प्रतिष्ठा दावं पर बा, घरे आवेके पड़ी

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पंचायत चुनाव. अब परदेशी बाबू पर उम्मीदवारों को आस, अपना रहे प्रत्याशी हर हथकंडे चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है. प्रत्याशियों को एक-एक मत की कीमत समझ में आने लगी है. प्रत्याशियों को जब बड़ी संख्या में घर के मुखिया सहित कई लोगों के प्रदेश में कमाने की जानकारी मिल रही है, तो […]

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पंचायत चुनाव. अब परदेशी बाबू पर उम्मीदवारों को आस, अपना रहे प्रत्याशी हर हथकंडे
चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है. प्रत्याशियों को एक-एक मत की कीमत समझ में आने लगी है. प्रत्याशियों को जब बड़ी संख्या में घर के मुखिया सहित कई लोगों के प्रदेश में कमाने की जानकारी मिल रही है, तो किसी भी सूरत में उन्हें घर बुलाने की पहल की जाने लगी है.
भभुआ (नगर) : पंचायत चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. चुनाव की तिथि ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है. प्रत्याशियों को एक-एक मत की कीमत समझ में आने लगी है. प्रचार में निकले प्रत्याशी हर घर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन जब प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में घर के मुखिया सहित कई लोगों के प्रदेश में कमाने की जानकारी मिल रही है, तो होश ठिकाने लग जा रहे हैं.
हाईटेक हो चुके पंचायत के नेता भी अब फोन फेसबुक, वॉट्सएप से अपना फोटो व चुनाव चिह्न मैसेज कर उनसे घर आकर वोट डालने की अपील कर रहे हैं. कुछ प्रत्याशियों द्वारा उनके घर आने-जाने के खर्च का भी प्रबंध किया जा रहा है. वहीं महीनों से दूर परदेशी बाबू की भी वोट के साथ घर की याद में बांछे खिल उठी है. ऐसे में यह निश्चित है कि जिसका बुलावा मिलेगा परदेशी बाबू उसी के पक्ष में वोट करेंगे.
टिकट खर्चा खातिर मत घबरइह: बबुआ हो एक-एक वोट के सवाल बा, प्रतिष्ठा दावं पर लगल बा. इहे मौका पर आपन लोग साथ देवेला. जरूर अइह, टिकट के खर्चा खातिर मत घबरइह.
कुछ इसी अंदाज में प्रदेश में रह रहे मतदाताओं को गोलबंद करने की प्रक्रिया प्रत्याशियों द्वारा की जा रही है. एक-एक वोट की कीमत बता कर विशेष कर मुखिया पद के प्रत्याशी परदेशी मतदाताओं को आमंत्रित करने में लगे हुए हैं.
जोखिम नहीं लेना चाह रहे प्रत्याशी: पंचायत चुनाव में विशेष कर मुखिया जैसे पद को लेकर कोई भी उम्मीदवार जोखिम लेना नहीं पसंद कर रहा है. पिछले कई चुनावों में परदेशियों के रूप में वोट रहते हुए भी कुछ पंचायतों में 50-60 मतों के अंतराल में हार का मुंह कई प्रत्याशियों को देखना पड़ रहा है. दूध से मुंह जला प्रत्याशी छांछ भी फूंक कर पीना उचित समझ रहे हैं.
परदेशियों को बुलाने के लिए टिकटों की बुकिंग करा कर इंटरनेट के जरिये भेजने की प्रक्रिया भी जोरों पर है. सूत्रों की माने तो दिल्ली, यूपी, कोलकाता व झारखंड जैसे जगहों पर परदेशी मतदाताओं को बुलाने के लिए प्रति वोटर दो हजार रुपये खर्च किये जा रहे हैं. इसका फायदा गांव में वोट का ठेका लेकर अपनी दुकान चलाने वाले बखूबी उठा रहे हैं.
वहीं शादी विवाह को लेकर जिनका पहले से ही आना तय हुआ है, उन्हें चुनाव तक रोकने के लिए टिकट कैंसल कराने की प्रक्रिया जारी है. प्रत्याशियों द्वारा ऐसे मतदाताओं को सामाजिक प्रतिष्ठा और अपने पराये का खूब एहसास कराया जा रहा है. पंचायत चुनाव को लेकर प्रत्याशी अपनी तरफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते.
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