घर बैठे गेहूं बेच रहे किसान समर्थन मूल्य से ज्यादा कमाई
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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न तो पैक्स, न ही किसानों ने दिखायी रुचि किसानों ने कहा समर्थन मूल्य बढ़ाये सरकार भभुआ नगर : सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की घोषणा जिले में उपहास बन कर रह गयी है. पैक्स व व्यापार मंडलों के माध्यम से गेहूं खरीद योजना छलावा साबित हो रही है. अब तक जिले में […]
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न तो पैक्स, न ही किसानों ने दिखायी रुचि
किसानों ने कहा समर्थन मूल्य बढ़ाये सरकार
भभुआ नगर : सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की घोषणा जिले में उपहास बन कर रह गयी है. पैक्स व व्यापार मंडलों के माध्यम से गेहूं खरीद योजना छलावा साबित हो रही है. अब तक जिले में एक भी क्रय केंद्र नहीं खुल पाया है. पैक्स समितियों को विभाग से इस संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश भी प्राप्त नहीं हुआ है. उधर, सरकार द्वारा 1625 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित किये जाने से किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने को लेकर उत्साहित नहीं हैं. ऐसे में किसान घर बैठे ही समर्थन मूल्य या उससे भी ज्यादा कीमत पर गेहूं बेच रहे हैं, जिससे जिले में गेहूं की सरकारी खरीद बेमानी साबित हो गयी है.
जटिल प्रक्रिया के कारण सीधे बाजार में बेच रहे अनाज : सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इसी भाव पर उनसे पैक्स व व्यापार मंडलों के माध्यम से गेहूं खरीदना है. लेकिन, खरीद को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश अब तक पैक्सों को नहीं मिला है. नियमों के मुताबिक क्रय केंद्रों पर वही किसान गेहूं बेच सकेंगे, जिनका डाटा एंट्री रहेगा. इसके अलावा राजस्व रसीद, बैंक खाते की फोटो कॉपी, पहचान पत्र आदि भी पैक्सों को देने होंगे. इतना ही नहीं गेहूं को क्रय केंद्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व बोरों का इंतजाम भी किसानों को करना पड़ता है. इससे खर्च बढ़ जाता है. इन सबसे बचने के लिए किसान खुले बाजार में ही गेहूं बेच रहे हैं. बाजार में फिलहाल 1600 से 1650 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बिक रहा है.
किसानों को पैसे की दरकार : जिले में सरकारी क्रय केंद्र खोलने में हो रहे विलंब होने के कारण भी किसान खुले बाजार में गेहूं बेचने को मजबूर हो रहे हैं. शादी-विवाह का सीजन होने की वजह से जरूरतमंद किसानों ने खलिहान से ही गेहूं बेच दिया. इस बार जिले में गेहूं की पैदावार अच्छी हुई है. बाजार भाव भी समर्थन मूल्य के आसपास बना हुआ है.
कई किसानों ने तो शुरुआती दौर में 1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बेचा. किसान पीयूष सिंह, विनय पाठक, रामप्रसाद सिंह, अरविंद चौबे आदि ने कहा कि सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य काफी कम रखा गया है. इसके अलावा पैक्सों व समितियों में गेहूं बेचने के लिए तमाम तरह की कागजी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. अगर सरकार गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ा देती, तो किसान गेहूं बेचने के लिए इच्छुक भी होते.
क्या कहते हैं अधिकारी
गेहूं की खरीदारी को लेकर न तो पैक्स न ही किसानों ने रुचि दिखायी. इसकी वजह से जिले में इस वर्ष गेहूं की खरीदारी शुरू नहीं हो सकी. बाजार में ही समर्थन मूल्य से ज्यादा किसानों को गेहूं का भाव मिल रहा है, जिसकी वजह से खरीदारी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी.
वकारूजमां, जिला सहकारिता पदाधिकारी
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