कैमूर सड़क हादसा: ट्रैक्टर-बाइक टक्कर में घायल दूसरे युवक की भी मौत, इलाज के दौरान तोड़ा दम
Published by : Vikas Jha Updated At : 31 May 2026 11:26 AM
कैमूर सड़क हादसे में दो लोगों की मौत
Kaimur News: कैमूर के नुआंव थाना क्षेत्र में ट्रैक्टर और बाइक की टक्कर में घायल दूसरे युवक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. तिलक समारोह से लौट रहे तीन युवकों में एक किशोर समेत दो की जान चली गई, जबकि एक युवक घायल है.
Kaimur News: (नुआंव से संजय जायसवाल की रिपोर्ट)
कैमूर जिले के कुढ़नी थाना क्षेत्र के चंदेश गांव के समीप शनिवार रात हुए भीषण सड़क हादसे में घायल दूसरे युवक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. इस दुर्घटना में अब मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है, जबकि एक युवक घायल है, जिसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.
घायल दूसरे युवक की इलाज के दौरान मौत
जानकारी के अनुसार, सलथुआ गांव निवासी दीपक कुमार, पिता चंद्रभूषण राम, गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसे इलाज के लिए भभुआ सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार देर रात करीब एक बजे उसकी मौत हो गई. इससे पहले हादसे में रोहतास जिले के एकौनी गांव निवासी 12 वर्षीय गोलू कुमार की मौके पर ही मौत हो चुकी थी.
तिलक समारोह में शामिल होने आए थे सभी
बताया जाता है कि शनिवार को दीपक के भाई का तिलक समारोह था. गोलू अपने फुआ के घर सलथुआ आया हुआ था. तिलक कार्यक्रम के दौरान गोलू और दीपक बाइक से एक रिश्तेदार के यहां गए थे. वापसी में उन्होंने तीसरे युवक राजू को भी बाइक पर बैठा लिया. रास्ते में चंदेश गांव के उत्तर से नुआंव जाने वाली मुख्य सड़क पर सामने से आ रहे सीमेंट लदे ट्रैक्टर से उनकी बाइक की जोरदार भिड़ंत हो गई.
एक युवक की मौके पर हुई थी मौत
टक्कर इतनी भीषण थी कि गोलू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दीपक गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे तत्काल इलाज के लिए भभुआ सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां देर रात उसने दम तोड़ दिया. वहीं तीसरे घायल युवक राजू राम का उपचार चंदेश बाजार के एक निजी अस्पताल में कराया गया और वह अब खतरे से बाहर है. एक किशोर और एक युवक की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई.
मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. जिस घर में तिलक की खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मुख्य सड़कों से लेकर ग्रामीण संपर्क मार्गों तक वाहनों की तेज रफ्तार लगातार हादसों को न्योता दे रही है. इसके बावजूद न तो परिवहन विभाग, न पुलिस प्रशासन और न ही सामाजिक स्तर पर प्रभावी पहल दिखाई दे रही है. यदि वाहनों की रफ्तार पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा और बढ़ सकता है.
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