सेविका व सहायिकाओं के एरियर इंक्रीमेंट के 14 लाख रुपये लौटे
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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विभाग ने कहा, ट्रेजरी की लापारवाही से वापस हुए रुपये भभुआ (ग्रामीण) : भभुआ प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं को एरियर के रूप में 14 लाख रुपये विभाग को आवंटित हुए थे. लेकिन, विभागीय व ट्रेजरी में समन्वय स्थापित नहीं होने से रुपये वापस लौट गये. यह रुपये अगस्त 2015 से जनवरी 2016 तक […]
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विभाग ने कहा, ट्रेजरी की लापारवाही से वापस हुए रुपये
भभुआ (ग्रामीण) : भभुआ प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविका व सहायिकाओं को एरियर के रूप में 14 लाख रुपये विभाग को आवंटित हुए थे. लेकिन, विभागीय व ट्रेजरी में समन्वय स्थापित नहीं होने से रुपये वापस लौट गये. यह रुपये अगस्त 2015 से जनवरी 2016 तक एरियर इंक्रीमेंट के रूप में सेविका व सहायिकाओं के बीच बांटे जाने थे. विभाग का कहना है कि बाल विकास परियोजना द्वारा बिल बनाकर ट्रेजरी को भेजा जा चुका था, लेकिन ट्रेजरी ने बिल का भुगतान समय पर नहीं किया और रुपये वापस लौट गये.
गौरतलब है कि सदर प्रखंड के बाल विकास परियोजना कार्यालय को सेविका व सहायिकाओं को एरियर के रूप में देने के लिए अगस्त 2015 से जनवरी 2016 के बीच के 14 लाख रुपये आवंटित हुए थे. लेकिन, विभाग की लापारवाही से रुपये सेविका व सहायिकाओं के खाते में नहीं जा सके. विभाग के मुताबिक, आवंटन के अनुरूप बिल बनाकर ट्रेजरी को भेजा गया था. लेकिन, ट्रेजरी के कर्मियों द्वारा पहले यह कहा गया कि बिल में कुछ कमी है.
वह विभाग को लौटाया जायेगा. लेकिन, समय रहते विभाग को नहीं लौटाया गया. इसके बाद बाल विकास के कर्मियों के द्वारा जानकारी लेने पर ट्रेजरी के कर्मियों ने बताया कि बिल कहीं गुम हो गया है. इस आंख मिचौली में काफी विलंब हो चुका था और मार्च क्लोजिंग का समय आ गया.
ऐसे में पैसा वापस चला गया. सवाल यह उठता है कि चाहें गलती किसी की रही हो सेविकाओं द्वारा जो विभाग को आवेदन दिया गया है, उसमे सभी सेविकाओं द्वारा एरियर की राशि की मांग की जा रही है. अब तो जब राशि ही लौट गयी है, तो मिलेगी कैसे?
क्या कहती हैं सीडीपीओ
बाल विकास परियोजना की सदर सीडीपीओ आभा कुमारी का कहना है कि उनके कार्यालय से बिल बनाकर ट्रेजरी को भेजा गया था. लेकिन, ट्रेजरी के कर्मियों ने पहले यह कहा गया कि बिल में कुछ गलती है. इस पर उसे वापस करने की बात कही गयी. इसपर ट्रेजर के कर्मियों ने बिल को कार्यालय में भेजने की बात कही. लेकिन, बिल कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ. बाद में फिर बिल मांगा गया, तो उनके द्वारा कहीं खो जाने की बात कही गयी. तब तक मार्च समाप्त हो चुका था और रुपये वापस चले गये.
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