विशिष्ट शिक्षकों को नहीं मिल रही बढ़ी हुई राशि, एरियर का भी लटका है मामला

Published by : AMLESH PRASAD Updated At : 31 Jul 2025 10:30 PM

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जिले में नियोजित शिक्षक से विशिष्ट शिक्षक होना अभिशाप साबित हो रहा है. यहां पिछले छह माह से विशिष्ट शिक्षकों को नियोजित शिक्षकों से तकरीबन 15 हजार कम वेतन प्राप्त हो रहे हैं.

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करपी. जिले में नियोजित शिक्षक से विशिष्ट शिक्षक होना अभिशाप साबित हो रहा है. यहां पिछले छह माह से विशिष्ट शिक्षकों को नियोजित शिक्षकों से तकरीबन 15 हजार कम वेतन प्राप्त हो रहे हैं. वर्ष 2024 में विशिष्ट शिक्षक की परीक्षा देकर सैकड़ों शिक्षक नियोजित से विशिष्ट शिक्षक के पद पर 1 जनवरी 2025 को योगदान किए थे, उन्हें जनवरी से अभी तक प्रत्येक महीने तकरीबन साढ़े पैंतीस हजार रुपये मिल रहे. वहीं साथी नियोजित शिक्षकों को 50 हजार से अधिक वेतन मिल रहा है. दिलचस्प बात यह है कि विशिष्ट शिक्षकों को दिसंबर 2024 में पचास हजार वेतन मिला था. उन्हें परीक्षा देकर विशिष्ट बनते ही अब पंद्रह हजार कम वेतन मिलने लगा है. विशिष्ट शिक्षकों को देख अब लोग ताना मारने से भी नहीं चूक रहे कि परीक्षा देने के बाद सभी विभाग में वेतन बढ़ता है और अरवल जिले में वेतन एक चौथाई कम हो जाता है. मामला विशिष्ट शिक्षकों के वेतन फिक्सेशन का कार्य लंबित है, जबकि राज्य शिक्षा विभाग से एक माह पूर्व ही इस संबंध में अविलंब कार्य संपन्न करने का पत्र भेजा गया है. पत्र में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित का आदेश निर्गत है, किंतु नजराना वसूली की प्रक्रिया पूर्ण नहीं होने के कारण शिक्षकों की समस्या जस की तस बनी हुई है. इधर कई शिक्षकों का दूसरे जिलों में स्थानांतरण तो कई प्रधान शिक्षक के पद पर योगदान कर चुके है, उन्हें सबसे ज्यादा समस्या का सामना करना पड़ेगा. उन्हें इसी कार्य के लिए रोज रोज अरवल का चक्कर लगाना पड़ेगा. ऑनलाइन हाजरी योजना के कारण वैसे शिक्षकों को आकस्मिक अवकाश लेकर आना जाना पड़ेगा. इससे बचने के लिए उन शिक्षकों से मोटा नजराना वसूला जायेगा. कम मिल रहे वेतन एवं अधर में फंसी हुई एरियर योजना के कारण कई शिक्षकों को आर्थिक समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है. किसी के बीमारी का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा, वहीं कई शिक्षकों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. प्रखंड वंशी का इस संबंध में सबसे बुरा हाल है, जहां 1019 से ही शिक्षकों का एरियर की राशि बकाया है, वही वेतन फिक्सेशन का कार्य भी अधर में लटका हुआ है. धीरे धीरे शिक्षकों की नाराजगी अब दिखने लगी है, वहीं इ-शिक्षा कोष पर भी कई शिक्षकों ने शिकायत डालना शुरू कर दिया है. कई शिक्षकों ने बताया कि सबसे ज्यादा नाजायज नजराना शिक्षा विभाग में ही वसूली किया जा रहा है जिसका प्रमाण कुछ ही दिन पहले जिला शिक्षा विभाग के दो कर्मियों की निगरानी विभाग से गिरफ्तारी है.

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