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Jehanabad : नागपंचमी पर पोंदिल गांव में वर्षों पुरानी परंपरा का पालन, हिंदू-मुस्लिम सभी बनाते हैं मीठे पकवान

Updated at : 28 Jul 2025 6:08 PM (IST)
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Jehanabad : नागपंचमी पर पोंदिल गांव में वर्षों पुरानी परंपरा का पालन, हिंदू-मुस्लिम सभी बनाते हैं मीठे पकवान

आज नागपंचमी के दिन कुर्था थाना क्षेत्र के पोंदिल गांव जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्म के लोग इस गांव में निवास करते हैं लेकिन यहां वर्षों से परंपरा चली आ रही है कि नागपंचमी के दिन किसी के घरों में नमकयुक्त भोजन नहीं बनते हैं.

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कुर्था. आज नागपंचमी के दिन कुर्था थाना क्षेत्र के पोंदिल गांव जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्म के लोग इस गांव में निवास करते हैं लेकिन यहां वर्षों से परंपरा चली आ रही है कि नागपंचमी के दिन किसी के घरों में नमकयुक्त भोजन नहीं बनते हैं. ऐसे में हिंदू हो या मुस्लिम, सभी के घरों में आज के दिन मिष्ठान भोजन व पकवान बनाये जाते हैं. हालांकि ऐसी मान्यता है कि नागपंचमी के दिन एक घर में नमकयुक्त भोजन बना था तब उसके घर में कई प्रकार की अनहोनी की घटना घटी थी और तब से सभी के घरों में नागपंचमी के दिन नमकयुक्त भोजन नहीं बनाये जाते हैं. आज के दिन इस गांव में हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्म के लोगों के यहां अगर कोई रिश्तेदार भी आ जाए तो उन्हें भी मीठे पकवान ही परोसे जाते हैं. बता दें कि कुर्था थाना क्षेत्र के पोंदिल गांव स्थित बक्स बाबा का मंदिर है, जहां नाग देवता की पूजा की जाती है. इस मंदिर में गांव के अलावा दूर-दूर से लोग नाग देवता को दूध व लावा चढ़ाने आते हैं. हालांकि नागपंचमी के दिन इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जहां प्रत्येक वर्ष सुरक्षा का भी व्यापक इंतजाम रहता है और हजारों की संख्या में महिला- पुरुष नाग बाबा को लावा व दूध अर्पण कर अपनी मन्नतें मांगते हैं. अरवल जिले के पोंदिल गांव अपने आपमें कई प्रकार के आपसी समरसता का मिसाल भी कायम करते हैं. यहां हिंदू हो या मुस्लिम किसी के घरों में अगर किसी की मृत्यु हो जाती है तो उन्हें मृत्यु के बारहवें दिन ब्रह्म भोज करनी होती है चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम और गांव के सैकड़ों लोग उस ब्रह्म भोज में शरीक होकर आपसी समरसता का मिसाल कायम करते हैं. पोंदिल गांव के ग्रामीणों की मानें तो इस गांव में नागपंचमी के दिन मीठे पकवान बनाने की परंपरा से लेकर हिंदू-मुस्लिम किसी के घरों में मृत्यु होने पर 12 दिन पर ब्रह्मभोज करने की परंपरा विगत कई वर्षों से चली आ रही है, जिसे आज तक लोग इसका निर्वहन करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MINTU KUMAR

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By MINTU KUMAR

MINTU KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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