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नये साल में महंगी होगी जमीन-मकान की रजिस्ट्री, अभी करा लें निबंधन

Updated at : 18 Dec 2025 4:16 PM (IST)
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नये साल में महंगी होगी जमीन-मकान की रजिस्ट्री, अभी करा लें निबंधन

ग्रामीण क्षेत्र में 2013 व शहरी क्षेत्र में वर्ष 2016 के बाद नहीं बढ़ा है जमीनों का मार्केट वैल्यू रेट

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नये सिरे से तय होगा मार्केट वैल्यू रेट, 2026 से लागू होगा संशोधित एमवीआर = 2026 में विभाग शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान प्रचलित दर पर तय करेगा जमीनों का मूल्यांकन = ग्रामीण क्षेत्र में 2013 व शहरी क्षेत्र में वर्ष 2016 के बाद नहीं बढ़ा है जमीनों का मार्केट वैल्यू रेट भभुआ सदर. अगर आप जमीन-मकान की रजिस्ट्री कराने की सोच रहे तो जल्दी करें, क्योंकि आनेवाले नये साल 2026 में जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराने पर आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है. क्योंकि, लगभग एक दशक के लंबे अंतराल के बाद बिहार सरकार ने राज्य में संपत्तियों के निबंधन की दरों को बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए मद्य निषेध उत्पाद व निबंधन विभाग ने डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला मूल्यांकन समितियों को एमवीआर की समीक्षा कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. जिला समितियों में डीएम के अतिरिक्त जिला अवर निबंधक सचिव, राजस्व के अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अंचलाधिकारी और राजस्व पदाधिकारी शामिल होते हैं. यह समिति शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में किये गये वर्गीकरण के आधार पर मौजूदा बाजार दर का आकलन कर एमवीआर यानी मार्केट वैल्यू रेट की नयी दर निर्धारित करने की अनुशंसा करेगी. समितियों की अनुशंसा पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी. आकलन के दौरान विकसित, विकासशील और सामान्य क्षेत्रों के साथ-साथ मुख्य सड़क, प्रधान सड़क और शाखा सड़क से जुड़े भूखंडों के मूल्य निर्धारण की समीक्षा होगी. इसके बाद संशोधित एमवीआर का प्रस्ताव विभाग को भेजा जायेगा. इधर, राज्य सरकार के इस पहल से अब अगले साल से जमीन व मकान की कीमतों में बढ़ोतरी स्वाभाविक है. क्योंकि, जमीन रजिस्ट्री का शुल्क तीन गुणा यानी 300 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और अब नया मार्केट वैल्यू रेट लागू होगा. वर्ष 2016 के एमवीआर पर अब तक हो रही है रजिस्ट्री दरअसल, वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में वर्ष 2016 के मार्केट वैल्यू रेट के अनुसार ही जमीन रजिस्ट्री का शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि भभुआ और मोहनिया जैसे शहरी क्षेत्र में बीते नौ सालों में जमीन व मकान की कीमत आसमान छू रही है. लेकिन इसका फायदा सरकार को नहीं मिल पा रहा है. अब मद्य निषेध, उत्पाद व निबंधन विभाग ने तय किया है कि जमीन का नये तरीके से पुनरीक्षण कर नया मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) लागू किया जायेगा, जिससे राजस्व की बढ़ोतरी होगी तो वहीं मार्केट वैल्यू रेट के पुनरीक्षण से रजिस्ट्री में पारदर्शिता भी आयेगी. वैसे भी बीते वर्षों में जिले के कई पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया है, लेकिन वहां आज भी जमीन रजिस्ट्री शुल्क खेतिहर भूमि का है. ग्रामीण इलाकों में भी जमीन की कीमत बढ़ी है तो उसका भी वर्तमान मार्केट वैल्यू रेट पर रजिस्ट्री शुल्क तय किया जायेगा. इधर, वर्ष 2013 के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों का भी मार्केट वैल्यू रेट नहीं बढ़ा है. नगर पर्षद व नगर पंचायत के नव अधिग्रहित क्षेत्रों पर विभाग का ज्यादा फोकस है, ताकि सरकार को जमीन रजिस्ट्री से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति हो सके. = वर्तमान बाजार दर से होगा मूल्यांकन विभागीय जानकारी के अनुसार, जमीन का नया मार्केट वैल्यू रेट का मूल्यांकन वर्तमान में प्रचलित बाजार दर से होगा. वर्तमान में जो मार्केट वैल्यू रेट है, उससे 10 गुनी ज्यादा रेट पर जमीन की बिक्री की जा रही है. इन्ही विसंगतियों को दूर करने के लिये नये स्तर से मार्केट वैल्यू रेट का पुनरीक्षण किया जा रहा है और पुनरीक्षण के बाद अगले साल इसे लागू कर दिया जायेगा. सरकार के इस योजना से काले धन को सफेद करने वाले लोगों पर भी अंकुश लगेगा. = इस तरह किया जायेगा जमीन का पुनरीक्षण शहरी क्षेत्र : प्रधान सड़क की व्यावसायिक, आवासीय भूमि, मुख्य सड़क की व्यावसायिक, आवासीय भूमि, औद्योगिक भूमि, शाखा सड़क की व्यावसायिक, आवासीय भूमि, अन्य सड़क (गली) की आवासीय भूमि, कृषि, गैर-आवासीय भूमि. ग्रामीण क्षेत्र : व्यवसायिक भूमि, औद्योगिक भूमि, आवासीय भूमि, एनएच और मुख्य सड़कों की दोनों ओर की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि, बलुआही, पथरीली, दियारा भूमि.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH KUMAR

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