लापरवाही-रेलवे ट्रैक पर बैठ ट्रेन का इंतजार करते हैं यात्री
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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रेलवे के जागरूकता अभियान का भी नही दिखता है कोई असर जहानाबाद,नगर : रेलवे ट्रैक पर बैठ कर ट्रेन की प्रतीक्षा करते सैकड़ों की संख्या में यात्रियों की तसवीर देख यह एहसास होता है कि इन यात्रियों न तो कानून का भय है और न हीं इन्हें अपनी जान जाने की डर. ये निडर होकर […]
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रेलवे के जागरूकता अभियान का भी नही दिखता है कोई असर
जहानाबाद,नगर : रेलवे ट्रैक पर बैठ कर ट्रेन की प्रतीक्षा करते सैकड़ों की संख्या में यात्रियों की तसवीर देख यह एहसास होता है कि इन यात्रियों न तो कानून का भय है और न हीं इन्हें अपनी जान जाने की डर. ये निडर होकर रेलवे ट्रैक पर आराम फरमाते रहते हैं. जब तक की ट्रेन नहीं आ जाती है. सबसे बुरी स्थिति तो उस समय देखने को मिलता है जब किसी ट्रेन की आने की घोषणा की जाती है. घोषणा सुनते ही प्लेटफाॅर्म पर खड़े करीब आधे यात्री ट्रैक पर कूद जाते हैं.
उन्हें विपरीत दिशा से ट्रेन पर सवार होकर सीट लूटने की जल्दी होती है. हालांकि रेलवे ट्रैक पर ट्रेन का इंतजार करने के दौरान पूर्व में कुछ घटनाएं भी हो चुकी है. लेकिन इन घटनाओं से सबक लेने के बजाय यात्री ट्रैक पर खड़ा होकर ट्रेन का इंतजार करना अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते हैं. पटना-गया रेलखंड के अधिकांश स्टेशनों पर यह नजारा आम है. रेलवे ट्रैक पर यात्रियों की भीड़ देख कर यह अनुमान लगाना असंभव हो जाता है कि वे प्लेटफाॅर्म पर खड़े हैं या ट्रैक पर.
पीजी रेलखंड का जहानाबाद रेलवे स्टेशन यूं तो मॉडल स्टेशन के रूप में सुमार है लेकिन यहां की हालत और भी बदतर है. ऐसा नहीं है कि प्लेटफाॅर्म पर यात्रियों के बैठने के लिए जगह की कमी है. सभी प्लेटफाॅर्म पर पर्याप्त संख्या में शेड के साथ ही कुर्सीयां बनी है. जिस पर बैठ कर यात्री ट्रेन का इंतजार कर सकते हैं. लेकिन ऐसा होता नहीं दिखता है. जब भी स्टेशन परिसर में प्रवेश करने पर इस तरह का नजारा आम बात होती है.
न कानून का भय और न ही जान जाने की सताता है डर :ट्रैक पर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों को न तो कानून का भय होता है और न ही उन्हें अपनी जान जाने का डर सताता है. वे निडर होकर बेखौफ ट्रैक पर बैठे नजर आते हैं. हालांकि इस तरह की घटनाएं पूर्व में हो चुकी है. रेलवे पुलिस द्वारा ट्रैक पर बैठे लोगों को हटाने का काम भी किया जा चुका है लेकिन यात्री इसे मानने को तैयार नहीं है. वे प्लेटफाॅर्म पर बैठने के बजाय ट्रैक पर बैठ कर ही ट्रेन की प्रतीक्षा करना बेहतर समझते हैं. विशेष कर स्कूली छात्र तथा युवा यात्री काफी संख्या में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन का इंतजार करते देखे जाते हैं. इस कार्यक्रम में युवतियां भी अपने को पीछे नहीं रख पाती वे भी ट्रैक पर उतर कर ट्रेन पर चढ़ना हीं बेहतर समझती हैं. एक प्लेटफाॅर्म से दूसरे प्लेटफाॅर्म तक जाने के लिए रेलवे ट्रैक का उपयोग करना तो आम बात है.
रेलवे के जागरूकता अभियान का भी नहीं दिखता है कोई असर :ट्रैक पार करना तथा ट्रैक पर बैठ ट्रेन पर इंतजार करना जानलेवा हो सकता है. इस संबंध में रेल प्रशासन द्वारा हमेशा जागरूकता अभियान चलाकर यात्रियों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है. लेकिन इस अभियान का यात्रियों पर कोई असर होता नहीं दिखता है. अभियान के क्रम में जब यात्रियों को ट्रैक पार करते समय होने वाले दुर्घटनाओं के बारे में बताया जाता है तब वे कुछ देर के लिए इस बात को समझते हैं लेकिन जैसे ही ट्रेन आने की घोषणा होती वे दुबारा इस गलती को दोहराने लगते हैं.
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