एसपी आवास की चहारदीवारी को बना दिया विज्ञापन का बोर्ड
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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संस्थानों को चिह्नित करने में जुटे अधिकारी भभुआ नगर : जिले के शासकीय भवनों की दीवारों को निजी संस्थाओं द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए उपयोग किया जा रहा है. भवनों व बाउंड्री वाल में विज्ञापन के बड़े-बड़े पोस्टरों सहित कई स्लाेगन भी लिखे जा रहे हैं. शहर सहित ग्रामीण इलाकों में यह कार्य खुलेआम किया जा […]
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संस्थानों को चिह्नित करने में जुटे अधिकारी
भभुआ नगर : जिले के शासकीय भवनों की दीवारों को निजी संस्थाओं द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए उपयोग किया जा रहा है. भवनों व बाउंड्री वाल में विज्ञापन के बड़े-बड़े पोस्टरों सहित कई स्लाेगन भी लिखे जा रहे हैं. शहर सहित ग्रामीण इलाकों में यह कार्य खुलेआम किया जा रहा है. बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. ऐसे में संपत्ति विरूपण अधिनियम का माखौल उड़ाया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गैरकानूनी है, लेकिन संस्थाओं द्वारा नियम का उल्लंघन किया जा रहा है. शहर में सरकारी स्कूल, कॉलेज, शासकीय व निजी आवास, पोल सहित अन्य स्थानों पर संस्थाओं द्वारा प्रचार-प्रसार व विज्ञापन बोर्ड लगाये जा रहे हैं. इसके अलावा कॉलेज व अन्य भवनों की दीवारों पर कंप्यूटर, कॉलेज इंस्टीट्यूट, कोचिंग सेंटर व विभिन्न तरह की दवाओं का भी प्रचार किया जा रहा है. कहीं न कहीं विभाग के अधिकारी भी इसके जिम्मेवार हैं. कारण है कि यदि शासकीय भवनों या दीवारों पर कोई लेख या विज्ञापन लगाया जाता है, तो इसकी जानकारी अधिकारी व कर्मचारियों को होनी चाहिए.
शिकायत के इंतजार में प्रशासन
निजी संस्थाओं द्वारा किये जा रहे प्रचार-प्रसार को प्रशासन ने नियम के विरुद्ध माना है. बावजूद कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार किया जा रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक यदि दीवारों या भवनों पर निजी संस्थाओं द्वारा अपने हित के लिए प्रचार-प्रसार किया गया है, तो यह गलत है. इस पर कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी या स्थानीय लोगों द्वारा इसकी शिकायत की जानी चाहिए. शिकायत के आधार पर ही कार्रवाई संभव है. शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के भवन निजी संस्थाओं के प्रचार-प्रसार के हिस्सा बन गये हैं.
ब्लॉक मुख्यालय में भी लगे हैं पोस्टर
जिले के विभिन्न ब्लॉक मुख्यालयों में भी संपत्ति विरूपण अधिनियम का पालन कराने में प्रशासन की नजर नहीं है. ब्लॉक मुख्यालयों में भी नियमों की धज्जियां उड़ायी जा रही हैं. बेतरतीब लगाये गये पोस्टर व बैनरों से जहां शहर की खूबसूरती बिगड़ रही है, वहीं बड़े-बड़े होर्डिंग लोगों का ध्यान भी भटकाते हैं.
न्यायालय को भी नहीं छोड़ा
शहर के निजी एवं सरकारी संस्थाएं इससे अछूते नहीं हैं. एसपी आवास पर भी कोचिंग सेंटरों के विज्ञापन इसकी चहारदीवारी की खूबसूरती बिगाड़ रहे हैं. शहर में सबसे ज्यादा विज्ञापन के पोस्टर कोचिंग संस्थानों के ही दिखते हैं. इसके अलावा व्यवहार न्यायालय सहित अन्य प्रशासनिक भवनों पर धड़ल्ले से विज्ञापनों के पोस्टर चिपकाये जा रहे हैं. इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होने से इनके हौंसले बुलंद हैं. भ्रामक विज्ञापनों से जहां लोगों को गुमराह करने का प्रयास जारी है, वहीं शहर की खूबसूरती पर भी बट्टा लग रहा है.
अधिकारियों को दी जा चुकी है जिम्मेवारी
संपत्ति विरूपण अधिनियम एक्ट का उल्लंघन करनेवाले संस्थाओं को चिह्नित किया जा रहा है. इसके लिए कार्यपालक दंडाधिकारी को जिम्मेवारी सौंपी जा चुकी है. नगर पर्षद को भी इस संबंध में पत्र जारी किया गया है. पोस्टरों को हटाने के लिए 25 जनवरी तक का समय दिया गया है. उसके बाद थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.
ललन प्रसाद, एसडीओ
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