सात प्रतिशत हुई है पिछले दो दिनों में धान की रोपनी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Aug 2024 10:40 PM

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जिले में बुधवार कोई झमाझम बारिश और उसके बाद गुरुवार की सुबह हुई बारिश ने किसानों के मुरझाए चेहरे पर रौनक लौटा दी है.

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जहानाबाद.

जिले में बुधवार कोई झमाझम बारिश और उसके बाद गुरुवार की सुबह हुई बारिश ने किसानों के मुरझाए चेहरे पर रौनक लौटा दी है. किसान ट्रैक्टर, हल और फावड़ा लेकर अपने-अपने खेतों में जुट गये हैं. बारिश के बाद जिन खेतों में धान के फसल मुरझाए हुए थे वह खिल उठे हैं और जो खेत पारित पड़ी हुई थी उनमें धान की रोपनी की तैयारी की जा रही है. जो खेत पहले से ही तैयार थे और केवल पानी के अभाव में रोपनी नहीं हो पा रही थी वैसे खेतों में जमकर धान रोपनी हो रही है. बारिश से कहीं खेतों में पानी जमा हो गया है तो कहीं खेतों की प्यास बुझ गयी है. अब अगर दो दिन और झूम कर बारिश हो जाए तो किसान आराम से धान की रोपनी कर लेंगे. हालांकि किसान अभी से ही खेतों में धन रोपने के कार्य में लगे हैं. जिन किसानों के खेत में पानी जमा हो गया है वह रोपनी के कार्य में जुड़ गये हैं और जिनके खेतों में पानी जमा नहीं हो सका वह मोटर चलाकर रोपनी का कार्य कर रहे हैं. यही कारण है कि पिछले दो दिनों में जिले में सात प्रतिशत धान रोपनी हुई है. दो दिन पहले तक जिले में मात्र 33 प्रतिशत धान रोपनी हुई थी वहीं आंकड़ा बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है. किसान रामेश्वर शर्मा का कहना है कि बारिश ने पानी तो जमा नहीं किया है किंतु अब खेत में मोटर चला कर आसानी से रोपनी की जा सकती है. अगर इसी बीच और बारिश हो गई तो रोपनी बहुत आसानी से हो जायेगी.बारिश के बाद एक ओर किसान खेत में मोटर चला कर कीचड़ तैयार कर रहे हैं तो उधर दूसरी ओर मोरी उखाड़ने का काम भी तेजी से चल रहा है. सावन महीने का नौ दिन बीत चुका था तो जिले में मात्र 33 प्रतिशत ही धान की रोपनी संभव हो सकी थी. बारिश के बाद इस आंकड़े में उछाल आया और दो दिनों में सात प्रतिशत धान रोपनी बढ़कर 40 प्रतिशत पर पहुंच गई. जिन किसानों ने अभी तक धान की रोपनी शुरू नहीं की थी वैसे किसान अपने खेतों को धान की रोपनी के लिए तैयार कर रहे हैं. जिले के सभी प्रखंडों के गांव-बधार में इस समय विशेष रौनक नजर आ रही है. पूरा गांव बारिश के बाद उत्साह में है. सभी किसान अपने-अपने खेतों में धान रोपनी की तैयारी में जुटे हैं. कोई ट्रैक्टर खोज रहा है तो कोई मजदूर. इन दिनों ट्रैक्टर और मजदूर दोनों की मांग बढ़ गयी है. एक खेत में लगे ट्रैक्टर और मजदूर को किसान जल्द से जल्द अपने खेत में ले जाने के लिए बेताब हो रहे हैं. जिले के धान रोपनी वाले खेतों में महिलाओं के परंपरागत गीतों से खेत और आसपास के बधार गूंजायमान हो रहे हैं. धान रोपनी कार्य के बीच आसमान में मेघों की उमड़-घुमड़ के साथ ही महिलाओं की गीतों का स्वर भी तेज हो जाता है. किसान रमेश सिंह बताते हैं कि अगर बारिश दो-चार दिन और हुई तो अधिकांश खेतों में धान की रोपनी हो जायेगी. वैसे भी सभी किसान धान रोपनी की तैयारी में जुट गये हैं. हालांकि मोरी की बुवाई अभी तक नहीं होने से उनमें गाठें आनी शुरू गई हैं. अगर कुछ दिन और बुवाई नहीं हुई तो धान की फसल प्रभावित हो सकती है. समय पर बोले गए धान के फसलों में उपज अधिक होती है. इधर खाद की दुकानों पर भी भीड़ लगनी शुरू हो गयी है. सबसे अधिक डीएपी खाद की बिक्री हो रही है. धान रोपनी के पहले डीएपी खाद खेतों में डाल कर धान रोपनी करने से पैदावार अच्छी होती है.

सावन महीने में भी बारिश के लिए तरस गये थे किसान : सावन के दूसरे से तीसरे सप्ताह तक अमूमन इलाके में धान की रोपनी पूरी हो जाया करती थी किंतु इस साल सावन में बारिश नहीं होने के कारण इस बारिश के पहले तक जिले में मात्र 33 प्रतिशत ही धान की रोपनी हो सकी थी. जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह में जमकर बारिश हुई थी. उस समय अधिकांश किसानों के खेतों में मोरी तैयार नहीं हुई थी जिसके कारण धान की रोशनी नहीं हो सकी. कुछ एक किसान जिन्होंने रोहिणी नक्षत्र में बिचडे डाले थे उन्हीं की धान रोपनी उस समय हो सकी थी.

जब मोरी तैयार हुई तो बारिश को तरस गये : जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश के बाद ज्यादातर किसानों ने धान के बिचड़े डाले, उनकी मोरी 20 जुलाई तक तैयार हो चुकी थी किंतु उसके बाद से बारिश नहीं हो रही थी जिसके कारण किसान धान रोपनी के लिए बारिश का इंतजार कर रहे थे. 25 दिन पहले हुई बारिश के पहले जिन किसानों ने बिचड़े डाले थे. उस समय 8 दिन की घनघोर बारिश में उनके बिचड़े गल गये थे. ऐसे किसानों को दोबारा धान के बिचड़े डालने पड़े थे. सावन माह चढने के बाद बुधवार को जिले में पहली बार बारिश हुई है.काको प्रखंड में तो सबसे अधिक तो हुलासगंज में सबसे कम हुई है बारिश : पिछले 24 घंटे में जिले के काको प्रखंड में सबसे अधिक 26.6 एमएम बारिश हुई है. जबकि हुलसगंज में सबसे कम 6.6 एमएम बारिश हुई है. पूरे जिले में पिछले 24 घंटे में औसत रूप से 15.65 एमएम बारिश हुई है.

प्रखंड बारिश (एमएम में)सदर प्रखंड 14.8मखदुमपुर 22.2घोसी 13.6मोदनगंज 11.0हुलासगंज 6.6काको 26.6रतनी फरीदपुर 14.8

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