Jehanabad : विवेकानंद का चिंतन सामाजिक परिवर्तन व राष्ट्रनिर्माण का सशक्त आधार

Edited by MINTU KUMAR
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राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्थानीय एसएस कॉलेज के राजकुमारी सभागार में महान संत, युगप्रवर्तक एवं राष्ट्रचेतना के उद्घोषक स्वामी विवेकानंद की जयंती अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनायी गयी. कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दीपक कुमार सहित उपस्थित प्राध्यापकों द्वारा स्वामी विवेकानंद के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया.

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जहानाबाद नगर.

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्थानीय एसएस कॉलेज के राजकुमारी सभागार में महान संत, युगप्रवर्तक एवं राष्ट्रचेतना के उद्घोषक स्वामी विवेकानंद की जयंती अत्यंत गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनायी गयी. कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दीपक कुमार सहित उपस्थित प्राध्यापकों द्वारा स्वामी विवेकानंद के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया. इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आइक्यूएसी के समन्वयक डॉ. विनोद कुमार राय ने स्वामी विवेकानंद की वैचारिकी पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का चिंतन केवल आध्यात्मिक उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक परिवर्तन, राष्ट्रनिर्माण और मानव कल्याण का सशक्त आधार है. डॉ. राय ने कहा कि युवाओं के आत्मबल, चरित्र निर्माण और निःस्वार्थ सेवा पर आधारित विवेकानंद का दर्शन आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरक उद्घोष “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” को युवाओं के लिए जीवन-मंत्र बताते हुए कहा कि यह संदेश आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना करने और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. दीपक कुमार ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं में निःस्वार्थ कर्म, दृढ़ आत्मविश्वास और असीम ऊर्जा का संचार करते हैं.

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल युवा आबादी वाले देश में युवाओं की भूमिका समाज और राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है. युवा अपनी क्षमता, ऊर्जा और नेतृत्व गुणों के बल पर असंभव को भी संभव बना सकते हैं. संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रभात रंजन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का प्राणवंत स्रोत है, जो उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास और सतत परिश्रम के मार्ग पर चलने की सीख देता है. वहीं सौरव कुमार ने कहा कि स्वामी जी का राष्ट्रवादी चिंतन और मानव सेवा का भाव आज के युवाओं को सकारात्मक सोच और सामाजिक दायित्व के प्रति सजग बनाता है. कार्यक्रम में अन्य शिक्षकों की भी सहभागिता रही. बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने पूरे कार्यक्रम को उत्साहपूर्वक सुना और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया.

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