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Jehanabad : जिले के चार अस्पतालों में एक्स-रे की सुविधा नहीं

िले के चार प्रखंड स्तरीय सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसके कारण इन अस्पतालों मैं दुर्घटना में घायल होकर आने वाले और हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को एक्स-रे कराने के लिए सदर अस्पताल आना पड़ता है.

जहानाबाद़़. जिले के चार प्रखंड स्तरीय सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसके कारण इन अस्पतालों मैं दुर्घटना में घायल होकर आने वाले और हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों को एक्स-रे कराने के लिए सदर अस्पताल आना पड़ता है.

जिले के सिकरिया पीएचसी, ओकरी पीएचसी, रेफरल अस्पताल घोसी और शकुराबाद सीएचसी में अभी तक एक्स-रे की मशीन नहीं लगायी गयी है जिसके कारण इन अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले हड्डी रोग के मरीजों के अलावा विभिन्न दुर्घटनाओं में घायल होकर आने वाले मरीजों को एक्स-रे की सुविधा नहीं मिलती है.

जबकि दुर्घटना में घायल और हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों के लिए एक्स -रे बहुत जरूरी होता है. बगैर एक्स-रे के ऐसे मरीजों का इलाज संभव नहीं है, बावजूद इसके उक्त अस्पतालों में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है. सिकरिया पीएचसी सदर प्रखंड जहानाबाद में है, जबकि शकुराबाद सीएचसी जिसका नया भवन हाल ही में बनकर तैयार हुआ है, वह रतनी फरीदपुर प्रखंड में है. रेफरल अस्पताल घोसी घोसी प्रखंड में है. जबकि ओकरी पीएचसी मोदनगंज प्रखंड में है. इन अस्पतालों में एक्स -रे की सुविधा नहीं रहने के कारण उक्त अस्पतालों के आसपास रहने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में इन अस्पताल में दुर्घटना में घायल होकर आने वाले मरीजों की प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सदर अस्पताल जहानाबाद रेफर कर दिया जाता है क्योंकि वहां एक्स-रे करने की सुविधा नहीं है. बगैर एक्स-रे दुर्घटना में घायल मरीज का इलाज करने में डॉक्टर असमर्थ हो जाते हैं.

दुर्घटना के दौरान मरीज की कौन सी हड्डी कहां फ्रैक्चर है अथवा किस जगह की हड्डी डीलोकेट हुई है, यह नहीं बताया जा सकता. बगैर इसकी जानकारी के मरीज इसका इलाज संभव नहीं है. ऐसे में इन मरीजों को जहानाबाद सदर अस्पताल रेफर करना चिकित्सक की मजबूरी बन जाती है. यही हाल हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों का होता है. जोड़ों के दर्द में जोड़ों के बीच गैप का पता एक्स-रे के बाद ही चलता है. शरीर के जॉइंट के बीच कार्टिलेज घिस जाने के बाद जॉइंट के बीच की हड्डी का गैप कम हो जाता है. इसके बाद दोनों जॉइंट की हड्डियां आपस में घिसने लगती है और मरीज को जोड़ का दर्द सताने लगता है. जॉइंट के बीच गैप कम होने का पता डिजिटल एक्स-रे के बाद ही चलता है. आजकल बहुत कम उम्र में ही लोगों को जॉइंट पेन सताने लगा है. खासकर घुटने और कूल्हे के दर्द से 30 से 35 वर्ष के उम्र वाले भी परेशान हो रहे हैं. जबकि पहले यह समस्या 50 और 60 वर्ष का उम्र पार करने के बाद आती थी. इस कारण इन अस्पताल के आसपास के रहने वाले ऐसे लोग जो जॉइंट पेन के शिकार हैं उन्हें इलाज और एक्स -रे के लिए सदर अस्पताल आना पड़ता है. जिले में प्रखंड स्तर पर कुल चार पीएचसी, तीन सीएचसी और दो रेफरल अस्पताल है. इसके अलावा जहानाबाद शहरी क्षेत्र में दो यूपीएससी हैं। यहां भी एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

जिले के दो पीएचसी, एक सीएचसी और एक रेफरल अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं है. प्रखंडस्तरीय किसी भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है. विभाग द्वारा ऐसी योजनाएं लाये जाने पर मरीज को यह सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. खालिद हुसैन, डीपीएम, जिला स्वास्थ्य समिति, जहानाबाद

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Prabhat Khabar News Desk
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