लेकिन प्रतिदिन ली जा रही है आईवीआरएस रिपोर्ट में भी विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद रहने की सूचना मिलती है. इन विद्यालयों में बंद है मध्याह्न भोजन प्रखंड विद्यालय भगवानपुर धनगढ़ा चैनपुर मदुरना मोहनिया मछनहटा कहते हैं अधिकारी = इस संबंध में कार्यक्रम पदाधिकारी शंभू कुमार ने कहा कि किसी भी हालत में मध्याह्न भोजन प्रभावित नहीं होगा, मैं लगातार इसकी मॉनीटरिंग कर रहा हूं. जलस्तर खिसकने के कारण तीन विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बंद हुआ है. चापाकल की मरम्मत करने के लिए लोग स्वास्थ्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखा गया है. = पानी व अन्य समस्या से आये दिन दर्जनों विद्यालय में बच्चों को नहीं मिलता है दोपहर का भोजन आधा दर्जन से अधिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कर चला रहे मध्याह्न भोजन 15 दिनों से जिले के तीन विद्यालयों में चापाकल बंद रहने से हो रही परेशानी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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