जहानाबाद के मखदुमपुर में ट्राईसाइकिल के इंतजार में रेंगने को मजबूर दिव्यांग युवक, 10 बार आवेदन के बाद भी नहीं मिली मदद

Author Ramesh kumar|Edited by Nikhil Anurag
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मखदुमपुर में ट्राई साइकिल के लिए दर-दर भटक रहा दिव्यांग नीतीश ,अब केवल भगवान का सहारा

ठेहुन के बल सड़क से जाता दिव्यांग नीतीश

Jehanabad News: जहानाबाद के एक दिव्यांग युवक की दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसे 10 बार आवेदन करने के बावजूद सरकारी ट्राईसाइकिल नहीं मिल पाई है. वह पेंशन निकालने के लिए सड़क पर घिसटते हुए बाजार पहुंचा, जिसने सभी को झकझोर दिया.

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Jehanabad News: सरकारें दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं. कागजों पर योजनाओं की लंबी सूची है, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है. जहानाबाद जिले के मखदुमपुर के आदर्श नगर मोहल्ले का एक दिव्यांग युवक आज भी ऐसी ही व्यवस्था का दर्दनाक चेहरा बनकर सामने आया है.

10 बार आवेदन के बाद भी नहीं मिली ट्राईसाइकिल

75 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता से ग्रसित नीतीश शर्मा वर्षों से सरकारी ट्राईसाइकिल मिलने की आस लगाए बैठे हैं. उनका कहना है कि ट्राईसाइकिल के लिए वह करीब 10 बार मखदुमपुर प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं. कई बार आवेदन देने के साथ जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से भी गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला.

पेंशन निकालने बाजार पहुंचे तो सड़क पर रेंगते दिखे

मंगलवार को नीतीश शर्मा दिव्यांग पेंशन की राशि निकालने मखदुमपुर बाजार पहुंचे. दोनों पैर और दोनों हाथ से गंभीर रूप से दिव्यांग होने के कारण वह सड़क पर घुटनों और हाथों के सहारे रेंगते हुए आगे बढ़ते नजर आए. यह दृश्य देखकर स्थानीय लोगों की आंखें नम हो गईं.

"अब तो बस भगवान का ही सहारा है"

नीतीश शर्मा ने कहा कि वह वर्षों से सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक ट्राईसाइकिल नहीं मिल सकी. उन्होंने कहा, "अब तो बस भगवान का ही सहारा है. इंसानों से उम्मीद करते-करते थक गया हूं."

मां ने भी कई बार लगाई गुहार

मूल रूप से गया जिले के बेलागंज प्रखंड के कोरमथु गांव निवासी संतोष शर्मा के पुत्र नीतीश बचपन से मखदुमपुर के आदर्श नगर में रह रहे हैं. उनकी मां ममता देवी ने बताया कि बेटे के लिए कई बार अधिकारियों के समक्ष आवेदन और गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि नीतीश को दिव्यांग पेंशन तो मिल रही है, लेकिन सबसे जरूरी ट्राईसाइकिल अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई.

लोगों ने प्रशासन से की पहल की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता दिखाते, तो नीतीश को सड़कों पर रेंगने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता. लोगों ने प्रशासन से जल्द ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने और दिव्यांग युवक को अन्य आवश्यक सरकारी सुविधाएं देने की मांग की है.

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