रोजगार के लिए भटक रहे मजदूर समस्या ग्रामीण इलाके के मजदूर लौट रहे बैरंग

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शहर के मोड़ पर कुछ इस तरह काम के इंतजार करते हैं लोग. जहानाबाद सदर : पहले नोटबंदी की मार फिर शीतलहरी की मार के कारण काम के अभाव में मजदूर भटक रहे हैं. काम नहीं मिलने के कारण कई मजदूरों के घरों में चूल्हा जलने पर भी आफत आ गयी है. शहर से बीस […]

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शहर के मोड़ पर कुछ इस तरह काम के इंतजार करते हैं लोग.

जहानाबाद सदर : पहले नोटबंदी की मार फिर शीतलहरी की मार के कारण काम के अभाव में मजदूर भटक रहे हैं. काम नहीं मिलने के कारण कई मजदूरों के घरों में चूल्हा जलने पर भी आफत आ गयी है. शहर से बीस किलोमीटर दूर ग्रामीण इलाका से रोजाना सैकड़ों की संख्या में मजदूर शहर आते हैं. स्थानीय अरवल मोड़ पर सुबह में काम की तलाश में मजदूरों का जमावड़ा लगा रहता है. इक्का-दूक्का व्यक्ति जब काम लेकर आता है, तो काम की तलाश में मजदूरों का हुजूम घेर लेता है.
अरवल मोड़ पर काम की तलाश में दस बजे तक जमे रहते हैं और जब काम नहीं मिलता है, तब निराश होकर घर लौटने लगते हैं. काम की तलाश में मजदूर शीतलहरी व ठंड की परवाह किये बिना अपने गांव को सुबह ही छोड़ देते हैं और शहर आने पर जब काम नहीं मिलता है तो निराश मन से शाम में घर लौट जाते हैं. ग्रामीण इलाके में धनकटनी के समय मजदूरों को रोजगार मिल जाता था, लेकिन धनकटनी समाप्त होते ही ग्रामीण इलाकों में मजदूरों काे काम मिलना बंद हो गया. परिणाम स्वरूप मजदूर शहर की ओर रुख करने लगे हैं. नोटबंदी के बाद बाजार में कैशलेस की समस्या उत्पन्न हो गयी है. इसके कारण लोगों ने तत्काल में निर्माण कार्य लगभग बंद कर दिया है. इक्का -दूक्का लोग ही अपने निजी मकान बनवा रहे हैं. बाजार की स्थिति यह है कि फंड के अभाव में कई संवेदकों ने भी अपना काम पेंडिंग में डाल दिया है.
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