कैमूर में मनरेगा कार्य पर सवाल: खेल मैदान बना मिट्टी का ढेर, लाखों की सुविधा बर्बाद होने से खिलाड़ियों में आक्रोश
Published by : Ragini Sharma Updated At : 01 Jun 2026 1:30 PM
Kaimur News: कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड के पिया गांव में मनरेगा से बने खेल मैदान में मिट्टी भर दिए जाने से खेल सुविधाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं. ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की है.
kaimur News:(सतेन्द्र सिंह) कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड अंतर्गत पिया गांव में सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से विकसित किए गए खेल मैदान को लघु सिंचाई विभाग की लापरवाही और मनमानी के कारण भारी क्षति पहुंची है. तालाब की खुदाई से निकाली गई मिट्टी को खेल मैदान में डाल दिए जाने से मैदान की मूल संरचना पूरी तरह प्रभावित हो गई है. इससे खिलाड़ियों में भारी आक्रोश है, वहीं ग्रामीणों ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
मनरेगा से बना था चार एकड़ में आधुनिक मैदान
ग्रामीणों के अनुसार, करीब चार एकड़ क्षेत्र में फैले इस समतल एवं चहारदीवारी युक्त खेल मैदान का निर्माण युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था. मैदान में बास्केटबॉल सहित विभिन्न खेलों के लिए कोर्ट और पिच बनाए गए थे. इसके अलावा बुजुर्गों और महिलाओं के मॉर्निंग वॉक के लिए मनरेगा योजना से लाखों रुपये खर्च कर चारों ओर रैम्प का निर्माण कराया गया था. रैम्प के दोनों किनारों पर दीवार बनाकर उसमें लाल मिट्टी की भराई भी की गई थी, ताकि सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध हो सके.
तालाब खुदाई की मिट्टी मैदान में डाली गई
हाल ही में लघु सिंचाई विभाग द्वारा गांव के एक तालाब की खुदाई कर निकाली गई मिट्टी को खेल मैदान में डाल दिया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से बिना किसी तकनीकी जांच और योजना के मैदान में करीब चार फीट तक मिट्टी भर दी गई. इससे मैदान सड़क से ऊंचा होकर एक टिल्ले जैसा दिखने लगा है.
खेल सुविधाएं हुईं बुरी तरह प्रभावित
मिट्टी भराई से सबसे अधिक नुकसान बास्केटबॉल कोर्ट और अन्य खेल संरचनाओं को हुआ है. ये अब आसपास की सतह से करीब दो फीट नीचे हो गए हैं.खिलाड़ियों का कहना है कि बरसात के मौसम में यहां पानी जमा रहेगा, जिससे खेल गतिविधियां पूरी तरह ठप हो जाएंगी.
खिलाड़ियों में भारी रोष
पिया गांव के खिलाड़ियों में इस घटना को लेकर काफी नाराजगी है. उनका कहना है कि मैदान बनने के बाद उन्हें अभ्यास के लिए बेहतर सुविधा मिली थी, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि खेलना मुश्किल हो गया है. यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो मैदान पूरी तरह अनुपयोगी हो जाएगा.
ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब खुदाई की मिट्टी का कुछ हिस्सा अन्य लोगों को बेचा गया और बची हुई मिट्टी को अनियमित तरीके से मैदान में डाल दिया गया. इससे लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है. ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच, मैदान को पूर्व स्थिति में बहाल करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
विभाग का पक्ष
इस संबंध में लघु सिंचाई विभाग के एसी राजेंद्र कुमार ने कहा कि यदि खेल मैदान में मिट्टी भराई की गई है तो यह गलत है. मामले में कार्यपालक अभियंता से बात की जा रही है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.
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