दवाएं नदारद , मरीजों का हाल-बेहाल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अस्पताल में दवाओं की घोर किल्लत जीवनरक्षक दवाएं भी उपलब्ध नहीं इलाज करा रहे मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रहीं दवाइयां जहानाबाद नगर : जिले के सरकारी अस्पतालों से दवाएं नदारद हैं और मरीजों का हाल बेहाल है. परेशान परिजन बेचारे स्वास्थ्य सेवाओं का इतना खराब हाल देख कभी सरकारी व्यवस्था को कोस रहे […]
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अस्पताल में दवाओं की घोर किल्लत
जीवनरक्षक दवाएं भी उपलब्ध नहीं
इलाज करा रहे मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रहीं दवाइयां
जहानाबाद नगर : जिले के सरकारी अस्पतालों से दवाएं नदारद हैं और मरीजों का हाल बेहाल है. परेशान परिजन बेचारे स्वास्थ्य सेवाओं का इतना खराब हाल देख कभी सरकारी व्यवस्था को कोस रहे हैं तो कभी खुद को . जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता भी नगण्य है. ऐसे में जिले के दूर-दराज के ग्रामीण इलाके से आने वाले गरीब व लाचार मरीज बेचारे भगवान भरोसे ही सरकारी अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं.
वे बाहर से खरीद जब दवा लाते हैं तभी उनके मर्ज का इलाज हो पाता है. हालांकि अस्पताल प्रबंधन इस बात को तो मानता है कि दवाओं की कमी है लेकिन वह राज्य स्वास्थ्य समिति को दवाओं की डिमांड भेजने की जानकारी देकर अपना पल्ला झाड़ लेता है. लेकिन विगत दो वर्षों से कमोवेश जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में यही हाल है. स्थानीय स्तर पर कभी कुछ दवाएं खरीदी जाती है जो ऊंट के मूंह में जीरा के बराबर होता है. स्थानीय स्तर पर खरीदी गयी दवाएं चंद दिनों में ही समाप्त हो जाती है फिर हालात पूर्व की भांति ही रहता है.
जिले के सदर अस्पताल ,रेफरल अस्पताल समेत सभी पीएचसी ,एपीएचसी और स्वास्थ्य केंद्रों में इन दिनों सरकारी स्तर पर मिलने वाली दवाओं की घोर किल्लत है. ओपीडी में मिलने वाली 33 दवाओं के बदले मात्र 13 दवाएं ही मरीजों को मिल रही है. वहीं इंडोर में 112 दवाओं के बदले सिर्फ 33 दवाएं ही दी जा रही है. हालात यह है कि इमरजेंसी में आने वालें मरीजों को दर्द निवारक दवाएं भी नहीं मिल रही है .कुछ गंभीर बीमारियों के मरीजों को सीधे पीएमएसीएच रेफर करने की प्रवृति के बीच जरूरी दवाएं नहीं मिलने से मरीज परेशान हैं. आंख-कान के मरीजों को दी जाने वाली ओफ्लोक्सासीन ,
कफ सीरप ,ऐलबेंडाजॉल , ट्रिमोक्साजॉल ,निलोनाजॉल ,फ्लोक्सासिलिन के साथ ही प्लास्टर ऑफ पेरिस भी नदारद है. ऐसे में बाहर से दवाएं खरीदने के लिए लोगों को पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं . आखरी आदमी तक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ पहुंच होने का दावा करने वाली जिला स्वास्थ्य समिति फिलहाल मरीजों की दिक्कतों से मुंह मोड़े हैं . अधिकारिक तौर पर सिर्फ जल्द दवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया जा रहा है. जबकि मरीज व उनके परिजन खुद को लाचार व असहज महसूस कर रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
राज्य स्वास्थ्य समिति को दवाओं की सूची भेजी गयी है. शीघ्र ही कुछ दवाएं उपलब्ध हो जायेगी .जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर भी कुछ इमरजेंसी दवाओं की खरीद कर उसे मरीजों को उपलब्ध कराया जा रहा है.
डा. के के राय, डीएस सदर अस्पताल
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