जेपी ने कांग्रेस का नहीं तानाशाही का विरोध किया, हमलोग भी उसी का कर रहे हैं, संवाद में बोले विजय चौधरी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Oct 2022 8:01 AM
वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सोमवार को प्रभात खबर कार्यालय में हुए ‘प्रभात संवाद’ कार्यक्रम में राजनीति से लेकर बिहार की आर्थिक सेहत तक पर खुलकर बात की. प्रभात खबर कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने बड़ी सहजता और बेबाकी से तीखे सवालों के जवाब दिये.
प्रभात खबर संवाद के दौरान वित्त मंत्री ने हाल ही में सिताब दियारा आये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिये गये बयान पर कहा कि जिस तरीके से देश के गृह मंत्री आरोप लगाते हैं कि जेपी ने छात्र आंदोलन के दौरान जिस कांग्रेस का विरोध किया, उनके शिष्य उसी कांग्रेस के साथ चले गये. यह गलत है. लोकनायक ने कांग्रेस का नहीं, बल्कि तानाशही, सरकार की दमनकारी नीतियों, सत्ता के दुरूपयोग, केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक विरोधियों पर दुरुपयोग का विरोध किया था. आपातकाल को लेकर तो इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने भी माना कि वह गलती थी.
जिन चीजों को लेकर छात्रों व लोकनायक ने 74-75 का आंदोलन चलाया था, आज की केंद्र सरकार उससे कहीं ज्यादा तीव्रता से उन्हीं कदमों पर आगे बढ़ रही है. जिन चीजों को लेकर इंदिरा गांधी की आलोचना की जाती थी, आंदोलन खड़ा हुआ, उस समय की कांग्रेस सरकार का विरोध हुआ, उस पर आज केंद्र सरकार का समर्थन कैसे हो सकता है ? देश के राजनीतिक माहौल के अपहरण की कोशिश हो रही है. प्रयास हो रहा है कि लोगों के दिमाग इतनी दूषित चीजों से भर दो कि उसमें सही चीजों को जगह ही न मिले.
सवाल- जदयू का भाजपा के साथ 20 साल पुराना संबंध रहा, बावजूद भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाया जाना कितना सही है ?
उत्तर- भाजपा के साथ हमारे गठबंधन के दौरान नेताओं में स्पष्ट समझदारी थी कि जिन मुद्दों पर हमारा परहेज है या जिससे हम सहमत नहीं हैं, उसे बिल्कुल नहीं उठाया जायेगा. मुख्यमंत्री जी ने भी कहा है कि अब अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी वाली वह भाजपा ही नहीं रही. आज की भाजपा ने उन्हीं मुद्दों को आक्रामकता के साथ बढ़ाने का निर्णय ले लिया है. स्वाभाविक रूप से हम उनके साथ कैसे सहमत हो सकते हैं. यही मुद्दे अलगाव की बड़ी वजह भी बने.
सवाल- करों में राज्यों की हिस्सेदारी का फार्मूला बदलने से क्या फायदा?
उत्तर- केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी देना संवैधानिक प्रावधान है. वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी का फार्मूला तो बदला दिया, लेकिन वास्तविकता में बिहार जैसे राज्यों को इसका कोई फायदा नहीं हुआ.
सवाल- हम प्रति व्यक्ति आय, सीडी रेशियो, उच्च शिक्षा आदि में पीछे हैं. इसमें बदलाव कैसे होगा ?
उत्तर- राज्य सरकार ने कभी भी सभी मानकों पर आगे होने का दावा नहीं किया है. लेकिन हम कहां खड़े हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखना है कि हमारी दिशा क्या है? अगर हम ऊपर जा रहे हैं तो निश्चित रूप से भविष्य अच्छा है. कई मामलों में केंद्र सरकार ने मापदंड तय करने में हमारे साथ नाइंसाफी कर हतोत्साहित करने का प्रयास किया है. बावजूद, हम कई मानकों पर बड़े राज्यों को टक्कर दे रहे हैं.
सवाल- सरकार ने दस लाख नौकरी देने की घोषणा की है. क्या इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा?
उत्तर- सरकार ने नौकरी नहीं, दस लाख लोगों को रोजगार देने की बात कही है. इसमें सरकारी विभागों में नौकरियों के सृजन से लेकर निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित कराना भी शामिल है. दोनों फ्रंट पर सरकार अपने वायदे के मुताबिक तेजी से काम रही है. सभी विभागों में पदों के सृजन व नौकरी देने की तैयारी चल रही है. इसके साथ ही सूबे में उद्योग का सकारात्मक माहौल है. इथेनॉल प्लांटों में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा. इसी तरह नये खुल रहे इंजीनियरिंग कॉलेजों के आस पास खुलने वाले लॉज, हॉस्टल और उसमें काम करने वाले शिक्षक-कर्मी को भी तो रोजगार मिलेगा.
सवाल- निकाय चुनाव में अति पिछड़ा आरक्षण को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर हमलावर है ?
उत्तर- सही बात है कि सरकार ने घोषणा कर कोर्ट का ऑर्डर नहीं माना. भाजपा यही चाहती है कि कोर्ट के आदेश के हिसाब से हमलोग अति पिछड़ों की सीटों को अनारक्षित मान कर चुनाव करा लें. लेकिन हम लोग किसी भी हालत में अति पिछड़ों के आरक्षण के बगैर चुनाव नहीं करायेंगे. सरकार पूर्ण रूप से सजग हैं.
सवाल- लोकसभा चुनाव के मात्र 17 महीने रह गये हैं. राजद और जदयू के कार्यकर्ताकितना तालमेल बिठा पायेंगे ?
उत्तर- अनुभव और जिम्मेदारी के साथ कहूंगा कि दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में जमीनी स्तर पर कोई टकराव की स्थिति नहीं है. बल्कि, हमारे नेताओं से भी ज्यादा कार्यकर्ताओं ने इस गठबंधन का स्वागत किया है.
सवाल- कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे. क्या यह जदयू के लिए असहज स्थिति नहीं है?
उत्तर- असहज स्थिति नहीं है. आज भी हम करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे है. जिस समय जरूरत थी, उस समय जदयू ने एक्ट भी किया. पिछले पांच साल में उन्हें कुछ नहीं दिखा. अब केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से यह साफ दिखता है कि सब पॉलिटिकल एक्शन है.
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